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लाकडाउन में घबराहट से उबरने के लिए अग्निशखा मंच ने ऑनलाइन कवि सम्मेलन की शुरुआत किया था। यह सम्मेलन 27 मार्च 2020 से 10 मई 2020 तक लगातार जारी रही। अब पुनः रविवार को वापस किया जाएगा।
 लगातार 42 दिन पुरे होने के बाद हर रविवार कवि सम्मेलन किया जाएगा। 24 मई को हुए कवि सम्मेलन का विषय था “लेखक की कलम”।
गोष्ठी की शुरुआत में सरस्वति वंदना सुरेन्द्र शर्मा (जयपुर) ने की। कार्यक्रम के निर्णायक डॉ अरविंद श्रीवास्तव (दतियां) थे वहीं अतिथि वैष्णवी खत्री रही। मंच संचालन अलका पाण्डेय, डॉ प्रतिभा कुमारी पराशर, जनार्दन शर्मा, सुरेश हेगड़े व चंदेल साहिब ने किया।
मंच की अध्यक्ष डॉ अलका पाण्डेय ने बताया कि ऑनलाइन कवि सम्मेलन कराने का मक़सद था कोरोना के भय से मुक्ती, मन को सृजनात्मक कार्यों में लगाना, देश विदेश में लोगों को एक मंच पर जोड़ना, एक दूसरे से सिखने व समझने में सहयोग, घर में रहकर भी एक उत्साह का वातावरण तैयार कर आपस में मेलजोल, सुख दुख बाँटना एक पारिवारिक व आत्मीय वातावरण निर्मित करना। इस दो महिने में सबसे गहरा रिश्ता बन गया है।
'लेखन की कलम' में 77 लोगों ने काव्यपाठ किया एवं एक से बढ़कर एक रचनाकारो ने प्रस्तुतियाँ दी।
अग्निशिखा के संग काव्य के विविध रंगों में वैष्णो खत्री 'वेदिका' (जबलपुर, मध्यप्रदेश), इन्द्राणी साहू "साँची", अंकिता सिन्हा (जमशेदपुर, झारखंड), सुनीता चौहान (हिमाचल प्रदेश), शकुन्तला पावनी (चंडीगढ़), गुरिंदर गिल (मलेशिया), डॉ. दविंदर कौर होरा (इंदौर), डॉ अँजुल कँसल "कनुप्रिया" (इंदौर मध्यप्रदेश), वंदना, रमेश चंद्र शर्मा (देवास), डाॅ सुशील श्रीवास्तव "सागर" (सिद्धार्थनगर उप्र), शरद अजमेरा "वकील" (भोपाल, मप्र)डॉ पुष्पा गुप्ता (मुजफ्फरपुर बिहार), डॉ रश्मि शुक्ला (प्रयागराज), पदमा ओजेंद्र तिवारी (दमोह, मध्य प्रदेश), ओमप्रकाश पांडेय (मुम्बई), सुनीता अग्रवाल (इंदौर मध्यप्रदेश), गरिमा (लखनऊ), रानी नारंग (म. प्र.), साधना तोमर (बागपत), मंजुला वर्मा (मंडी, हिमाचल प्रदेश), शेखर तिवारी (आबूधाबी), सुरेन्द्र कुमार शर्मा (जयपुर राजस्थान), दीपा परिहार दीप्ति (जोधपुर), उपेंद्र अजनबी (गाजीपुर, उप्र), डॉ महताब अहमद आज़ाद (यूपी), निक्की शर्मा रश्मि (मुम्बई), संजय कुमार मालवी आदर्श (इंदौर), अख्तर अली शाह "अनंत" (नीमच), द्रोपदी साहू (महासमुन्द, छत्तीसगढ़), शुभा शुक्ला निशा, डाॅ उषा पाण्डेय (कोलकाता), हीरा सिंह कौशल (मंडी), रेखा पांडे (गुजरात, भुज), सुरेन्द्र हरड़ें (नागपुर), डॉ संगीता पाल (कच्छ, गुजरात), रामेश्वर प्रसाद गुप्ता (मुंबई), चंदेल साहिब (बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश), रागिनी मित्तल (कटनी), विष्णु असावा (बदायूँ, उत्तर प्रदेश), भावना सावलिया (गुजरात), अर्चना पाठक (अम्बिकापुर), इंद्राणी साहू (छत्तीसगढ़), अनीता शरद झा (रायपुर), गणेश प्रसाद तिवारी (लातुर, महाराष्ट्र), सुषमा शुक्ला (इंदौर), पद्माक्षी शुक्ल" (पुणे), नीरजा ठाकुर (नवी मुंबई), मीरा भार्गव (कटनी), डॉ ब्रजेन्द्र नारायण द्विवेदी, शैलेश वाराणसी, शोभा रानी तिवारी (इंदौर), गोवर्धन लाल बघेल (महासमुंद, छत्तीसगढ़), प्रिया उदयन (केरल), आनंद जैन अकेला (कटनी, मध्य प्रदेश), दिनेश शर्मा (इंदौर), ज्योति जलज (हरदा), अशोक गौतम घायल, जनार्दन शर्मा, डॉ मीना कुमारी परिहार, रिशू पाण्डेय (नासिक), गीता पांडेय "बेबी" (जबलपुर), गणेश निकम (चाळीसगाव महाराष्ट्र), सावित्री तिवारी (दमोह), रविशंकर कोलते (नागपुर), डॉ नीता श्रीवास्तव (मुम्बई), नीलम पाण्डेय (गोरखपुर), मंजुला अस्थाना महंती (हिमाचल प्रदेश), डॉ धाराबल्लभ पांडेय 'आलोक' (अल्मोड़ा, उत्तराखंड), प्रशांत कुमार पी के (हरदोई), आशा जाकड (इंदौर), डॉ प्रतिभा कुमारी पराशर (बिहार), मधु वैष्णव (जोधपुर), अरविंद श्रीवास्तव असीम (दतियां), अश्विन पाण्डेय (मुम्बई), अलका पाण्डेय (मुम्बई), रुपेश कुमार ने कविता पाठ किया। फिर मधु वैष्णव ने आभार व्यक्त किया। अंत में अलका पाण्डेय ने सबका धन्यवाद कर रविवार को फिर मिलेंगे कहकर पटल को विश्राम दिया।

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