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देश में कोरोनावायरस की वजह से 21 दिनों के लिए सब कुछ बंद होने का सबसे ज्यादा असर गरीब लोगों पर पड़ा है। बाहर फंसे तमाम गरीब ऐसे हैं, जिनके पास खाने का इंतजाम भी नहीं है।
इस समय इन गरीब मजदूरों के सामने पेट भरना सबसे बड़ी समस्या है। पिछले ग्यारह दिनों में इन गरीब मजदूरों के पास जो कुछ भी खाना राशन था सब खत्म हो चुका है।
रोजमर्रा की जिंदगी जीने वाले मजदूरों गरीबों के घर मे दो से तीन दिन से ज्यादा का राशन नही होता है। ऐसे में लाखों मजदूरों के सामने भुखमरी का संकट मंडरा रहा है।
युवा फ़िल्म निर्देशक निरंजन भारती ने बताया कि राज्य से सबसे ज्यादा गरीब मजदूर महाराष्ट्र मुम्बई में फंसे हुए हैं और इन ग्यारह दिनों में इनके सामने सबसे बड़ी संकट राशन भोजन की है, मुम्बई में फंसे मजदूरों को ना तो कोई यहां देखने वाला है और ना ही यहां इनका कोई सुनने वाला है।
 सरकार के द्वारा राज्य से बाहर फंसे कामगारों के लिए नोडल पदाधिकारियों का एक टीम बनाया गया। जिसमे महाराष्ट्र में फंसे कामगारों के लिए सरकार ने आईएस अमरेन्द्र प्रताप सिंह को महाराष्ट्र का प्रभारी बनाया पर जिस मकसद से सिंह को महाराष्ट्र का प्रभारी बनाया गया वो सुविधा सरकार के तरफ से उन्हें उपलब्ध नही कराया गया। जिसके कारण चाहकर भी पदाधिकारी किसी गरीब मजदूर को मदद नही कर पा रहे हैं।
भारती बताते हैं कि मुम्बई में सक्रिय सामाजिक संगठन नव झारखंड फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष किशोरी राणा की बात महाराष्ट्र प्रभारी अमरेन्द्र प्रताप सिंह से हुई तो उन्होंने बताया कि झारखंड सरकार ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव बालासाहेब ठाकरे से बात कर महाराष्ट्र में फंसे झारखंड के कामगारों के लिए राशन खाना का व्यवस्था करवाने के लिए आग्रह किया है पर अभी तक कुछ नही हो पाया है।
बातों ही बातों में अमरेन्द्र मुम्बई में झारखंड के सक्रिय सामाजिक संगठनों से फंसे लोगों को मदद करने की अपील करने लगे। मुम्बई में झारखंड के सक्रिय सामाजिक संगठन नव झारखण्ड फाउंडेशन अथा संभव राज्य के फंसे गरीब मजदूरों तक राशन खाना उप्लब्ध करवा रहा है। पर हम लोगों का संगठन इतना बड़ा नही है कि लाखों लोगों को राशन खाना मुहैया करवा सके।
 सरकार इसको अगर गंभीरता पूर्वक लेकर संगठन तक खाध्य सामाग्री उपलब्ध करवा देती है तो जरूर हम लोग यहां फंसे हर एक मजदूर तक राशन खाना पहुंचा सकेंगे।
 महाराष्ट्र में फंसे गरीब मजदूरों का जो डाटा अभी तक हम लोगों तक आया है वो 258792 ( दो लाख अठावन हज़ार सात सौ बानबे ) है। ये डाटा सरकार को भी उपलब्ध करवाया जा चुका है।
 बीते इन गयारह दिनों में हमारी संस्था 4570 ( साढ़े चार हज़ार )कामगारों तक राशन भोजन उपलब्ध करवाने में सक्षम हो पाया है। वहीं सरकार इतने ही दिनों में लगभग 51000 ( इक्यावन हज़ार ) लोगों को राशन भोजन उपलब्ध करवा सकी  है।
आज सरकार द्वारा राज्य से बाहर फंसे लोगों के नाम पर जिन भी सुविधाओं का प्रचार प्रसार किया जा रहा है वो केवल प्रचार मात्र तक ही सीमित है। ये सुविधाएं जरूरतमंद लोगों तक पहुंच ही नही पा रहा है।
सरकार के इसी लापारवाही के कारण महाराष्ट्र में फंसे लाखों दैनिक कामगार, ऑटो चालक, मजदूर के सामने भूखों रहने की संकट उत्पन्न हो चुका है। कोरोना के खिलाफ जंग में जीत तभी मिलेगी, जब हर आदमी को समय पर भोजन मिले और वह स्वस्थ रहे।


निरंजन भारती 

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