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बॉलीवुड में दो हिंदी फ़िल्मों के हीरो रह चुके कुमार कन्हैया ने किसानो की ज़िन्दगी बेहतर बनाने के लिए किसानग्राम संस्था की नींव रखी है।
फ़िल्मों में बढ़ रहे गुटबाजी और परिवारवाद से परेशान होकर कुछ वक़्त के लिए फ़िल्मों को कुमार कन्हैया सिंह ने अलविदा कह दिया है। कुमार कन्हैया बताते हैं कि उनकी जन्मभूमि बिहार हैं और बिहार हर साल बाढ़ की वज़ह से परेशान होता है और सबसे जादा नुक़सान बिहार के किसानो का होता है, इन्ही बातों को ध्यान मे रखते हुए एक सिंगल मंच किसानग्राम का निर्माण किया। इसमें उनका साथ दे रहे हैं भारत के अनेक हिस्सों से उच्च संस्थानो से उपाधी ले चुके
चेतन सिंह, जुही झा, अजय सिंह चौधरी, सुशीम गायकवाड़, प्रकाश चौधरी, सुमन शेखर जैसे प्रतिभाशाली युवकों की टीम। कन्हैया सिंह कहते हैं कि किसानो को आज भी उनके मेहनत से किए गए पैदावार फ़सल का उचित भुगतान नहीं होता। जिसका मुख्य कारण ख़रीदार से किसानो के बीच की दूरी है। जिसको तय करने में किसानो को पांच छह बिचौलियों के बीच से गुजरना पड़ता हैं जिसके वजह से कमीशनखोरी होती है। किसानग्राम ऐसे ही समस्याओं को सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध है। किसानग्राम के संस्थापक कुमार कन्हैया का कहना है कि किसानो के जीवन में सिर्फ़ किसानी या खेती ही मुख्य समस्या नहीं है। मेडिकल, उनके बच्चों को उचित शिक्षा रोज़गार जैसे अनेक चीज़ों पर काम किया जा सकता है। पहले चरण में किसानग्राम संस्था का बिहार के 10 जिलों में किसानग्राम कार्यालय खोलने का लक्ष्य है जहाँ से तक़रीबन 3000 युवाओं को रोज़गार देने के दिशा मे काम किया जायेगा जो दिसंबर तक पुरा कर लिया जाएगा। इसी सिलसिले में अब किसानग्राम  की वेबसाइट का प्रसारण कर दिया गया हैं, जहाँ 15 अगस्त से युवक अपना नामांकन करवा सकते हैं।

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