पुणे। महाराष्ट्र राज्य में पुणे स्थित भारतीय वायुसेना (IAF) स्टेशन एवं लोहेगांव एयरपोर्ट के प्रतिबंधित क्षेत्र में कथित अवैध अतिक्रमण, अनधिकृत भूमि भराव (लैंड फिलिंग), प्राकृतिक जल निकासी मार्गों में अवरोध तथा निर्माण मलबे एवं नगर निगम के ठोस कचरे के अंधाधुंध डंपिंग का मामला सामने आया है। इसने राष्ट्रीय सुरक्षा, विमानन सुरक्षा, पर्यावरणीय क्षति तथा रक्षा नियमों के संभावित उल्लंघन को लेकर गंभीर चिंताएं उत्पन्न कर दी है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, भारतीय वायुसेना द्वारा बार-बार संबंधित प्रशासनिक एवं नागरिक प्राधिकरणों को अवगत कराने के बावजूद अवैध अतिक्रमण लगातार जारी रहे। बताया जाता है कि भारतीय वायुसेना ने पुणे महानगरपालिका (PMC), पुणे महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (PMRDA) तथा जिला कलेक्टर, पुणे को कई बार पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप करने, अतिक्रमण हटाने, अवैध रूप से डाले गए निर्माण मलबे को हटाने तथा क्षेत्र की प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था बहाल करने का अनुरोध किया।
प्राकृतिक जल निकासी बाधित, बाढ़ का खतरा बढ़ा
इस पूरे मामले का सबसे चिंताजनक पहलू प्रतिबंधित क्षेत्र से गुजरने वाले प्राकृतिक जल निकासी मार्ग का अवरुद्ध होना है। जानकारी के अनुसार, इस नाले में बड़ी मात्रा में निर्माण मलबा एवं मिट्टी डाली गई है, जिससे वर्षा जल का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान मानसून के दौरान यह अवरुद्ध जल निकासी व्यवस्था रक्षा प्रतिष्ठान, विशेषकर एयर फोर्स के बम डंप क्षेत्र के आसपास गंभीर जलभराव और बाढ़ का कारण बन सकती है। ऐसी स्थिति पुणे की सबसे महत्वपूर्ण सामरिक सैन्य स्थापना के संचालन एवं सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है।
राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा
लोहेगांव एयर फोर्स स्टेशन देश की वायु रक्षा व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण केंद्र है और यहां कई संवेदनशील रक्षा अवसंरचनाएं स्थित हैं। ऐसे में प्रतिबंधित क्षेत्र के भीतर किसी भी प्रकार की अनधिकृत गतिविधि न केवल सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन है, बल्कि संवेदनशील सैन्य परिसंपत्तियों की सुरक्षा को भी खतरे में डालती है।
सूत्रों के अनुसार, अधिकारियों ने आशंका जताई है कि रक्षा प्रतिष्ठानों के आसपास अनियंत्रित अतिक्रमण और अवैध विकास गतिविधियां निगरानी व्यवस्था, आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमता तथा सैन्य संचालन की तैयारियों को प्रभावित कर सकती हैं। एयरबेस की सामरिक महत्ता को देखते हुए यह मामला अब राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बन गया है और तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता है।
वायुसेना ने लगातार पत्र लिखे, लेकिन प्रशासन निष्क्रिय रहा
भारतीय वायुसेना ने राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय मानते हुए लोहेगांव एयर फोर्स स्टेशन के आसपास हो रहे अवैध अतिक्रमण, प्राकृतिक जल निकासी मार्ग में अवरोध तथा निर्माण मलबे की अवैध डंपिंग का मुद्दा कई बार पुणे महानगरपालिका (PMC), पुणे महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (PMRDA) और जिला कलेक्टर, पुणे के समक्ष उठाया।
