5 साल से कान में गूंज रही 'दिल की धड़कन' जैसी आवाज से मिली मुक्ति
मुंबई। महाराष्ट्र के जलगांव की रहने वाली 25 वर्षीय एक युवती को बीते पांच सालों से कान में लगातार दिल की धड़कन के साथ ताल मिलाती "सांय-सांय" और "धक-धक" की आवाज आ रही थी। कई डॉक्टरों की सलाह और जांच के बावजूद कोई स्थायी समाधान नहीं मिल पाया था। आखिरकार, मुंबई स्थित जसलोक हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में बिना किसी बड़ी सर्जरी के की गई एक आधुनिक प्रक्रिया से मरीज को इस गंभीर और अनसुलझी समस्या से पूरी तरह मुक्ति मिल गई है।
जसलोक अस्पताल में न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. फली पोंचा, एंडोवैस्कुलर न्यूरोसर्जन डॉ. सुधीर आंबेकर और हीमेटोलॉजिस्ट डॉ. समीर शाह की बहु-विषयक टीम ने मामले का विस्तृत विश्लेषण किया। एमआरआई (MRI) और एमआरव्ही (MRV) जांच में 'वीनस साइनस स्टेनोसिस' का पता चला—यानी दिमाग से खून को वापस हृदय तक ले जाने वाली मुख्य नस काफी संकरी हो गई थी। नस में इस रुकावट के कारण रक्त प्रवाह में उथल-पुथल हो रही थी, जो मरीज को कान में लयबद्ध आवाज के रूप में सुनाई दे रही थी।
न्यूनतम चिरफाड प्रक्रिया से हुआ उपचार:
अस्पताल की टीम ने मरीज की 'वीनस साइनस स्टेंटिंग' की। इस प्रक्रिया में बिना किसी बड़ी सर्जरी के, जांघ के ऊपरी हिस्से की एक नस में एक छोटा-सा छेद करके कैथेटर के जरिए मस्तिष्क की संकरी नस तक स्टेंट पहुंचाया गया, जिससे नस चौड़ी हो गई और रक्त प्रवाह सामान्य हो गया। स्टेंट लगते ही मरीज को 5 सालों से आ रही यह आवाज तुरंत बंद हो गई और उसे महज दो दिन के भीतर अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।
डॉ. सुधीर आंबेकर, एंडोवैस्कुलर न्यूरोसर्जन, जसलोक अस्पताल ने कहा, "पल्सेटाइल टिनिटस की अक्सर गलत पहचान कर ली जाती है या इसे केवल घबराहट और मानसिक तनाव मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। यदि इसके पीछे नसों की बनावट से जुड़ा कोई कारण हो, तो सही इलाज से लक्षण तुरंत खत्म हो जाते हैं। यह प्रक्रिया बेहद सुरक्षित है और मरीज बहुत जल्द ठीक हो जाता है।"
डॉ. फली पोंचा, न्यूरोलॉजिस्ट, जसलोक अस्पताल ने बताया, "लगातार बनी रहने वाली इस तरह की आवाज को टालने के बजाय इसकी गहराई से जांच होनी चाहिए। यह मामला यह साबित करता है कि कई बार लंबे समय से दिख रहे लक्षणों के पीछे ऐसा कारण होता है जिसका सटीक इलाज संभव है। 'सब कुछ ठीक है' सुनने के बाद भी मरीजों को उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए।"
जितेंद्र हरियाण, सीईओ, जसलोक हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर ने कहा, "सालों से इस अस्पष्ट और तकलीफदेह बीमारी से जूझ रही मरीज को पूरी तरह ठीक होकर घर लौटते देखना बेहद संतोषजनक है। जसलोक में हमारा हमेशा यह प्रयास रहता है कि मरीजों को उनकी जटिल या दुर्लभ बीमारियों के लिए सही निदान और विश्वस्तरीय न्यूनतम चिरफाड तकनीक से इलाज मिले।"
पल्सेटाइल टिनिटस क्या है?
दुनिया भर में लगभग 14.4% वयस्क सामान्य टिनिटस से पीड़ित हैं, लेकिन 'पल्सेटाइल टिनिटस' बेहद दुर्लभ है और कुल टिनिटस के मामलों में 10% से भी कम पाया जाता है। इसमें मरीज को अपनी दिल की धड़कन के साथ मेल खाती हुई "सांय-सांय" या "धक-धक" जैसी आवाज सुनाई देती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह आवाज लगातार बनी रहे, तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय तुरंत न्यूरोलॉजिकल और वैस्कुलर मूल्यांकन कराया जाना चाहिए।
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