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कोरोना काल में "अग्निशिखा काव्य मंच मुम्बई" ने 51 दिन लगातार काव्य पाठ कर हजारों रचनाकारों साहित्यकारों को साथ जोड़ कर रचा एक नया इतिहास

 वैश्विक महामारी कोरोना की वजह से पूरा विश्व प्रभावित हुआ है औऱ भारत भी इससे अछूता नहीं रहा है यहां के लोग भी ४ महीनों से अधिक समय से घरों में कैद हैं जिससे हर तरह की सामाजिक गतिविधियां बंद हो गयी हैं। लोगों को सिर्फ़ सामाजिक दूरी का पालन करते हुए ही ज़रूरी कामों को करने की इजाज़त दी गयी है। ऐसे में लम्बे वक़्त से घरों में बंद लोग डिजिटल माध्यम से ही एक-दूसरे के संपर्क में हैं जो सुरक्षित और कारगर तरीका भी है। इस मुश्किल वक़्त में
एक सराहनीय प्रयास किया है अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच मुंबई ने, जिसकी सरंक्षक अध्यक्ष हैं डॉ अलका पांडेय। इस कोरोना काल में अग्निशिखा मंच के द्वारा अभी तक कुल मिलाकर 51गोष्ठियों का समापन किया जा चुका है, जिसमें पहले तो 40 दिन लगातार हर रोज काव्य पाठ किया जाता रहा लेकिन बाद में लॉकडाऊन ढीला पड़ने से इसे प्रत्येक रविवार को दो सत्रों में विभाजित कर दिया गया। अप्रैल से लेकर अभी तक 51 ऑनलाइन कार्यक्रम आयोजित किये जा चुके हैं जो अभी भी जारी है। अलका पांडेय ने साहित्यकारों के साथ-साथ युवा रचनाकारों को भी लोगों से जुड़ने का मौका दिया है। जिसका जीता जागता उदाहरण है हिमाचल प्रदेश के युवा शायर कवि लेखक चंदेल साहिब।
अग्निशिखा काव्य मंच सामाजिक, साहित्यिक संस्था की संस्थापक और आयोजक अलका पांडेय हैं। अलका का मानना है कि हर किसी को अपनी काबलियत साबित करने का मौका देना चाहिए जो उन्होंने अग्निशिखा मंच के द्वारा देश ही नहीं अपितु विदेशों में रह रहे भारतीयों को भी प्रदान किया।
 कार्यक्रम दो कारणों से सबसे हटकर, भव्य औऱ शानदार रहा, अग्निशिखा परिवार ने अपने 51 गोष्ठी कार्यक्रम पूरे किए जो कि हिंदू शास्त्रों के अनुसार भी बहुत बढ़िया व शुभता का अंक मन जाता है।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथी थे श्री हरि वाणी - कानपुर (वरिष्ठ साहित्यकार) व विशिष्ठ अतिथी हेमंत दास हिम - मुम्बई (सम्पादक बेजोड़ इंडिया) तथा श्रीमती आशा जाकड (साहित्यकार) इंदौर से। कार्यक्रम अध्यक्ष पी एल शर्मा (सम्पादक - अमृत राजस्थान) थे।
अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच का 51 वां ऑनलाइन कवि सम्मेलन भव्य उत्तम व शानदार रहा। इस काव्य गोष्ठी का ऑनलाइन आयोजन संस्था की अध्यक्षा डॉ अलका पांडेय साथ में उनके अनुज चंदेल साहिब के द्वारा किया गया। मंच का संचालन सदाबहार रहा जो कभी भुलाया नहीं जा सकता। कार्यक्रम दो सत्रों में किया गया। पहले सत्र में संचालनकर्ता की भूमिका को मिलकर निभाया मुंबई से अलका पांडेय, हिमाचल के शायर चंदेल साहिब (विक्की चंदेल) औऱ मधुर आवाज की धनी प्रतिभा पराशर ने।
 मुख्य अतिथि हरि वाणी जी - कानपुर (वरिष्ठ साहित्यकार), विशिष्ठ अतिथी हेमंत दास हिम - मुम्बई (सम्पादक बेजोड़ इंडिया), पी एल शर्मा (अमृत राजस्थान के वरिष्ठ पत्रकार), श्रीमति आशा जाकड़ और सुनील मिश्रा (एक्टर राइटर, छतीसगढ़) ने काव्य पाठ के मंच की शान को चार चांद लगा दिए।
दूसरे सत्र को संभाला अलका पांडेय, जनार्दन शर्मा, सुरेंद्र कुमार शर्मा, शोभा रानी तिवारी ने, सह संयोजक की भूमिका कवि आनन्द जैन अकेला जी ने निभाई।
निर्णायक का कार्यभार डॉ अरविंद ने बहुत खूबसूरती से निभाया, आभार का कार्य सफल हुआ संजय कुमार आदर्श मालवी केशव के मुख से औऱ सरस्वती वंदना की आशा जाकड़ व चंदेल साहिब ने।

