महाराष्ट्र में 990 मेगावाट सोलर पोर्टफोलियो का हिस्सा बनी
मुंबई। पावर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन क्षेत्र की प्रमुख इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (ईपीसी) कंपनी ट्रांसरेल लाइटिंग लिमिटेड के निदेशक मंडल ने एनओपीएल पेस ग्रीन एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड ("एनओपीएल") में 49% इक्विटी हिस्सेदारी के अधिग्रहण को मंजूरी दे दी है। 20 करोड़ रुपये के नकद भुगतान वाला यह अधिग्रहण आवश्यक विनियामक अनुमतियों और अन्य शर्तों की पूर्ति पर निर्भर है।
एनओपीएल भारत सरकार की पीएम-कुसुम योजना के कंपोनेंट सी के तहत महाराष्ट्र में लगभग 990 मेगावाट (एसी) की कुल क्षमता का सौर ऊर्जा पोर्टफोलियो विकसित कर रही है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य कृषि फीडरों का सौरीकरण करना और राज्य के किसानों के लिए सिंचाई हेतु दिन के समय विश्वसनीय व स्वच्छ बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
इस विशाल प्रोजेक्ट की कुल अनुमानित लागत लगभग 3,900 करोड़ रुपये है। इसके लिए महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड के साथ 3.10 रुपये प्रति यूनिट की तय दर (टैरिफ) पर 25 वर्षों का दीर्घकालिक पावर परचेज एग्रीमेंट किया गया है। परियोजना के लिए एक प्रतिष्ठित वित्तीय संस्थान द्वारा डेट फाइनेंसिंग की स्वीकृति भी मिल चुकी है।
ओनिक्स रिन्यूएबल लिमिटेड के साथ हुए समझौतों के तहत ट्रांसरेल को शुरुआत में 49% हिस्सेदारी के साथ-साथ प्रोजेक्ट का वित्तीय और प्रबंधन नियंत्रण प्राप्त होगा। भविष्य में कंपनी के पास आपसी सहमति से अपनी हिस्सेदारी को 100% तक बढ़ाने का विकल्प भी मौजूद है।
इस रणनीतिक विस्तार पर टिप्पणी करते हुए ट्रांसरेल लाइटिंग लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं सीईओ रणदीप नारंग ने कहा, "यह केवल एक ईपीसी कंपनी से इंटीग्रेटेड एनर्जी सॉल्यूशंस कंपनी बनने की दिशा में हमारा एक ऐतिहासिक कदम है। सौर ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में प्रवेश करने से ट्रांसरेल अब जेनरेशन, ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन—ऊर्जा क्षेत्र की पूरी वैल्यू चेन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएगी। यह प्रोजेक्ट महाराष्ट्र के किसानों को निर्बाध बिजली प्रदान करने में मददगार साबित होगा और लंबे समय तक कंपनी को स्थिर राजस्व व बेहतर मार्जिन प्रदान करेगा।"
यह निवेश ट्रांसरेल के व्यावसायिक पोर्टफोलियो में विविधता लाएगा, जिससे केवल ईपीसी कॉन्ट्रैक्टिंग पर निर्भरता कम होगी और एसेट ऑनरशिप के माध्यम से नियमित व दीर्घकालिक राजस्व प्रवाह निर्मित होगा।
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