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❖     अक्षय पात्र फांउडेशन ने राज्य सरकारों और समाजसेवी डोनर के साथ मिलकर “हैपिनेस किट” लांच
❖     इसका उद्देश्य सितंबर 2020 के अंत तक सरकारी स्कूल के बच्चों को स्कूल के खुलने तक 1,00,00 मल्टी यूटिलीटी (बहु उपयोगी) किट का वितरण करना है

मुंबई। जब देश के 115 मिलियन बच्चों के ऊपर कुपोषण का खतरा मंडरा रहा हो, तो ममाज को यह स्वीकार कर लेना चाहिए कि संकट की स्थिति तैयार हो रही है। जब अक्षय पात्र फाउंडेशन द्वारा चलाए जा रहे दुनिया के सबसे बड़े स्कूल में भोजन मुहैया कराए जाने वाला कार्यक्रम करोना वायरस की महामारी के कारण रूक गया और तमाम परिवार गरीबी की चपेट में आ गए, तब पता चला कि गरीबी का जीबन जी रहे बच्चे तीन तरह की बीमारियों- भुखमरी और कुपोषण का शिकार होने लगे हैं। बच्चों को इस महामारी के दौरान भूख की चपेट से बचाने के लिए फाउंडेशन ने “हैपिनेस किट” लांच करने की घोषणा की है, जिससे कमजोर वर्ग के बच्चों और उनके परिवार वालों की मदद की जा सके।
हैपिनेस किट के बारे में बोलते हुए, दी अक्षय पात्र फाउंडेशन के सीईओ, श्रीधर वैंकट ने कहा, “भारतीय होने के नाते हम सब लोगों को उच्च स्तरीय मानव पूंजी के निर्णाण पर ध्यान केंद्रित करना होगा जिसका लाभ सभी को मिलेगा। सभी जिम्मेदार लोगों की यह जिम्मेदारी है कि वे देश में समाज के साथ मिलकर एक मजबूत और स्वस्थ आबादी का निर्माण करें, जिससे देश का विकास होगा। इस सितंबर महीने में हम सभी राष्ट्रीय पोषण माह, मना रहे हैं, इस अवसर पर हमने, हैपिनेस किट के लांच करने की पहल की है जिसका उद्देश्य बच्चों की शैक्षणिक और पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करना है , खासकर वे बच्चे जो कोविड -19 महामारी के कारण स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। मैं अपने सह योगी दाता लोगों को धन्यवाद देता हूं, खासकर, क्राम्टन ग्रीव्ज, सविता आयल, शिंडलर, फ्रैंकलिन टैम्पलटन, ग्लँड फार्मा, इंडिया कार्बन, हिकल, साईं सल्फोनेट्स, सिस्को, अमेजन और उन ढेर सारे कारपोरेट और डोनर आगे आकर हमारी मदद कर रहे हैं और इस पहल को अपना सहयोग दे रहे हैं।
हैपिनेस किट के तहत भोजन की ऐसी सामग्रियां रखी गई हैं जो बच्चे को दैनिक उपयोग में जरूरी पोषक तत्व दे सकें जो उसके स्वास्थ्य, विकास और वृद्धि के लिए सहयोगी हों। किट के तहत दाल, मसाले, मूंगफली, गुड़, बिस्कुट और दूसरी खाने की चीज़ें दी जा रही हैं, यह केंद्र और राज्य सरकारों और एमएचआरडी द्वारा दिए जा रहे खाद्यान से अलग हैं । किट में साबुन, टूथब्रश, टूथपेस्ट और सैनिटरी पैड भी दिया जा रहा है ताकि बच्चों में साफ़-सफ़ाई की भावना का विकास हो। बच्चों के ज्ञान की क्षमता में वृद्धि हो इसके लिए गतिविधियों पर आधारित वर्कबुक भी इसमें शामिल है जो जरूरत के अनुसार क्षेत्रीय भाषा में दी जा रही हैं। इस किट में पोषण से जुढ़ी सभी जरूरी सामग्री जैसे ग्लूकोज़, आयरन और कैल्शियम, आयोडीन, प्रोटीन शामिल है जो बच्चे की इम्युनिटी (सहनशक्ति) बढ़ाने में मदद करेगी। प्रत्येक किट की पोषण वैल्यू 717 ग्राम प्रोटीन और 22,175 कैलोरी (कैल्शियम) एनर्जी (ऊर्जा) की है, जबकि प्रति खाने के आधार पर हर बच्चे को 23.9 ग्राम प्रोटीन और 739 कैलोरी की ऊर्जा प्राप्त होगी. 
हैपिनेस किट के पायलट प्रोजेक्ट को बहुत अच्छा प्रतिसाद मिला है, जिसके तहत बैंगलूरू में 1,200 स्कूली बच्चों और गोहाटी में 38,666 बच्चों को लक्षित किया गया था। अब अक्षय पात्र की योजना इसे बढ़ाने की है, और कार्यक्रम को दूर-दूर तक स्कूल के मिड-डे मील का लाभ लेने वाले स्कूलों तक पहुंचाने की है, जहां बच्चों के अभिभावकों को यह किट दिया जा सके। अभी तक लगभग 11,000 किट को वितरण किया जा चुका है। इन किट का वितरण मुंबई, दिल्ली एनसीआर, बैंगलूरू, वडोदरा, सिल्वासा, लखनऊ, हैदराबाद, गोहाटी और उत्तर प्रदेश में किया जा रहा है। इसकी पहुंच बढ़ाने की कोशिश चल रही है और इसका वितरण राज्य भर में स्कूल खुलने तक किया जाता रहेगा।

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