वायुसेना ने संबंधित विभागों से तत्काल अतिक्रमण हटाने, नाले में डाले गए मलबे को साफ करने तथा वर्षा जल के प्राकृतिक प्रवाह को पुनः स्थापित करने की मांग की।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार भारतीय वायुसेना ने निम्नलिखित तिथियों पर आधिकारिक पत्र भेजे—
वर्ष 2024: 11 जून, 5 जुलाई, 27 सितंबर, 29 नवंबर एवं 27 दिसंबर।
वर्ष 2025: 31 जनवरी, 20 मार्च, 30 जुलाई, 2 सितंबर, 8 अक्टूबर एवं 8 नवंबर।
वर्ष 2026: 24 जनवरी, 19 फरवरी, 26 फरवरी, 21 अप्रैल एवं 12 जून।
करीब दो वर्षों में भारतीय वायुसेना द्वारा कुल 16 आधिकारिक पत्र भेजे जाने की जानकारी है। इसके बावजूद संबंधित विभागों द्वारा अतिक्रमण हटाने, अवरुद्ध जल निकासी मार्ग को बहाल करने अथवा अवैध मलबा हटाने के लिए कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
लगातार बनी इस निष्क्रियता ने गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं, क्योंकि यह मामला देश की महत्वपूर्ण रक्षा स्थापना, विमानन सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और रक्षा नियमों के पालन से जुड़ा हुआ है। विभिन्न हितधारकों ने राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने, सुरक्षित विमान संचालन बनाए रखने और पर्यावरणीय क्षति रोकने के लिए तत्काल समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया है।
अवैध डंपिंग से बर्ड स्ट्राइक का खतरा
राष्ट्रीय सुरक्षा के अलावा निर्माण मलबे और नगर निगम के ठोस कचरे की अवैध डंपिंग ने विमानन सुरक्षा के लिए एक और गंभीर खतरा उत्पन्न कर दिया है। कचरे के ढेर बड़ी संख्या में पक्षियों, आवारा पशुओं और अन्य जीवों को आकर्षित करते हैं, जिससे बर्ड स्ट्राइक की संभावना काफी बढ़ जाती है।
विश्वभर में बर्ड स्ट्राइक विमान संचालन के लिए सबसे गंभीर जोखिमों में से एक मानी जाती है, विशेषकर टेकऑफ और लैंडिंग के दौरान जब विमान कम ऊंचाई पर उड़ान भरते हैं। चूंकि लोहेगांव एयरपोर्ट का उपयोग नागरिक एवं सैन्य दोनों प्रकार की उड़ानों के लिए किया जाता है, इसलिए पक्षियों की बढ़ती गतिविधियां वाणिज्यिक विमानों तथा रक्षा विमानों दोनों की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती हैं।
रक्षा कानूनों के संभावित उल्लंघन
वर्क्स ऑफ डिफेंस एक्ट, 1903 के तहत अधिसूचित रक्षा प्रतिष्ठानों के आसपास निर्माण एवं विकास गतिविधियों पर प्रतिबंध लागू हैं। जानकारी के अनुसार, बम डंप की बाहरी सीमा से 900 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य प्रतिबंधित है। ऐसे में प्रतिबंधित क्षेत्र में किसी भी प्रकार का अनधिकृत विकास कानूनी जांच का विषय बन सकता है।
संबंधित एजेंसियों से यह जांच किए जाने की अपेक्षा है कि क्या जारी अतिक्रमण, भूमि भराव और अवैध डंपिंग रक्षा, पर्यावरण एवं नगर निगम कानूनों का उल्लंघन करते हैं।
पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव
निर्माण मलबे की अवैध डंपिंग से पर्यावरण को भी व्यापक नुकसान पहुंचा है। प्राकृतिक जल निकासी मार्गों के अवरुद्ध होने से जल प्रवाह प्रभावित हुआ है, शहरी बाढ़ का खतरा बढ़ा है, मिट्टी की गुणवत्ता खराब हुई है तथा क्षेत्र की जैव विविधता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि आगे और पारिस्थितिक क्षति रोकने के लिए प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था को तत्काल बहाल किया जाना अत्यंत आवश्यक है।
ध्वस्तीकरण अभियान के दौरान प्रीतम खांडवे द्वारा कथित हस्तक्षेप
