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मैं अद्वितीय हूँ : कविता संग्रह


- इंदु भूषण बाली 


गज़ल

मत दिखाओ यह आंखें
फोड़ भी देंगे यह आंखें

देश मुझे अति प्रिय मेरा
झुका के देखो यह आंखें

शर्म नहीं आती ओ बेशर्म
क्या बेच खाई हैं यह आंखें

अपना समझ छोड़ा तुम्हें
निर्लज्ज तु, तेरी यह आंखें

देशद्रोह हमें सहन नहीं है
झुकाई हैं  तेरी यह आंखें


सुस्वाग्तम

      सुप्रभात

      अभिनंदन

    शुभकामनाऐं

              जय हिंद

                 खुश रहो

                         और

                   खुश रहने दो



विषय सूची



मैं अद्वितीय हूँ।


जी हां

   मैं

अद्वितीय

    हूँ

क्योंकि

   मैं

विश्व का

अकेला

ऐसा

पेंशनभोगी

   लेखक

      हूँ

जो पागल

   नहीं

   किंतु

भारत सरकार

संविधान के

  विरुद्ध

    मुझे

पागल की

   पेंशन

  देती है?

सम्मानणीयों

 जय हिंद




अपने हो गए बेगाने?


हमने

       न्याय

              क्या मांगा

अपने भी

            बेगाने

                    हो

                       गये

                           ?

                          श्रीमान

                                   जी

                            सम्मानणीयों


लहूलुहान भारत माता?

                   क्यों
                   रोज़
                 होता है
               बलात्कार
           न्याय की देवी का
              अधिवक्ताओं
                     व
              न्यायाधीशों
                   द्वारा
                    बीच
              न्यायालयों में
               संविधान के
                 रखवालों
                     के
                    समक्ष
            जिसके साक्षी हैं
                   भारत
                      के
            मुख्य न्यायाधीश
               दीपक मिश्रा
                      व
                 प्रधानमंत्री
                 नरेंद्र मोदी
                    एवम
                 राष्ट्रपति
            रामनाथ कोविंद
                    और
                   चुप हैं
                  समस्त
                विधायिका
  न्यायपालिका, कार्यपालिका
                    व
                पत्रकारिता
                  सुनकर
                     भी
                   चीखें
                लहुलुहान
               भारत माता
                     कीं
                      ?
              सम्मानणीयों
                जय हिंद
गीता क्या पढ़ते हो?

                      जब
                  सत्य-कर्म
                        से
                      डरते
                        हो
                      फिर
                      क्या
                      खाक
                     "गीता"
                      पढ़ते
                        हो
                         ?
                 सम्मानणीयों
                    जय हिंद

पूछेंगे भी नहीं?


            अब वह
              पूछेंगे
                भी
               नहीं
                कि
    डोगरी को आठवें
            शेड्यूल
                में
   दाखिल करवाने वाले
           योद्धाओं
               ने
           डोगरी के भविष्य
           के लिए
          क्या-क्या
            सपने
         संजोए थे
            चूंकि
             अब
           वह स्वयं
              भी
   "साहित्य आकादमी"
          पुरस्कार
          विजेता
             हैं?
      सम्मानणीयों
         जय हिंद

ऊब चुका हूँ?

बाली
     तेरे
     शहर
            में
       अकेला
            पड़
              गया
                   हुँ
चूंकि
   कांग्रेस
          मुझे
            भाति
                नहीं
और
 भाजपा
           से
              मैं
              ऊब
                 चुका
                        हुँ?
                 सम्मानणीयों
                          जय हिंद


मुझे अपत्ति है।

मुझे अपत्ति है
घोर अपत्ति है
उनसे जो इंसान को
अपने स्वार्थ के लिए
भगवान मान लेते हैं
और
भगवान को छोड़ देते हैं
उन्हीं स्वार्थी इंसानों के
रेहम-ओ-करम
 पर???
सम्मानणीयों
जय हिंद



पहले कांग्रेस से अब भाजपा को?