अलका पांडेय ने लिखा -
कभी प्यार से हंसाती हैं किताबे
कभी दर्द से रुलाती है किताबे, कभी खौफ से डराती है किताबे, कभी अनबुझी पहेली सी उलझाती है किताबे,
हाँ हाँ किताबे

चंदेल साहिब ने फ़रमाया -
खुली क़िताब की तरह सँजो रखा है अपने दिल को साहिब
वहीं टूटे ख़ाब अधूरे जज़्बात औऱ पुराने ख़्यालात
इन्तजार है उस वक़्त का जब- दोनों को मिलाएगी क़ायनात

पन्ने पन्ने बिखर गये, अक्षर भी सब मौन रहे
तू मुझमें, मैं तुझमें हूँ, किसकी गाथा कौन कहे
पीड़ा की सीमा से आगे, कैसी पीड़ा, कौन सहे
अनहद में गीतों को रच देंं, ऐसे छन्द सवैया हों..
मैं पिंजरे का पँछी बेबस, तुम आजाद चिरैया हों...
- श्रीहरि वाणी

घर में बैठा बतियाता हर कोई हंस रहा है
बूढ़ों को गर्मी से राहत और जवां मन में हिलोर
बरखा से पनपी लहरों में युगल विवश रहा है।
लाख मुसीबत रहने पर भी सावन है तुष्टि का नाम
चाहे आलिंगन मिल रहा या विरह डस रहा है
- हेमन्त दास 'हिम'

रिमझिम मेघा बरसे अपने आंगन में बारिश की हम धूम मचावे सावन में,
पेड़ों पर हम झूला डालें सखियों संग संग झूलेंगे
ऊंचे ऊंचे पैग बढ़ाकर कर गीतों के स्वर गूंजेगे
खुशियों के हम मृदंग बजावे उपवन में
- आशा जाकड़़

साँवरिया आये नहीं, नैहर की रीत मोहें भायें नहीं
सैंया संग लागी हैं नज़रिया, सावन में बरसी बदरिया रे
साँवरिया आये नहीं, बह गई हैं सारी कजरिया रे
सवरियाँ आये नहीं
- श्रीमती अनिता शरद झा रायपुर छत्तीसगढ़

बारिश की झमाझम बरसती बूंदे,
विरहा की अग्नि में घी का काम करती।
ऐसे में दीदार हो सजन तेरा तो,
मेरी अंतरात्मा भी भव सागर तरती।
- सुनीता चौहान हिमाचल प्रदेश

माह सावन, महक रस धार, छठा निराली।
 - मधु वैष्णव "मान्या" जोधपुर राजस्थान

पहला अक्षर जब पढ़ना सीखा तो शब्दों से पहचान हुई
और शब्दों को जब गढ़ना सीखा तो किताबें मित्र हमारी खास हुई - रानी नारंग

