कैबिनेट मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा के हाथों शुभारंभ; 12 कौशल प्रशिक्षण केंद्रों का उद्घाटन
मुंबई। आज के तेजी से बदलते तकनीकी और प्रतिस्पर्धात्मक युग में युवाओं को रोजगार योग्य बनाने के लिए कौशल विकास पर जोर देने के उद्देश्य से कौशल विकास विभाग ने ‘महात्मा ज्योतिबा फुले कौशल प्रशिक्षण केंद्र’ योजना शुरू की है। गुरुवार को मेट्रो चौक स्थित एल्फिंस्टन टेक्निकल हाई स्कूल परिसर के दक्ष हॉल में महात्मा ज्योतिबा फुले कौशल विकास योजना का ऑनलाइन उद्घाटन संपन्न हुआ। इस योजना का शुभारंभ कैबिनेट मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा के हाथों किया गया। इस योजना के अंतर्गत केवल 300 वर्ग फुट की जगह में कौशल प्रशिक्षण केंद्र शुरू करने की अनुमति दी गई है तथा पहले चरण में राज्य के 100 केंद्रों को प्रायोगिक आधार पर मंजूरी दी गई है। इनमें से 12 केंद्रों का उद्घाटन किया गया। इस पहल के माध्यम से कौशल प्रशिक्षण को गांव-गांव और बस्ती-बस्ती तक पहुंचाने का सरकार का प्रयास है।
मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा ने कहा कि महात्मा ज्योतिबा फुले कौशल प्रशिक्षण केंद्र भारत की पहली ऐसी पहल है। राज्य के झुग्गी-बस्तियों, दुर्गम, पहाड़ी, नक्सल प्रभावित और आदिवासी क्षेत्रों के जरूरतमंद युवक-युवतियों को कौशल विकास प्रशिक्षण की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। प्रमोद महाजन कौशल विकास एवं उद्यमिता अभियान (PMKUVA) के अंतर्गत कौशल प्रशिक्षण केंद्र शुरू करने के लिए जगह संबंधी मानदंडों में छूट दी गई है और अब न्यूनतम 300 से 1500 वर्ग फुट जगह में भी प्रशिक्षण केंद्र शुरू किए जा सकते हैं। नागपुर, डहाणू-पालघर, नंदुरबार, यवतमाल, पुणे, मुंबई, सिंधुदुर्ग और जलगांव जिलों में १२ केंद्रों का उद्घाटन किया गया।
इस बीच, वर्ष 2026 को क्रांतिसूर्य महात्मा ज्योतिबा फुले की द्विशताब्दी जयंती वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इसी अवसर को ध्यान में रखते हुए इस अभियान के अंतर्गत स्थापित होने वाले सभी कौशल विकास केंद्रों का नाम ‘महात्मा ज्योतिबा फुले कौशल प्रशिक्षण केंद्र’ रखने का निर्णय सरकार ने लिया है। आदरणीय मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने महात्मा ज्योतिबा फुले की द्विशताब्दी जयंती के अवसर पर उनके गांव में इस पहल की घोषणा की थी। महात्मा फुले के व्यावसायिक शिक्षा संबंधी विचारों के अनुरूप युवाओं को आधुनिक बाजार की आवश्यकताओं के अनुसार कौशल प्रशिक्षण देना, उन्हें रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य है, ऐसा भी लोढ़ा ने कहा।
मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा ने आगे कहा कि इससे पहले कौशल प्रशिक्षण केंद्रों के लिए बड़े स्थान की आवश्यकता होती थी। हालांकि, अब न्यूनतम 300 वर्ग फुट की जगह में प्रशिक्षण केंद्र शुरू किए जा सकेंगे, जिससे स्थानीय संस्थाओं, शैक्षणिक संस्थानों और स्वयंसेवी संगठनों को इस पहल में भाग लेने का अवसर मिलेगा। उपलब्ध स्थानीय बुनियादी सुविधाओं का प्रभावी उपयोग करके कौशल प्रशिक्षण का विस्तार करना संभव होगा। विशेष रूप से झुग्गी-बस्तियों, झुग्गी पुनर्वास क्षेत्रों, दुर्गम और पहाड़ी क्षेत्रों, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों, आदिवासी क्षेत्रों तथा ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को कौशल प्रशिक्षण की मुख्यधारा में लाने को प्राथमिकता दी जाएगी। गांवठाण, आकांक्षी जिलों और तालुकों तक प्रशिक्षण सुविधाएं पहुंचाकर सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों को रोजगार योग्य बनाने का सरकार का उद्देश्य है।
इस अवसर पर कौशल विकास, रोजगार एवं उद्यमिता विभाग के आयुक्त डॉ.अमित सैनी, रतन टाटा महाराष्ट्र राज्य कौशल विश्वविद्यालय की कुलगुरु डॉ. अपूर्वा पालकर, महाराष्ट्र राज्य नवाचार सोसायटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. श्रीकांत पाटिल, व्यवसाय शिक्षा एवं प्रशिक्षण निदेशालय के संचालक सतीश सूर्यवंशी सहित अन्य उपस्थित थे।
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