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मुंबई। संयुक्त राष्ट्र दिवस के अवसर पर आयोजित 'चिन्मय अमृत महोत्सव ग्लोबल सम्मेलन' में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने वैश्विक शांति और कूटनीति को लेकर भारत का स्पष्ट दृष्टिकोण साझा किया। नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इस सम्मेलन के मुख्य विषय 'अद्वैत' (वन रियलिटी) पर अपने विचार प्रस्तुत करते हुए उन्होंने कहा कि अद्वैत की अवधारणा हमें संकीर्ण सोच से बाहर निकालना सिखाती है।

विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, डॉ. जयशंकर ने रेखांकित किया कि 'अद्वैत' या 'एक वास्तविकता' का दर्शन हमें 'जीरो-सम गेम' (एक की जीत और दूसरे की हार) वाली मानसिकता को पूरी तरह त्यागने के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने कहा, ‘‘आज की वैश्विक परिस्थितियों में देशों को इस सोच से बाहर आकर सामूहिक, साझा, सामान्य हितों और हमारी आंतरिक एकता पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। यह दर्शन सिखाता है कि पूरी मानवता एक दूसरे से जुड़ी हुई है, इसलिए वैश्विक कल्याण के लिए सह-अस्तित्व की भावना अनिवार्य है।’’

दुनिया में चल रहे मौजूदा संघर्षों का हवाला देते हुए विदेश मंत्री ने आगाह किया कि शांति अविभाज्य है। दुनिया के किसी भी कोने में होने वाला युद्ध केवल वहीं तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वह हर जगह की शांति और स्थिरता के लिए एक गंभीर खतरा बन जाता है। डॉ. जयशंकर ने मजबूत शब्दों में दोहराया कि भारत हमेशा से किसी भी अंतरराष्ट्रीय विवाद या संकट के समाधान के रूप में 'बातचीत और कूटनीति' का पुरजोर समर्थक रहा है।

अपने संबोधन में विदेश मंत्री ने बहुपक्षवाद में सुधारों की वकालत करते हुए कहा कि वैश्विक संकटों के समय अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को किनारे बैठकर केवल तमाशा देखने वाला मूकदर्शक नहीं बने रहना चाहिए। आतंकवाद और अन्य समकालीन चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए उन्होंने वैश्विक समुदाय से एकजुट और कड़ा रुख अपनाने का आह्वान किया। चिन्मय मिशन की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित इस सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र के रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर स्टीफन प्रीसनर सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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