सावन जब भी आता है, तन्हाई का एहसास कराता है।
लौट आ रूठ के जाने वाले, अकेला पन बहुत सताता है।
- डॉ. महताब अहमद आज़ाद उत्तर प्रदेश

सतरंगी वसुंधरा पर, फैली मोहक हरियाली है।
बहार श्रावणी व्याप्त हर तरफ, लगती छटा निराली है।।
- कवि आनंद जैन अकेला कटनी मध्यप्रदेश

सावन आयो ये हो सावन आयो ये, उमड़ घुमड़ कर आई बदरिया, आसमान में छाए बदरिया, छम छम छम छम बिजुरिया चमके, तन मन को हर्षाए बदरिया
- शोभारानी तिवारी

आयो सावन मैं बांट निहारु, आयो सावन मै बांट निहारु।
अमुवा की डाली पे झूला पड़ गए, राधा झूले कन्हैया झूलाए।
- वंदना शर्मा बिंदु देवास

हिन्दू धर्म में सावन मास का बड़ा महत्व है।
ये रिमझिम झिमझिम रस बरसाता बन जाता उत्सव है।
- शकुंतला (पावनी ) चंडीगढ़

वो कौन थी आकर मेरे सिरहाने करने लगी मुझसे बात
 मेरी किताब - कांता अग्रवाल

चहु ओर प्रकृति बारीश की बूंदो के सामिप्य से मुस्काई,सावन कि ऋतु आई,,,,,
कड़कती बिजली, और तेज बारीशो की फूहारो से ठंडी हवा आई घूम के, आया सावन झूम के।
- जनार्दन शर्मा

