ऑगमॉन्ट एनएसई के इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट (EGR) खंड में प्रमुख तरलता और बुनियादी ढांचा भागीदार बनेगा। कंपनी ईजीआर के निर्माण, रिडेम्प्शन, उधारी और मूल्य खोज में अहम भूमिका निभाएगी।
मुंबई। भारत के अग्रणी एकीकृत स्वर्ण मंच ऑगमॉन्ट एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (एनएसई) के साथ एक ऐतिहासिक रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की। यह सहयोग भारत के संगठित सर्राफा बाजार के विकास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। इसका उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट (ईजीआर) को व्यापक स्तर पर अपनाने को बढ़ावा देना है। ईजीआर भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा विनियमित एक्सचेंज पर कारोबार होने वाला ऐसा साधन है, जो भौतिक सोने को निवेशकों के डीमैट खाते में रखी जाने वाली डिजिटल प्रतिभूति में बदल देता है।
इस साझेदारी के तहत ऑगमॉन्ट ईजीआर के निर्माण, रिडेम्प्शन, तरलता उपलब्ध कराने, डिलीवरी और मूल्य खोज के लिए अपना व्यापक नेटवर्क उपलब्ध कराएगा। इसमें कंपनी के 4.2 करोड़ से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ता, स्पॉट प्लेटफॉर्म पर 4,975 से अधिक ज्वैलर्स, 4,600 से अधिक खुदरा केंद्र, 80 से अधिक 'गोल्ड फॉर ऑल' स्टोर और प्रमुख स्टॉक ब्रोकरों व वित्तीय सेवा प्रदाताओं के साथ एपीआई एकीकरण शामिल हैं।
ऑगमॉन्ट इंडिया गुड डिलीवरी मान्यता प्राप्त रिफाइनर है। कंपनी एमसीएक्स सहित विभिन्न एक्सचेंजों में सभी स्वर्ण वायदा अनुबंधों की डिलीवरी के लिए सूचीबद्ध है और गोल्ड ईटीएफ की अधिकृत भागीदार भी है। इससे ईटीएफ और ईजीआर के बीच एक स्वाभाविक सेतु तैयार होगा।
सोने के लिए यूपीआई जैसा बदलाव
जिस तरह यूपीआई ने सुरक्षित, पारदर्शी और विनियमित डिजिटल ढांचे के माध्यम से भुगतान प्रणाली में क्रांति ला दी, उसी तरह ईजीआर भी स्वर्ण बाजार में बड़ा बदलाव ला सकता है। इसके जरिए भौतिक सोने को एक ही एक्सचेंज-नियंत्रित व्यवस्था के अंतर्गत सुरक्षित रखने, खरीद-फरोख्त करने, गिरवी रखने और उधार देने की सुविधा मिलेगी। इससे भारतीय परिवारों के पास मौजूद विशाल स्वर्ण भंडार को औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से जोड़ा जा सकेगा।
भारत के लोगों के पास अनुमानित 30,000 से 35,000 टन सोना है, लेकिन अब तक इसका बड़ा हिस्सा आर्थिक रूप से निष्क्रिय रहा है। प्रत्येक ईजीआर एक्सचेंज द्वारा तय मूल्य पर भौतिक सोने के स्वामित्व का प्रतिनिधित्व करता है। साथ ही, सोना जमा कराने वाले निवेशक एनएसई के सिक्योरिटीज लेंडिंग एंड बॉरोइंग (एसएलबी) मंच के माध्यम से अपने सोने को आभूषण निर्माताओं को उधार देकर अतिरिक्त आय भी अर्जित कर सकते हैं।
सोने के आयात पर निर्भरता घटाने में मदद
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का स्वर्ण आयात 71.98 अरब अमेरिकी डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो कुल वस्तु आयात का लगभग 9.2 प्रतिशत था। यदि देश में पहले से मौजूद सोने को एसएलबी व्यवस्था के माध्यम से निर्माताओं तक पहुंचाया जाए तो आयातित सोने पर निर्भरता कम होगी, चालू खाते के घाटे पर दबाव घटेगा और अर्थव्यवस्था को अतिरिक्त गति मिलेगी। इसके लिए सरकार को ब्याज का बोझ भी नहीं उठाना पड़ेगा।
