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 फिल्मों के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि UA केटेगिरी में क्लियर हुई फ़िल्म को सेंसर बोर्ड द्वारा  सर्टिफिकेट देने से मना किया गया हो। सेंसर बोर्ड की स्क्रीनिंग कमिटी को पंडित व्यास प्रॉडक्शन्स कृत "सरकार हाज़िर हो" में नरेंद्र मोदी के नाम पर कोई ऐतराज नहीं था। उसने इसे प्रमाण पत्र क्र. DIL/2/101/2018-mum प्रदान भी कर दिया था।इसी बीच ऐसा हुआ कि सेंसर बोर्ड की एक दूसरी स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा फ़िल्म केTV प्रोमो व ट्रेलर से नरेंद्र मोदी का नाम हटाने को कहा गया। इसी मसले को लेकर फ़िल्म के निर्माता - निर्देशक पंडित व्यास बोर्ड के रीजनल ऑफिसर से मिले। उन्होंने TV प्रोमो व ट्रेलर को देखा और उसी समय उनके पास हस्ताक्षर के लिए आये फ़िल्म के सेंसर प्रमाणपत्र को देने से यह कहकर  मना कर दिया की इसमें से जब तक नरेंद्र मोदी का नाम नहीं हटेगा, वे सर्टिफिकेट नही देंगे।
पंडित व्यास से यह पूछने पर कि फ़िल्म में नरेंद्र मोदी के नाम का क्यों जिक्र किया गया है, वे कहते हैं कि ,"मूलतः सरकार हाज़िर हो एक कोर्ट बेस्ड मूवी है। फ़िल्म की नायिका जूही का उसी के नौकर के साथ उसी के घर में कत्ल हुआ है और उस कत्ल के लिए उसके माता पिता को ही आरोपी  बनाया गया है।  इनका बेटा सागर, जो की अपनी ही जबरन बनाई गई बहिन जूही का प्रेमी भी है और शादी के लिए उसके 18 साल का होने का इंतज़ार कर रहा है। सागर
के पास प्लेन चिट के माध्यम से जीवित और मृत दोनों प्रकार के व्यक्तियों की आत्मा से बात करने की अद्भुत शक्ति है। जब कोर्ट में उससे उसकी अंदर के कमरे में सोई हुई माँ की आत्मा  से बात करने के बारे में पूछा जाता है। तब फ्लेशबैक में वह दृश्य आता है जब उसकी मां की आत्मा से उसने बात की थी। जूही द्वारा अपनी माँ से यह  पूछने पर की वे इस दुनियां में सबसे ज्यादा किससे प्यार करती हैं। प्लेनचिट पर नरेंद्र मोदी का नाम अंकित होता है। कोर्ट में जब इसका स्पस्टीकरण मांगा जाता है तो वह कहती हैं कि वे नरेंद्र मोदी जी के कार्यशैली से बहुत प्रभावित हैं , वह उन्हें सम्मान देती हैं। अब यदि कोई इसे प्यार कहता है तो उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता।" अब इसमें क्या गलत है यह मेरी समझ से बाहर है  पंडित व्यास कहते हैं।

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