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मुंबई : कोरोना वायरस के मामलों की संख्या में निरंतर वृद्धि ने दुनियाभर में आर्थिक सुधार के कमजोर संकेत दिखाए हैं। यू.एस.-चीन तनाव बढ़ने और अमेरिकी डॉलर में रिकवरी से कच्चे तेल और बेस मेटल की कीमतों में गिरावट सीमित रही। हालांकि, सोने ने पॉजीटिव ट्रेड मैनेज किया और इकोनॉमिक रिकवरी पर बढ़ती चिंताओं के बीच निवेशकों को आकर्षित किया। 
एंजल ब्रोकिंग लिमिटेड के रिसर्च नॉन एग्री कमोडिटी एंड करेंसी एवीपी प्रथमेश माल्या ने बताया के दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते तनाव से स्पॉट गोल्ड में 0.11% की बढ़ोतरी हुई और यह 1930.9 डॉलर प्रति टन पर बंद हुआ। दुनियाभर में कोरोनोवायरस के मामलों की निरंतर वृद्धि ने आर्थिक सुधार की आशाओं को नुकसान पहुंचाया है, विशेषकर निवेशकों के बीच। इससे वे सेफ हैवन गोल्ड की ओर रुख कर रहे हैं। अमेरिकी डॉलर में रिकवरी और अमेरिकी रोजगार डेटा को बढ़ावा मिलने के कारण अन्य मुद्रा धारकों के लिए पीली धातु महंगी हो गई। हालांकि, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अधिकारियों ने आने वाले महीनों में कम ब्याज दर के माहौल और आर्थिक सुधार के लिए प्रोत्साहन उपायों की ओर इशारा किया।
ईसीबी की मौद्रिक नीति, जो इस सप्ताह के अंत में जारी होने वाली है, ऐसे निवेशकों को आकर्षित करना जारी रखेगी जो बढ़ते यूरो पर नीति निर्माताओं के रुख का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। वैश्विक आर्थिक सुधार के बारे में बढ़ती चिंताएं निवेशकों के बीच पीली धातु को आकर्षक बना रही हैं, जिससे आज एमसीएक्स पर अधिक कारोबार होने की उम्मीद है।
कच्चा तेल: डब्ल्यूटीआई क्रूड में 7.5% की गिरावट आई। वैश्विक महामारी के कारण मांग को लेकर चिंता के बीच यह 36.8 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। अमेरिकी डॉलर की मजबूती कच्चे तेल की कीमतों को कम कर रही है। वैश्विक तेल बाजार दुनिया भर में कोरोनोवायरस संक्रमण की बढ़ती संख्या के कारण आर्थिक मंदी से उबरने के लिए संघर्ष कर रहा है। ऐसे में आज एमसीएक्स पर कच्चे तेल के कम होने की उम्मीद है।
दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल निर्यातक सऊदी अरब ने अक्टूबर 2020 के लिए एशिया की ऑफिशियल सेलिंग प्राइज कम कर दी है, जिससे तेल की कीमतों में और गिरावट आई है। इसके अलावा, नए तेल आपूर्ति की तलाश में अमेरिकी कंपनियों की ओर से ड्रिलिंग बढ़ाने से भी कच्चे तेल की कीमतों में कमी हो रही है। ओपेक और उसके सहयोगियों ने वर्तमान तेल बाजार परिदृश्य की समीक्षा के लिए 17 सितंबर को बैठक बुलाई है। डॉलर की मजबूती, घटती ग्लोबल डिमांड और धीमी आर्थिक रिकवरी ने कच्चे तेल की कीमतों को नीचे धकेला है।
बेस मेटल्स: एलएमई पर बेस मेटल्स कमजोरी के साथ बंद हुए, जबकि एलएमई कॉपर 1.18% की बढ़त के साथ 6789.0 डॉलर प्रति टन पर बंद हुआ। एलएमई कॉपर इन्वेंट्री 15 साल के निचले स्तर पर है, जिससे कॉपर की कीमतों में गिरावट सीमित रही। अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते तनाव और वैश्विक आर्थिक सुधार की चिंताओं ने औद्योगिक धातु और तांबे की कीमतों को कम कर दिया। कॉपर को आज के सत्र में एमसीएक्स पर उतार-चढ़ाव भरा कारोबार करने की उम्मीद है।
नवंबर 2020 में होने वाले अमेरिकी चुनावों के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति द्वारा चीन के साथ सभी संबंधों को समाप्त करने का इशारा देने से औद्योगिक धातुओं का आउटलुक धुंधला हो गया है। वहीं, चीन से लगातार तीसरे महीने निर्यात मजबूत हुआ और बेस मेटल्स की कीमतों का समर्थन किया। दूसरी ओर, देश का एल्युमीनियम इम्पोर्ट 391,297 टन रहा, जो एक दशक में सबसे अधिक मासिक था।

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