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भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज अपना ६५वां जन्मदिन मना रहे हैं। पर क्या आप जानते हैं कि नरेंद्र मोदी एक कोमल हृदय कवि भी हैं। नरेंद्र मोदी ने कई कविताएं भी लिखी हैं और गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए उनका गुजराती कविताओं का एक कविता संग्रह भी प्रकाशित हो चुका है। 

अपनी भाषण कला से लोगों को बांधकर रखने वाले कवि नरेंद्र मोदी ने प्रेम और देशभक्ति पर कविताएं लिखी हैं। भाजपा की पत्रिका 'चरैवेति' में प्रकाशित मोदी की एक कविता का शीर्षक 'प्रेम' है, जो नरेंद्र मोदी की सबसे चर्चित कविता मानी जाती है। इस कविता में नरेंद्र मोदी मिलने और बिछड़ने की बात कर रहे हैं। 

आप भी पढिए ये कविता...  

जिन क्षणों में मुझे तुम्हारे होने का अहसास हुआ है 
मेरे दिमाग के शांत हिमालयी  जंगल में 
एक वन अग्नि धधक रही है  गंभीरता से उठती हुई 
जब मैं अपनी आंखें तुम पर रखता हूं 
मेरे मस्तिष्क की आंख में एक पूर्ण  चंद्रमा उदय होता है 
और मैं संपूर्ण पुष्पित चंदन के वृक्ष  से झरती महक से भर जाता हूं 
और तब जब आखिरी बार हम  मिले थे 
मेरे होने का पोर-पोर एक  अतुलनीय महक से भर गया था 
हमारे अलगाव ने  मेरे जीवन के आनंद के सभी 
शिखरों को पिघला दिया था  जो मेरे देह को झुलसाती है और 
मेरे सपनों को राख में बदल देती है 
पूर्ण चंद्रमा किसी नदी के सुदूर तट  पर बैठता है 
और दुर्दमनीय कंपकंपाती शीत मेरी दुर्दशा को निहारती है 
तुम्हारी कोमल उपस्थिति के बिना  मेरे जीवन के जहाज पर 
न कोई कप्तान और न कोई  पतवार है। 

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