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७४ वें स्वाधीनता दिवस के अवसर पर अखिल भारतीय जनसंघ के राष्ट्रीय परिषद् की ऑनलाइन बैठक आयोजित हुई जिसमें देश की एकता-अखण्डता और लोकतंत्र की रक्षा का संकल्प दोहराया गया। बैठक की अध्यक्षता करते हुए जनसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य भारतभूषण पाण्डेय ने कहा कि हमारे पूर्वजों के लंबे संघर्ष, विद्रोह और बलिदान के फलस्वरूप यह स्वतंत्रता प्राप्त हुई है। पूरे देश ने एक होकर इसे लिया है जिसकी रक्षा का दायित्व आने वाली पीढ़ियों पर सर्वाधिक है। जनसंघ अध्यक्ष ने पार्टी नेताओं से जमीनी स्तर पर सक्रिय एवं सचेत रहते हुए अंतिम पायदान पर खड़े लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ तथा विकास की किरण पहुँचाने और उनके जीवन को प्रकाशित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पक्षपात, भ्रष्टाचार, अपराध से मुक्त समाज के निर्माण में तत्पर रहकर बलिदानियों व स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों को सार्थक किया जा सकता है। लोकतंत्र को धनबल, बाहुबल और जातिबल से मुक्त कर योग्य और देशभक्त लोगों को राजनीति में आगे बढ़ने का अवसर सृजित करना आवश्यक है।
राष्ट्रीय महामंत्री राकेश कौल गुरखा ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर स्वावलम्बी-आत्मनिर्भर भारत बनाने में सभी से सहयोग की अपील की। बैठक में बारह प्रदेशों से नेताओं ने भाग लिया जिनमें उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, जम्मू और कश्मीर, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलांगाना, आन्ध्रप्रदेश आदि प्रमुख हैं।
कार्यक्रम का संचालन अंजनी तिवारी (वाराणसी) तथा जगदीश शास्त्री (मुम्बई) ने एवं धन्यवाद ज्ञापन उत्तर प्रदेश जनसंघ अध्यक्ष वासुदेवाचार्य ने किया। इस अवसर पर अमर कुमार रायजादा, आशीष शुक्ल, मृत्युंजय शुक्ल, अरविंद सहाय, संतोष सिंह, देश कुमार कौशिक, विजय कुमार शुक्ल, मनोहर शास्त्री, हरीश याग्निक, आशीष भट्ट, विरल पटेल, हंसा गग्गर, कान्ति तिवारी, डॉ.सीमा सिंह सेंगर, शिवम समेत तमाम प्रमुख नेताओं ने विचार व्यक्त किये।

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