कुर्सी का
नशा कहें या प्रेम का
या
कहें
अंहकार का
क्योंकि
कहते थकते नहीं थे जो
वर्षों से
हमें

हमारी लेखनी को
"राष्ट्रभक्त"
परंतु
आज उन्हीं को
लगने लगे हम
"देशद्रोही"
जबकि मैं और मेरी लेखनी
वही है
अंतर केवल इतना है
कि प्रश्न जो
मैं
पहले कांग्रेस से पूछता था
अब
भाजपा को पूछता हुँ?
सम्मानणीयों
जय हिंद



अंतर नहीं है अधिक?

हम में
और
उनमें
अंतर
नहीं है अधिक
जिस सृष्टि से
मोह भंग
हो चुका है
हमारा
वह
उसमें
प्रवेश कर
प्रफुल्लित
हो रहे हैं
सम्मानणीयों
जय हिंद



मां की कोख।


कोख मां की
करते हैं
कलंकित
प्राणी वही
केवल
जो करते हैं
मात्र ढोंग
मातृत्व

मातृभूमि
एवं
सुकर्मों का
मानता व इन्सानियत का
और
भूल जाते हैं कि
ईश्वर के न्यायालय में
साक्ष्य या तर्क-वितर्क
नहीं होते
और
मिलता है सीधा
कर्मों का
"फल"
दण्ड या विदण्ड?
सम्मानणीयों
जय हिंद


नशा या अंहकार?


कुर्सी का
नशा कहें या प्रेम का
या
कहें
अंहकार का
क्योंकि
कहते थकते नहीं थे जो
वर्षों से
हमें

हमारी लेखनी को
"राष्ट्रभक्त"
परंतु
आज उन्हीं को
लगने लगे हम
"देशद्रोही"
जबकि मैं और मेरी लेखनी
वही है
अंतर केवल इतना है
कि प्रश्न जो
मैं
पहले कांग्रेस को पूछता था
अब
भाजपा को पूछता हुँ?
सम्मानणीयों
जय हिंद


शर्म कब आई?

अभी
तो
केवल
एक कदम ही
सरकार ने
बढ़ाया है
और
जजों की नीयत और नीयति भी
सामने आई?
वर्ना
न्यायपालिका के
न्यायाधीशो
जनता तो
पहले भी पीड़ित थी
और
अब भी पीड़ित है
मगर
शर्म आपको
कहां, कैसे
और
कब आई?
सम्मानणीयों
जय हिंद


अभद्र राजनीति?

अपनी
अभद्र राजनीति हेतु
देशभक्ती का
चोला ओढ़े
कुछ तथाकथित देशभक्त
विरोधी दल के
नेताओं को
"कुत्ते" ओर "देशद्रोही"
कहते जा रहे हैं
जो अमानवता
अज्ञानता का
प्रमाण हैं
चूंकि
लगता अपने दल का
हर नेता
उनको
राष्ट्रभक्त
और विरोधी दिखता
पूर्ण
राष्ट्रद्रोही
जबकि नेता अब तक
"राष्ट्रभक्ति"
के नाम पर
मतदाता से
"मत"
लेकर
मतदाता का ही
रक्त
चूसते आऐ हैं?
चूसते आऐ हैं?
चूसते आऐ हैं?
सम्मानणीयों
जय हिंद



भ्रष्ट तंत्र और पुरस्कार?

भ्रष्ट तंत्र
द्वारा
दिये गये
और
भ्रष्टाचार व चापलूसी लिप्त
लिये गये
बड़े से बड़े
साहित्यक पुरस्कार
से
अधिक श्रेष्ट हैं यह पंक्तियाँ
जिन्हें वेदपाल दीप

पदमदेव सिंह निर्दोष ने
साहित्य को
अर्पित कीं
"अक्खरें दा नईं तमाशा चाही दा
शायरी च अर्थ माशा चाही दा"
लिख कर
साहित्यकारों को चेताया
और निर्दोष नें
"उब्बी पीड़ भला के होई
जेकर खुल्लिये अक्ख निं रोई
पागल गी तुस
" पागल"
 निं आक्खो
खुश्बा तुस बी जाओ बतोई"
लिख कर
साहित्य पुरस्कारों की
चिंता किये बिना
मानवता का
मानवों को
संदेश दिया।
सम्मानणीयों
जय हिंद



आवश्यक नहीं है?

