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मुंबई : यू.एस. से कम कोरोनावायरस राहत सहायता मिलने की संभावनाओं ने सोने और कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित किया। चीन में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ने का भी सोने की कीमतों पर बुरा असर पड़ा। यू.एस. की तेल उत्पादन गतिविधियां फिर से शुरू होने से आपूर्ति में वृद्धि हुई, जबकि कमजोर मांग के कारण कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी रही। एंजल ब्रोकिंग लिमिटेड के रिसर्च नॉन एग्री कमोडिटी एंड करेंसी एवीपी प्रथमेश माल्या ने बताया के चीन का निर्यात बढ़ने और मजबूत औद्योगिक गतिविधियों के कारण बेस मेटल मांग बढ़ने की वजह से ग्रीन पर समाप्त हुआ।

सोना: सोना 0.4% की गिरावट के साथ 1921.9 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ। यू.एस. द्वारा कम प्रोत्साहन सहायता की संभावना ने इस पीली धातु की कीमतों को डुबो दिया।

राष्ट्रपति ट्रम्प ने एक सीमित कोरोनावायरस राहत बिल की मांग की, जिससे सुरक्षित निवेश, सोने के भविष्य पर काले बादल छा गए - जिसका उपयोग मुद्रास्फीति और मुद्रा दुर्बलता के निमित्त एक बचाव की तरह किया जाता है। हालांकि, व्हाइट हाउस के अधिकारियों और डेमोक्रेट्स ने कोशिश करके इस खाई को पाटने और एक व्यापक बिल पर सहमति लाने पर काम करना जारी रखा।

सितंबर, 2020 में चीन की अर्थव्यवस्था में जोरदार बढ़ोत्तरी हुई, जिससे विदेशी मांग में वृद्धि देखने को मिली। इससे निवेशकों की जोखिम लेने की सीमा बढ़ी जबकि सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ा।

इसके अलावा, अतिरिक्त कोरोनावायरस राहत सहायता को लेकर अनिश्चितता और डॉलर की बढ़ती कीमतों से भी सोने की कीमतें कम हुईं।

कच्चा तेल: डब्ल्यूटीआई क्रूड 2.8% की गिरावट के साथ 39.4 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ क्योंकि यू.एस. में तेल के उत्पादन की गतिविधियां फिर से शुरू हो गई हैं। इसके अलावा, यू.एस. द्वारा कम कोरोना राहत बिल की संभावना ने भी तेल की कीमतों को कम कर दिया।

मेक्सिको की यू.एस. खाड़ी में ऊर्जा उत्पादन को जोखिम में डालने वाले तूफान डेल्टा ने भी सप्ताहांत में खत्म होते हुए तेल की कीमतों में सेंध लगा दी।

अप्रत्याशित घटनाओं के बाद लीबिया की सबसे बड़ी शरारा ऑयलफील्ड के फिर से शुरू होने से दुनिया भर में तेल की आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, मांग में भी कमी रहने की काफी हद तक संभावना है।

कोविड-19 मामलों के फिर से बढ़ने और दुनिया भर की महत्वपूर्ण अर्थव्यवस्थाओं द्वारा फिर से लॉकडाउन लगाने से भी कच्चे तेल की कीमतों पर बुरा असर पड़ा।

बेस मेटल्स: मांग बढ़ने के बीच एलएमई पर बेस मेटल्स का कारोबार ग्रीन पर खत्म हुआ। चीन में एक संतुलित रिकवरी ने वैश्विक चिंताओं को कम किया और औद्योगिक धातुओं का समर्थन किया।

सितंबर 2020 में चीन की औद्योगिक गतिविधियों में एक मजबूत वृद्धि का असर विदेशी मांग में बढ़ोत्तरी और प्रोत्साहन-आधारित बुनियादी ढांचे की वृद्धि में दिखाई दिया, जिससे बेस मेटल की कीमतें बढ़ीं।

चीन के निर्यात में लगातार चौथे महीने वृद्धि हुई क्योंकि महामारी के बाद ज्यादा से ज्यादा अर्थव्यवस्थाएं फिर से गतिविधियां शुरू कर रही हैं। हालांकि, अमेरिकी द्वारा कम प्रोत्साहन सहायता देने की संभावना और कोरोनोवायरस के मामलों में एक खतरनाक वृद्धि ने औद्योगिक धातुओं की कीमतों पर असर डाला है।

तांबा: यू.एस. डॉलर की बढ़ती कीमतों के बीच, एलमई तांबा 0.38% की गिरावट के साथ 6737.5 डॉलर प्रति टन पर बंद हुआ। अमेरिका द्वारा कम प्रोत्साहन सहायता देने की संभावना ने लाल धातु की कीमतों को और कम कर दिया।

चीन की औद्योगिक गतिविधियों में तेज़ी से वृद्धि से औद्योगिक धातुओं को कुछ समर्थन मिल सकता है।

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