दुनिया में अपनी तरह का अनूठा उत्पाद
ईजीआर दुनिया के शुरुआती ऐसे एक्सचेंज-आधारित और भौतिक सोने से समर्थित साधनों में शामिल है, जिसमें रिफाइनिंग, वॉल्टिंग, ट्रेडिंग, उधारी और भौतिक रिडेम्प्शन जैसी सभी सुविधाएं एक ही विनियमित ढांचे में उपलब्ध हैं।
ईजीआर एक्सचेंज आधारित विनियमन, पारदर्शी मूल्य खोज, सुनिश्चित निपटान और एकीकृत उधारी व्यवस्था को एक साथ जोड़ता है, जिससे भारत जैसे विशाल स्वर्ण बाजार में नई संभावनाएं पैदा होंगी।
एनएसई के मुख्य व्यवसाय विकास अधिकारी (सीबीडीओ) श्रीराम कृष्णन ने कहा, "एनएसई का ईजीआर ढांचा भारत में भौतिक सोने के लिए पारदर्शी, कुशल और एक्सचेंज-विनियमित बाजार स्थापित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। जैसे-जैसे अधिक प्रतिभागी इस व्यवस्था से जुड़ेंगे, बाजार में तरलता बढ़ेगी, मानकीकरण मजबूत होगा और निवेशकों की भागीदारी का दायरा विस्तृत होगा। रिफाइनरों का पंजीकरण और तरलता प्रदाताओं की भागीदारी एक भरोसेमंद एवं मजबूत सर्राफा बाजार के निर्माण की आधारशिला है।"
ऑगमॉन्ट एंटरप्राइजेज लिमिटेड के पूर्णकालिक निदेशक केतन कोठारी ने कहा, "ईजीआर भारतीयों के भौतिक सोने के उपयोग का तरीका बदल देगा। यह पहली बार ईटीएफ और डिजिटल गोल्ड की खूबियों को एक साथ लाते हुए सोने को वस्तु, मुद्रा और वित्तीय परिसंपत्ति—तीनों रूपों में एक ही साधन के भीतर उपलब्ध कराता है। निवेशक इसे शेयर की तरह खरीद-बेच सकते हैं, अपने भरोसेमंद ज्वैलर से सिक्के या आभूषण के रूप में प्राप्त कर सकते हैं, उधार देकर आय अर्जित कर सकते हैं या इसके बदले ऋण ले सकते हैं। यह सब सेबी के विनियमित ढांचे के भीतर संभव होगा। दुनिया में कोई अन्य स्वर्ण उत्पाद इतनी बहुमुखी सुविधा नहीं देता। ऑगमॉन्ट ने इसी उद्देश्य से अपना पूरा नेटवर्क तैयार किया है और हम अपने ज्वैलर नेटवर्क, खुदरा केंद्रों तथा ब्रोकर एकीकरण के जरिए सोने को हर भारतीय परिवार के लिए एक उत्पादक परिसंपत्ति बनाना चाहते हैं।"
इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के राष्ट्रीय सचिव सुरेंद्र मेहता ने कहा, "ईजीआर का बाजार आज के टोकन आधारित गोल्ड बाजार से सौ गुना बड़ा हो सकता है। यह ऐसी सुविधाएं देता है जो किसी भी ब्लॉकचेन आधारित गोल्ड उत्पाद में उपलब्ध नहीं हैं—जैसे एक्सचेंज आधारित मूल्य खोज, सुनिश्चित निपटान, मानकीकृत गुणवत्ता और ऐसी उधारी व्यवस्था, जो निष्क्रिय पड़े सोने को सीधे उन निर्माताओं तक पहुंचाती है जिन्हें इसकी आवश्यकता होती है।
दुनिया ने सोचा था कि ब्लॉकचेन आधारित मुद्राएं धन व्यवस्था में क्रांति लाएंगी, लेकिन वे यूपीआई जैसा प्रभाव नहीं छोड़ सकीं। ईजीआर दुनिया को बताएगा कि खदान से लेकर बाजार, उपभोक्ता और फिर वापस पूरी श्रृंखला में मानकीकृत तरीके से सोने का कारोबार कैसे किया जाना चाहिए। जिस तरह भारत ने डिजिटल भुगतान का वैश्विक मानक स्थापित किया, उसी तरह ईजीआर के माध्यम से भारत स्वर्ण बाजार के लिए भी नया वैश्विक मानक तय करेगा।"
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