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मुंबई। ‘नगदपे’, एक फिनटेक प्लेटफॉर्म है जिसका मकसद भारत के असंघटित और आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को डिजिटल वित्तीय सेवा से जोड़ना है, इसका अनावरण मुंबई में रविवार, 3 मई 2026 को हुआ। इस पहल का उद्देश्य दूध विक्रेताओं, अख़बार वितरकों और छोटे दैनिक कमाई करने वाले कामगारों को डिजिटल वित्तीय प्रणाली से जोड़ना है।

‘नगदपे’ ऐप उपयोगकर्ताओं को डिजिटल छालण बनाने, समय पर भुगतान प्राप्त करने और एक विश्वसनीय वित्तीय पहचान बनाने की सुविधा देता है। इससे उन्हें ऋण और अन्य औपचारिक वित्तीय सेवाओं तक पहुंच प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

भारत में जहां हर दिन की शुरुआत दूधवाले, अख़बार विक्रेता और अन्य सेवा प्रदाताओं की डोरबेल से होती है, वहीं लाखों छोटे और असंगठित कामगार आज भी कागज़ी हिसाब-किताब और महीने के अंत में नकद वसूली पर निर्भर हैं।

नगदपे इस व्यवस्था को बदलने के उद्देश्य से लॉन्च किया गया है। यह प्लेटफॉर्म ब्लू-कॉलर कार्यबल के लिए तैयार किया गया एक सरल डिजिटल पेमेंट और लेजर समाधान है, जो भुगतान संग्रह, ग्राहक प्रबंधन और बहीखाते की जटिलताओं को आसान बनाता है। हालांकि देश में डिजिटल भुगतान तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन स्थानीय स्तर पर कई सेवाएं अभी भी पारंपरिक तरीकों पर निर्भर हैं, जिससे देरी और भुगतान संबंधी समस्याएं बनी रहती हैं।

नगदपे के सह-संस्थापक गजेन्द्र गर्ग ने कहा, “भारत अपने रोज़मर्रा के नायकों पर चलता है, लेकिन उनकी वित्तीय व्यवस्था अभी भी पुरानी है। नगदपे के माध्यम से हम उन्हें सरल, पारदर्शी और डिजिटल समाधान देकर सशक्त बनाना चाहते हैं।”

इस प्लेटफॉर्म की प्रमुख विशेषताओं में आसान ऑनबोर्डिंग, स्थानीय भाषाओं का समर्थन (जल्द), तकनीकी ज्ञान की आवश्यकता नहीं जैसे सुविधाएं शामिल हैं। 

मुंबई से शुरू हुआ नगदपे जल्द ही महाराष्ट्र और देश के अन्य शहरों में विस्तार करेगा। कंपनी का लक्ष्य असंगठित कामगारों के लिए एक मजबूत वित्तीय पहचान प्लेटफॉर्म बनना है। यह ऐप दूध वितरण, अख़बार सप्लाई, लॉन्ड्री, छोटे दुकानदारों और नियमित नकद लेनदेन करने वालों के लिए उपयोगी है। नगदपे ऐप अब एंड्रॉइड पर उपलब्ध है।
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