लोहेगांव के खांडवेनगर स्थित महालक्ष्मी लॉन्स क्षेत्र में कथित रूप से अवैध रूप से स्थापित सात रेडी-मिक्स कंक्रीट (RMC) प्लांट्स के खिलाफ चलाए गए ध्वस्तीकरण अभियान के दौरान मौके पर तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रीतम खांडवे ने कथित रूप से अधिकारियों के साथ तीखी बहस कर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई में बाधा डालने का प्रयास किया। उन पर अतिक्रमण विभाग के एक अधिकारी का कॉलर पकड़ने तथा ध्वस्तीकरण दल की ओर बढ़ने का भी आरोप है, जिसके कारण कुछ समय के लिए विवाद की स्थिति बन गई।
कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात महाराष्ट्र सिक्योरिटी फोर्स (MSF) के जवानों ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए प्रीतम खांडवे को नियंत्रित किया और उन्हें पुलिस वाहन तक ले गए। इसके बाद उन्हें आगे की कार्रवाई के लिए संबंधित पुलिस थाने ले जाया गया।
घटना के बावजूद पुलिस सुरक्षा में ध्वस्तीकरण अभियान जारी रहा। यह कार्रवाई महालक्ष्मी लॉन्स क्षेत्र, खांडवेनगर, लोहेगांव में स्थित सात कथित अवैध रेडी-मिक्स कंक्रीट (RMC) प्लांट्स के विरुद्ध की गई।
प्रीतम खांडवे भाजपा की पार्षद डॉ. श्रेयस खांडवे के पति हैं। आगे की कानूनी कार्रवाई संबंधित अधिकारियों एवं पुलिस जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।
तत्काल कार्रवाई की मांग
मामले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय वायुसेना, पुणे महानगरपालिका (PMC), पुणे महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (PMRDA), जिला प्रशासन, महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (MPCB) तथा अन्य संबंधित एजेंसियों द्वारा समन्वित कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।
हितधारकों ने निम्नलिखित मांगें रखी हैं—
प्रतिबंधित क्षेत्र से सभी अवैध अतिक्रमण तत्काल हटाए जाएं।
अवरुद्ध प्राकृतिक जल निकासी मार्ग को शीघ्र बहाल किया जाए।
निर्माण मलबा एवं नगर निगम का ठोस कचरा हटाया जाए।
रक्षा एवं पर्यावरण संबंधी नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।
अवैध डंपिंग एवं अतिक्रमण के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों एवं एजेंसियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।
संवेदनशील रक्षा प्रतिष्ठानों के आसपास भविष्य में ऐसे उल्लंघनों को रोकने के लिए नियमित निगरानी की जाए।
निष्कर्ष
लोहेगांव एयरपोर्ट के आसपास की स्थिति अब केवल अवैध अतिक्रमण या प्रशासनिक लापरवाही का मामला नहीं रह गई है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा, विमानन सुरक्षा, पर्यावरणीय क्षति तथा रक्षा, पर्यावरण एवं नगर निगम कानूनों के संभावित उल्लंघन से जुड़ा अत्यंत गंभीर विषय बन चुका है।
लगभग दो वर्षों तक भारतीय वायुसेना द्वारा लगातार किए गए पत्राचार तथा हाल ही में कथित अवैध संरचनाओं के विरुद्ध की गई ध्वस्तीकरण कार्रवाई इस पूरे मामले की गंभीरता और तात्कालिकता को दर्शाती है। विभिन्न हितधारकों ने जोर देकर कहा है कि महत्वपूर्ण रक्षा अवसंरचना की सुरक्षा, सुरक्षित विमान संचालन, प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था की बहाली तथा क्षेत्र की पारिस्थितिक संतुलन की रक्षा के लिए सभी संबंधित विभागों द्वारा तत्काल और समन्वित कार्रवाई की जानी अत्यंत आवश्यक है।
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