सगे
मां-बाप का बेटा
भाई हो
आवश्यक नहीं
जब तक उसमें
लक्ष्मण जैसे
अचार-विचार
न हों
मैं
तर्क-वितर्क

प्रमाण के साथ
कह रहा हूँ कि
आज मैं जिसकी
अर्थी को कन्धा
देकर आया हूँ
उस शवयात्रा में
उसका सगा भाई
जानबूझ कर
उसी क्षेत्र में
उपस्थित होते हुए भी
भागीदार नहीं
हुआ था?
सम्मानणीयों
जय हिंद



दुस्साहस व दुर्भाग्य?

जिस देश का
मुख्य न्यायाधीश
न्याय की फाइलें
भूल कर
गरीबों के, दिव्यांगों के
नाम पर
सरकार को दंगों का
डर दिखाने का
दुस्साहस
कर रहा हो
और
सरकार खामोश हो
इस से ज्यादा
राष्ट्र और न्याय का
दुर्भाग्य
क्या हो सकता है?
सम्मानणीयों
जय हिंद


भ्रष्टता व क्रूरता?

           मैं
        पागल
           हो
      सकता हुँ
         मगर
          मेरी
   पीड़ा व साक्ष्य
          तो
       कदापि
        नहीं
      इसलिए
       परम
   आवश्यकता
          है
       गंभीर
  चिंतन व मंथन
         कर
  कड़ी कार्यवाही
          की
        ताकि
     विधायिका
कार्यपालिका, न्यायपालिका
    पत्रकारिता
         की
भ्रष्टता व क्रूरता
        एवम
      सत्यता
    जगजाहिर
      होकर
   जन्म-जात
       नंगी
        हो?
  सम्मानणीयों
    जय हिंद


कर दिया जन्मजात नंगा।

मैं
इंदु भूषण बाली
कथित पागल
महापागल
देशविरोधी व देशद्रोही
जैसे आरोपों से
सुसज्जित, अलंकृत व पुरस्कृत
व्यक्तित्व हूँ
और
जब से जीवन रहते
छोड़ा है जीना
बीड़ी और शराब
त्यागा
और
कटू सत्य यह है कि
जब से मैंने
राष्ट्रभक्ति एवं मांनवता
कुछ कर दी है
कम
तब से
समाज के ठेकेदारों, बुद्धिमानों
और
तथाकथित राष्ट्रभक्तों ने
आरम्भ कर दिया है
कहना
बाली सुधर गया है
बाली स्वस्थ्य हो गया है
इतना कह कर छुपा ली
अपनी सारी
काली
करतूतें
कुछ इस तरह
जैसे
सिर के सफेद बालों को
काला कर
किन्तु
लाख प्रयासों से भी सत्य
असत्य
नहीं हो सका
काले बालों ने फिर सफेद होकर
दे दी दस्तक व चुनौती
और
खोल दी उनकी
बुद्धिमता, राष्ट्रप्रेम व ईश्वरभक्ति की
पोल
और कर दिया जन्मजात
नंगा? ? ?
सम्मानणीयों
जय हिंद


मानवता रौंद दी?

छाप लो
जब चाहो
पुस्तक साहित्य की
जिसमें सिर्फ
लानतें हैं
अनगिनत
और
लानतों के अलावा
कुछ भी नहीं है
उन
लेखकों व पत्रकारों
के लिये
जिन्होंने रौंद दी, कुचल दी
मानवता
पैरों में
और
सच्चाई से मूंह छिपा कर
कल्पनाओं के
भवसागर में
खाते रहे गोते
मात्र
पुरस्कारों के लिये?
सम्मानणीयों
जय हिंद


शांति के लिए आवश्यक है?

