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नई दिल्ली : भारत की पूर्व विदेश मंत्री स्वर्गीय सुषमा स्वराज के निधन के एक साल पूरे हो जाने पर 'सुष्मांजलि' नाम से एक वर्चुअल इवेंट रखा गया। इस कार्यक्रम का आयोजन संयुक्त रूप से नेशन फर्स्ट कलेक्टिव, संस्कार भारती पूर्वोत्तर एवं संस्कृति गंगा न्यास ने किया। लेखक, प्रस्तुतकर्ता हरीश भिमानी ने इसका संचालन किया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता पर्यावरण, सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने की। कार्यक्रम में सुषमा स्वराज की सुपुत्री बांसुरी स्वराज की विशेष उपस्थिति थी। इसके अलावा अभिनेता मोहनलाल, कवि व गीतकार प्रसून जोशी, निर्माता निर्देशक सुभाष घई, गायक अनूप जलोटा, निर्माता निर्देशक मधुर भंडारकर, गायिका कविता कृष्णामूर्ति, अभिनेत्री कंगना रनौत, अमीषा पटेल, ईशा गुप्ता, गीतकार समीर अनजान, लेखक कमलेश पांडे, निर्देशक प्रियदर्शन, संगीतकार कुलदीप सिंह, अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा, गजेन्द्र चौहान और मुकेश खन्ना सहित फिल्म इंडस्ट्री से अनेकों गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया। जाने माने निर्देशक प्रियदर्शन इस कार्यक्रम के आयोजन समिति के अध्यक्ष थे। वर्चुअल इवेंट के जरिए सुषमा स्वराज के योगदान को कई लोगों ने याद किया। इस कार्यक्रम के उपलक्ष्य में गीतकार प्रसून जोशी के द्वारा स्वर्गीय सुषमा स्वराज को सुनाई गयी आखिरी कविता 'उखड़े उखड़े क्यों हो वृक्ष सुख जाओगे' भी उन्होंने सुनाई।
 भजन सम्राट अनूप जलोटा ने कार्यक्रम की शुरुआत सुषमा स्वराज के पसंदीदा गीत से की और कहा कि मेरी कई बार सुषमा जी से भेंट हुई और हर बार उनसे मिलकर मैं प्रभावित होता था। वे एक बहुत ही स्पष्ट वक्ता थी और हम कलाकारों के लिए भी उनके ह्रदय में विशेष स्थान था।
 फिल्म निर्देशक मधुर भंडारकर ने कहा कि मुझे सुषमा स्वराज जी से कई बार मिलने और बात करने का मौका मिला। वर्ष 2003 में मेरी फिल्म ‘आन: मेन एट वर्क’ के मुहूर्त पर वे ख़ास तौर पर दिल्ली से मुंबई आईं थी। सुषमा जी जब भी मिलती थी तो हमेशा मुझे मेरी फिल्मों के लिए प्रोत्साहित करती थी, मेरी फिल्म देखकर मुझे फ़ोन करके अपनी राय देती थी।
म्यूजिक डायरेक्टर कुलदीप सिंह ने 18 अप्रैल 2011 को सुषमा स्वराज द्वारा उनको लिखा गया पत्र पढ़कर सुनाया। उस पत्र में सुषमा ने मुझे आश्वासन दिया था कि 'कॉपीराइट बेंच' जब भी संसद में प्रस्तुत किया जाएगा उस समय हमारी पार्टी बिल को पूरा समर्थन देकर पारित करवाएगी और आप जैसे कलाकारों को न्याय दिलाने की कोशिश में अहम भूमिका निभाएगी। सुषमा का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि बिल तो पारित हो गया परन्तु आज अगर वो हमारे बीच में होती तो हमारे ऊपर आज जो अन्याय हो रहे हैं उनकी स्थिति और बेहतर होती।
 गीतकार प्रसून जोशी ने कहा कि कॉपीराइट संशोधन बिल में सुषमा जी का बहुत बड़ा योगदान रहा है। सुषमा स्वराज जी के मन में 'जीवन के प्रति काव्य दृष्टि थी। वे कविताओं की बहुत बड़ी प्रशंसक थी और मेरी लिखी हुई कविताएं उन्हें काफी पसंद आती थी। उनकी सोच को हमेशा याद रखेंगे।
 अभिनेत्री कंगना रनौत ने सुषमा स्वराज को याद करते हुए कहा कि उन्होंने अपने जीवन में कई बहादुरी भरे काम किये। उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री को अंडरवर्ल्ड के हाथों से बचाया और और एक पहचान दिया, वे मेरे लिए प्रेरणा स्वरुप हैं। उनकी पूरी ज़िन्दगी महिला सशक्तिकरण की मिसाल है जिसे हमारी आने वाली पीढ़ियां कभी भुला नहीं सकती।
 मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, मुझे विश्वास नहीं होता की सुषमा जी अब हमारे बीच नहीं हैं। सुषमा जी हमारी 40 साल की सहयोगी थी, वे एक बहुत ही जिंदादिल व्यक्ति थी। वे एक प्रखर वक्ता थी और उनका भाषण सुनने के लिए लोक सभा, राज्य सभा और पार्टी मीटिंग सब बहुत आतुर रहते थे। सबको प्यार बाटने वाली, सबसे प्यार से बात करने वाली और अपनी राय बेबाकी से बताने वाली थी हमारी छोटी। मेरे लिए वे आज भी एक मार्गदर्शक हैं और आगे भी रहेंगी।
सुषमा जी की सुपुत्री बांसुरी स्वराज ने अपनी माँ की पुण्यतिथि पर उन्हें याद करते हुए उनके बारे में कई बातें बताई।  उन्होंने बताया कि माँ कृष्ण उपासक थी उनका मानना था कि श्री कृष्ण ने जो भी कार्य किये उसमे खुद को समर्पित कर दिया। उन्होंने अपने जीवन में इसी उद्देश्य का अनुसरण किया। उन्होंने जो भी विभाग संभाला उसमें जनकल्याण के लिए बड़े से बड़े फैसले लिये। इसके अलावा माँ को फिल्म देखना और गाने गाना बेहद पसंद था।
उत्कृष्ट गायिका कविता कृष्णामूर्ति ने सुषमा जी को 'तू मेरा कर्मा, तू मेरा धर्मा' गीत समर्पित किया और कार्यक्रम का समापन किया।

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