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मुंबई : कई देशों में कोरोनावायरस की दूसरी लहर ने फिर लॉकडाउन लगने की बाजार की भावनाओं को बढ़ा दिया। और इसके परिणामस्वरूप सोने की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। ग्लोबल बैंकों की ओर से और अधिक स्टिमुलस इन्फ्यूजन ने पिछले सप्ताह सोने की कीमतों को ऊंचा रखा। पीली धातु की स्पॉट कीमतें पिछले सप्ताह 1.3% अधिक पर बंद हुई थीं। प्रथमेश माल्या (एवीपी- रिसर्च नॉन-एग्री कमोडिटी एंड करेंसी, एंजल ब्रोकिंग लिमिटेड) ने बताया कि अब सोना 1800 डॉलर के निशान की ओर बढ़ रहा है क्योंकि वायरस ने फिर से आर्थिक गतिविधियों में सुस्ती शुरू कर दी है।
महामारी के कारण लगभग हर जगह फिर से प्रतिबंध लग रहे हैं। इससे कच्चे तेल की डब्ल्यूटीआई कीमतें पिछले सप्ताह कम से कम 0.25% तक बंद हुई। वैश्विक अर्थव्यवस्था में क्वांटिटी के लिहाज से महत्वपूर्ण योगदान करने वाले राष्ट्र कोविड-19 पॉजीटिव केस बढ़ने से झटका भुगत रहे हैं। इस वजह से महामारी फिर से बाजार में कच्चे तेल की मांग में गिरावट का कारण बनी।
एनर्जी इंफर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (ईआईए) के अनुसार अमेरिकी कच्चे तेल की इन्वेंट्री का स्तर लगभग 5.7 मिलियन बैरल तक बढ़ गया है। कच्चे तेल की मांग में घटने की संभावना के कारण बाजार को उम्मीद है कि ओपेक अगली बैठक के बाद अपने उत्पादन में कटौती की घोषणा करेगा।
एलएमई पर पिछले हफ्ते बेस मेटल की कीमतें काफी ऊंची रहीं। सभी बेस मेटल्स में, पिछले सप्ताह जिंक सबसे ज्यादा लाभ में रहा। पिछले कुछ महीनों में चीन में जिंक उत्पादन कम था। चीन के जिंक के उत्पादन में, जो पहले से ही गिर रहा था, दुनिया के सबसे बड़े माइनर्स में से एक यानी अलास्का स्थित रेड माइनर्स के शिपमेंट में देरी के कारण भी प्रभावित हुआ था।
लगातार पांचवें महीने गिरावट की वजह से चीन की औद्योगिक मांग पर दबाव पड़ा है। वायरस के बढ़ते मामलों के कारण ग्लोबल केंद्रीय बैंकों के प्रोत्साहन पैकेज की वजह से बेस मेटल्स की कीमतों का समर्थन किया जा रहा है।
एलएमई पर पिछले सप्ताह कॉपर कीमतों में 5% की वृद्धि हुई थी। इसने शीर्ष कॉपर उत्पादकों से बढ़ते आपूर्ति की चिंताओं को जन्म दिया। चिली कॉपर के शीर्ष उत्पादकों में से एक है, और वहां लाल धातु की कीमतों में तेजी आई है।

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