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मुंबई : मदर्स डे की पृष्ठभूमि में ब्रेनली ने देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान प्रचलित होमस्कूलिंग ट्रेंड्स के बारे में ज्यादा जानकारी जुटाने के लिए अपने भारतीय यूजर-बेस में सर्वेक्षण किया। छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के लिए दुनिया के सबसे बड़े ऑनलाइन एजुकेशन प्लेटफार्म द्वारा किए गए इस सर्वेक्षण में एक-तिहाई उत्तरदाताओं (या 30.7%) ने कहा कि ई-लर्निंग को भारत में छात्र नियमित स्कूली शिक्षा के मुकाबले प्राथमिकता देते हैं। अन्य 32% ने कहा कि उनके लिए यह तय करना मुश्किल है कि क्या अधिक फायदेमंद है जबकि लगभग 37.3% ने कहा कि वे पारंपरिक लर्निंग को ई-लर्निंगसे ज्यादा पसंद करते हैं। एक सिमेट्रिक पैटर्न भी देखा गया जब छात्रों से पूछा गया कि क्या वे रिमोट स्कूलिंग को चुनौतीपूर्ण मानते हैं। 42.8% छात्रों ने कहा इस प्रश्न पर सकारात्मक जवाब दिया जबकि 33.2% ने नकारात्मक उत्तर दिया।
सर्वेक्षण के जवाबों से पता चलता है कि अपने बच्चों की शिक्षा से करीबी जुड़ाव होने के बावजूद, माता-पिता ऑनलाइन ट्यूटर्स जितने सहायक नहीं हैं। होमस्कूलिंग के दौरान 52.6% छात्रों का कहना है कि उन्हें अपने शिक्षकों (ट्यूटर्स)से ऑनलाइन मदद मिलती है, उसके बाद उनकी मां की ओर से।
सर्वेक्षण में आगे कहा गया है कि माताएं अपने बच्चे की शिक्षा को लेकर लॉकडाउन से पहले और बाद में, दोनों परिदृश्यों में सक्रियता से शामिल थीं। हालांकि, लॉकडाउन लागू होने के बाद माता-पिता, दोनों की भागीदारी बढ़ गई। माताओं का योगदान 47.2% से बढ़कर 53.4% हो गया, वहीं पिता के लिए यह
आंकड़ा 40% से बढ़कर 48.5% हो गया। एक अलग प्रश्न में 43.6% भारतीय छात्रों ने स्वीकार किया कि माताएं उनके अकादमिक अध्ययन में अधिक शामिल थीं, केवल 19.5% ने ही पिता का पक्ष लिया जबकि 31.3% उत्तरदाताओं में से लगभग एक-तिहाई ने माता-पिता की तुलना में किसी और की भागीदारी के प्रति न्यूट्रल प्रतिक्रिया व्यक्त की।  

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