परिवर्तन
जिसकी
हम
लम्बे समय से
कर रहे हैं
मांग
या तो
वह मांग ही गलत थी
या हम
लम्बी कतारों का
विरोध न कर
सहन करें
पर्सव पीड़ा जितनी पीड़ा
ताकि अगली मांग
हम
मांग सकें
जिसमें गिरते हैं शव
और बहता है
रक्त
दोनो ओर से
चूंकि
शांति के लिये आवश्यक है
युद्ध
और
युद्ध के लिये
आवश्यक है
त्याग, सहनशीलता, एकता

राष्ट्र प्रेम?
सम्मानणीयों
जय हिंद


करते हैं बदनाम

मैं
शनि से नहीं डरता
बल्कि
डरता हूँ
उनसे जो
शनि को
देखते हैं
कुदृष्टि से
और
करते हैं बदनाम
न्याय के देवता
शनि को?
सम्मानणीयों
जय हिंद


मेरी प्रार्थना है हे भगवान?

सुप्रभात
सभी को
सुस्वाग्तम
सभी का
जय हिंद
सभी को
खुश रहो सभी
और
खुश रहने दो
सभी को
बस इतनी सी
 मेरी
प्रार्थना
है
 हे भगवान
पूरी करो, पूरी करो
पूरी करो?
सम्मानणीयों
जय हिंद



मैं समर्थन नहीं करता?


कुछ
प्रश्न क्या पूछे
मैंने
अपनों से, मित्रों से
कि 
बन गये
दुश्मन
सभी मेरे
जबकि मैंने
द्रोपदी के चीरहरण का
या
सीता को वनों में भेजनें का
नहीं दिया था
सुझाव
और
ना ही करता हूं समर्थन
बाली को
छुपकर मारने का
मैं
रावण के
सीताहरण को भी उचित
नहीं मानता
और
ना ही माना विभीषण की
रामभक्ति को
चूंकि
राम के भक्तों ने भी
कभी उसको
माना नहीं था
राष्ट्रभक्त
और
कब
दी थी राम भक्तों ने
उपाधि
उसको
राष्ट्रभक्ति
की
जबकि
घर का भेदी
लंका ढाए
विश्वविख्यात
है?
सम्मानणीयों
जय हिंद



संविधान के दायरे में?

जय हिंद
महोदय व महोदया
हारदिक नमसकार
सहर्ष बता रहा हूँ कि
बचपन से सुनता आ रहा हूँ
पटवारी की
इज्जत करना
लेकिन वह इज्जत सिर्फ
धूंस को मानता है
अफसर को मानना
लेकिन
अफसर सिर्फ धोंस व धूंस को मानता है
पत्रकार
जिसकी लाठी, उसकी भैंस है
वकील व जज
नयायपालिका सिर्फ और सिर्फ
पैसे दो और खरीद कर ले जाओ
भाढ़ में जाऐं साबूत
और
भारत के मुख्य नयायाधीश

पूर्व एवं वर्तमान
प्रधानमन्त्री
उनको
डर नहीं है
राष्ट्रपति का भी?
पूछ लो
मुझे व हर पीड़ित को
संविधान के दायरे में?
सम्मानणीयों
जय हिंद

हत्या है यह आत्महत्या?

कोई
जब भी
कभी भी करता है
आत्महत्या
तो
तथाकथित बुद्धिजीवियों का
आता है
निर्णय
कायर था
वह मानसिक रोगी था
किन्तु
इन तथाकथित बुध्दिजीवियों को
आज तक
नहीं पूछा किसी ने ऐसे
अबे कायर हत्यारो
तुमने की है उसकी हत्या
चूंकि
वह तो पीड़ित था प्रताडि़त भी
और
मुहं फेर लिया था जब तुम सभी ने
फिर भी वह रूका नहीं था
झुका भी नहीं था
व्यथा भी अपनी
लिख कर बतलाई थी
बस केवल
आपने
ठुकराया था उसे
वह प्रधानमंत्रियों व राष्ट्रपतियों से

राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग से भी
ठुकराया गया था
जिसने
मानवता
कुछ इस प्रकार दर्शाइ थी
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Grievance
No action
मेरे महान राष्ट्र के
राष्ट्रभक्तो
उच्च पदासीनों
मुझे
इतना बता दो
क्या
सरकारी कर्मचारियों के
सेनिकों के

अर्द्धसैनिकों
के
क्यों नहीं होते
मानव अधिकार?
सम्मानणीयों
जय हिंद


सुधारने वालों का हश्र?


मुझे
पटरी पर लाने
और
सुधारने वालों का
कुछ
इस तरह हुआ
हश्र कि
स्वर्ग सिधार गये कई
और
कई सुधारग्रह में रहे हैं
सुधर?
सम्मानणीयों
जय हिंद



फांसी पर लटकने?

किनारा
कर लिया
मैंने
कुछ अपनों से
घनिष्ट
मित्रों से
ताकि
शवयात्रा में
मेरी
न लगें लम्बी कतारें
यूँ भी
महान
राष्ट्रपति की शवयात्रा
से अधिक
लम्बी कतारें
फांसी पर लटकने
वालों की शवयात्राओं में
देखी हैं मेरे
राष्ट्र ने?
सम्मानणीयों
जय हिंद



पागलखानों में जीवन?

बाली
विड़म्बना है
मेरे
पागलपन को भी
कईयों ने किया
पसंद
जबकि सच्चाई यह है
वह
जीवन
जो बीत गया
पागलखानों में?
सम्मानणीयों
जय हिंद




स्वर्ग मां की गोद?

स्वर्ग
तो मैंने
देखा नहीं
है
किंतु
अनुभव किया था
वर्षों पहले
अपनी
पूज्य
मां
की गोद में?
सम्मानणीयों
जय हिंद



शक्ति नहीं है किसी में?

अभारी हूँ
मैं
उस मित्र का
जिसने अवगत कराया
मुझे
स्पष्ट रूप से
कि आप
पीड़ित थे
प्रताड़ित भी थे
पहले
मगर
कदापि नहीं थे
पागल
किन्तु
हर प्रमाण होते हुऐ भी
सिद्ध न कर पाये
आप
और
अब सत्य यह है
कि
पीड़ित नहीं हो आप
न ही हो प्रताड़ित
किंतु
हो चुके हो
स्पष्ट रूप में
जो पहले नहीं थे
फिर भी
शक्ति
नहीं है
किसी में भी
कहने 

प्रमाणित करने की
आपकी
मानसिकता?
जय हिंद




न्यायिक व्यापारी देखते रहे पारदर्शी तमाशा?

सम्भालो
आप भी
तीर व तर्कष
मोर्चा
अब हमने सम्भाला है
पहले
खरीद लेते थे आप
वकील व डाक्टर
और
न्यायधीश साहित
न्यायालय भी
और
पैसों की शक्ति तले
रौंद ड़ाले, कुचल डाले
समस्त साक्ष्य मेरे
खुलेआम किया
बार-बार
बलात्कार
मेरी
भावनाओं का
दिव्यांगता का
देशभक्ति का
देश के राष्ट्रपति
व उसके आदेश का
खुले न्यायालय में
तथाकथित बुद्धिमान न्यायाधीशों के समक्ष
मैं
लाचार शक्तिहीन,
विकलांग,
देशभक्त
पीड़ित व प्रताड़ित
रोता, चीखता, बिल्खता रहा
इससे पहले
और
न्याय के व्यापारी
देखते रहे
खुली आखों से
पारदर्शी
तमाशा???
सम्मानणीयों
जय हिंद

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  1. सुस्वाग्तम सम्मानणीयों
    हार्दिक सादर आभार सम्मानणीयों
    जय हिंद जय हिंद
    जय जय जय हिंद

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