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~ छोटे शहरों से 66% जबकि बड़े शहरों से 34% देखी गई डिमांड ~

मुंबई, 17 जुलाई 2020: नोवेल कोरोनावायरस ने भारत में नौकरी के हालात को पूरी तरह बदल दिया है। कोरोना के कारण बहुत से नौकरीपेशा लोगों की नौकरी छिन गयी है, तो कई लोगों को अपनी नौकरी किसी भी समय चले जाने का डर बना हुआ है। इसलिए, सरकारी नौकरियों की मांग में अचानक बढ़ोत्तरी हुई है, जहाँ 82.33% प्रोफेशनल्स सरकारी नौकरी पाना चाहते हैं, ताकि उन्हें जॉब सिक्योरिटी मिल सके और साथ ही वेतन और अन्य भत्ते भी मिलें। ये आंकड़े देश के तेजी से बढ़ते एजुकेशन टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म अड्डा247 (Adda247) की ओर से कराए गये 'महामारी के दौरान सरकारी नौकरियों की स्थिति' अध्ययन में सामने आए हैं। इस स्टडी में, देखा गया है कि कोरोना के कारण शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की रोजगार वरीयता में बड़े बदलाव आये हैं।
यह अध्ययन देशभर में आयोजित किया गया था, जिसमें यह बात सामने आई है कि दिल्ली के लोगों में सरकारी नौकरियों की डिमांड सबसे ज्यादा यानी 11.04% है, और इसके बाद दूसरे स्थान पर पटना है, जहां 11.03% डिमांड देखी गई. सरकारी नौकरियों की बढ़ती मांग यह दर्शाती है कि सरकारी नौकरी में लोगों का रुझान होने का जॉब सिक्योरिटी ही प्रमुख कारण है। यह नॉन-मेट्रो सिटीज़ में बढ़ती तकनीकी सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता को भी दिखाता है।
मेट्रो सिटीज़ यानी बड़े शहरों में डिमांड लगभग 34% दर्ज की गयी, जबकि छोटे शहरों से यह डिमांड 66% रही। यह दर्शाता है कि महानगरों में काम करने वाले प्रोफेशनल्स ने बड़े पैमाने पर अपने गाँवों, शहरों में लौट गये हैं ताकि वे महामारी से बच सकें और इस संकट में अपने परिवार के साथ रह सकें। छोटे शहरों से सरकारी नौकरियों की भारी मांग दर्शाती है कि सरकारी नौकरियों को, प्राइवेट नौकरियों से ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। 
इस स्टडी में ज्यादातर आंकड़ों में एक फैक्ट निकलकर आया है कि हिस्सा लेने वालों में से 82.33% ने माना कि वे सरकारी नौकरी जॉब सिक्योरिटी की वजह से पाना चाहते हैं, जबकि 5% वे लोग हैं जो सरकारी नौकरी वेतन लाभ के लिए पाना चाहते हैं, और अन्य 2.77 % ने माना कि वे अन्य लाभों को देखते हुए गवर्नमेंट जॉब करना चाहते हैं।  क्योंकि वर्तमान परिस्थितियों को देखा जाए, तो कोरोना महामारी के चलते न जाने कितने प्रोफेशनल्स को बिजनेस इकॉनोमी गिर जाने पर जॉब से निकाल दिया गया। 
अड्डा247 के सीईओ और फाउंडर अनिल नागर ने कहा, “दरअसल इस गहन रिसर्च और सर्वे के माध्यम से हम चाहते थे कि पोस्ट-लॉकडाउन यानी लॉकडाउन के बाद होने वाले विकास का मूल्यांकन किया जाए। सर्विसेज और काम-काज के बंद होने से वर्किंग क्लास के अधिकतर प्रोफेशनल्स (पेशेवरों) को इस बात का डर है कि उनकी नौकरी अब खतरे में है, वे कभी भी बेरोजगार हो सकते हैं, क्योंकि कोरोना संकट में बहुत सारे पेशेवरों की नौकरी चली गयी या नौकरी खोने वालो की लाइन में थे। और इन्हीं कारणों के चलते पेशेवरों को ध्यान सरकारी नौकरियों की ओर हुआ, इस सर्वे में हमने एक बात यह भी देखी कि इन लोगों का झुकाव इस ओर ज्यादा होने का कारण जॉब सिक्योरिटी और सरकारी नौकरियों में मिलवे वाले वेतन और अन्य भत्तों का होना है।

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