कार्यक्रम के प्रतिभागी थे।

1) मंजुला वर्मा हिमाचल प्रदेश
2)अंकिता सिन्हा जमशेदपुर
3) सुनीता चौहान हिमाचल प्रदेश
4)सुनीता अग्रवाल इंदौर मध्यप्रदेश
5)द्रोपती साहू सरसिज छत्तीसगढ
6)ज्ञानेश कुमार मिश्रा
7) गुरिंदर गिल मलेशिया
8) मधु वैष्णव जोधपुर
9) शोभा किरण,जमशेदपुर
10) इन्द्राणी साहू साँची छत्तीसगढ़
11)शेखर राम कृष्ण तिवारी
12) वैष्णो खत्री वेदिका
13)सुषमा शुक्ला इंदौर
14) शकुंतला (पावनी ) चंडीगढ़।
15) शुभा शुक्ला निशा रायपुर छ्तीसगढ़
16)शोभा रानी तिवारी
17)दिनेश शर्मा
18)ज्योति जलज
19) सीमा दूबे साँझ
20)"पद्माक्षी शुक्ल, पुणे,
21) रामेश्वर प्रसाद गुप्ता, नवी मुंबई,
22) ओमप्रकाश पांडेय, खारघर नवि मुंबई
23) रागिनी मित्तल कटनी
24) अश्मजा प्रियदर्शिनी पटना
25)आनंद जैन अकेला कटनी
26) संजय मालवी आदर्श
27) प्रतिभा कुमारी पराशर
28)ऐश्वर्य जोशी कापरे
29) विजया बाली
30)चंदेल साहिब बिलासपुर
31) सुनील दत्त मिश्रा एक्टर डायरेक्टर छतीसगढ़
31)कान्ता अग्रवाल गुवाहाटी
32) डॉ. दविंदर कौर होरा,
33)रानी नारंग जी,
34) मुन्नी गर्ग
35) डॉ संगीता पाल कच्छ गुजरात 
36)हीरा सिंह कौशल हिमाचल प्रदेश
37)माधवी अग्रवाल आगरा
38) डॉ पुष्पा गुप्ता मुजफ्फरपुर बिहार
39) डा. महताब अहमद आज़ाद उत्तर प्रदेश
40) अलका पांडेय मुंबई
41)रजनी अग्रवाल जोधपुर
42) चन्दा डांगी
43) उपेंद्र अजनबी गाजीपुर उत्तर प्रदेश
44) प्रेरणा सेन्द्रे
45) अवतार कौंडल
46) ममता तिवारी इंदौर
47) छगनराज राव "दीप" जोधपुर
48) दीपा परिहार "दीप्ति" जोधपुर
49)ज्योति भाष्कर ज्योतिर्गमय (बिहार)
50) स्मिता धीरसरिया
51)पदमा ओजेंद्र तिवारी मध्य प्रदेश
52)डॉ रश्मि शुक्ला प्रयागराज
53) रविशंकर कोलते
54)सावित्री तिवारी दमोह
55)नीलम पांडेय गोरखपुर
56)मीना गोपाल त्रिपाठी
57)डॉ साधना तोमर बागपत
58)मीना कुमारी परिहार पटना
59) जनार्दन शर्मा आशूकवि
60)गीता पांडेय "बेबी" जबलपुर
61) वंदना शर्मा बिंदु देवास
62)डॉ लीला दीवान
63)रेखा पांडे
64) गोवर्धन लाल बघेल छतीसगढ़
65) डॉ राम स्वरुप साहू कल्याण
66)भरत नायक "बाबूजी"लोहरसिंह, रायगढ़ (छ.ग.)
67) गरिमा लखनऊ
68)प्रिया उदयन, केरला
69) मीरा भार्गव सुदर्शना कटनी मध्यप्रदेश
70) सुरेन्द्र हरडे कवि नागपुर
71) आशा जाकड़ जी
72) मनीष कुमार सिंह गाजीपुर उत्तर प्रदेश
73) अनिता मंदिलवार सपना
74) डॉ नेहा इलाहाबादी दिल्ली
75) डाॅ उषा पाण्डेय कोलकाता
76) वंदना श्रीवास्तव
77) अनिता शरद झा
78) डां अंजुल कंसल- इंदौर
79) अर्चना पाठक निरंतर अम्बिकापुर
80)डॉ गुलाब चंद पटेल, गांधी नगर
81) कल्पना भदौरिया नाम
"प्रतिभा कुमारी पराशर"
82) विजयकांत द्विवेदी
83) निहारिका झा खैरागढ़
84) डॉ अलका पांडेय मुंबई
85) चंदेल साहिब बिलासपुर हि. प्र.
86) श्री हरि वाणी - कानपुर
87) हेमंत दास हिम - मुम्बई
88) आशा जाकड - इंदौर
89) पी एल शर्मा जी - राजस्थान
90) अश्विन पाण्डेय

अलका पांडेय का कहना है कि मंच की उत्कृष्टता इसी बात से जानी जा सकती है कि यहाँ कोई भी बड़ा या छोटा नहीं सब एक बराबर है, सब एक दूसरे को सहयोग करते प्रेरित करते मार्गदर्शन करते एवं सब ने एक दूसरे को सुना व सराहा, निर्णायकों ने स्पष्ट टिप्पणी दी सबको बहुत कुछ सीखने को भी मिला।
अभी तक 51 वें कवि सम्मेलन तक 4600 से ज्यादा कवियों ने कविता पाठ कर एक कीर्तिमान स्थापित किया है।
किताब, सावन पर रंग जमा एक दूसरे को सराहा, अपने काव्य पाठ से सभी को मंत्रमुग्ध किया।
पूरे भारत औऱ विदेश में रह रहे भाई बहनों को भी एक पटल पर लाकर खड़ा किया।
इतने लंबे अरसे से इस मंच ने एक परिवार की भांति सब को साथ जोड़े रखा तो इस सब का सारा का सारा श्रेय अग्निशिखा मंच को जाता है।
 इसलिए इस मंच की गरिमा औऱ शोभा बढ़ाने हेतू एक रचना कविता पाठ इसके नाम पर रखा गया, सभी रचनाकारों का यही मानना है कि 51 वें कवि सम्मेलन तक के इतिहास में यह विषय सबसे उत्तम विषय रहा।
अगला आयोजन १९/७/२०२० को सम्मान समारोह होगा।

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