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मुंबई। 2 मई 2026 से शुरू हुए महालक्ष्मी सरस 2026 को नागरिकों का जबरदस्त समर्थन मिल रहा है। महज सात दिनों में इस प्रदर्शनी के माध्यम से लगभग 15 करोड़ रुपये का कारोबार दर्ज किया गया है। यह जानकारी महाराष्ट्र राज्य ग्रामीण जीवनोन्नति अभियान (उमेद) के सीईओ निलेश सागर और सीओओ निखिल कुमार ओसवाल ने दी।

महिलाओं को डेढ़ लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता:

मुख्य परिचालन अधिकारी निलेश सागर ने बताया कि महिलाओं को व्यवसाय के लिए आवश्यक पूंजी कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड के माध्यम से उपलब्ध कराई जाती है। पहले यह राशि 60 हजार रुपये तक सीमित थी, जिसे अब बढ़ाकर डेढ़ लाख रुपये तक कर दिया गया है। महिलाओं की व्यावसायिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए समूह स्तर पर निर्णय लिए जाते हैं और इसके लिए किसी प्रकार की जमीन या सोना गिरवी नहीं रखा जाता।

उन्होंने कहा कि केवल स्वयं सहायता समूहों को ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत महिलाओं को भी उनकी आवश्यकता के अनुसार ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। महिलाओं की पारिवारिक स्थिति, व्यवसायिक जरूरतों और आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उन्हें वित्तीय सहायता दी जाती है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में साहूकारी प्रथा और अत्यधिक ब्याज पर ऋण देने वाली अनौपचारिक आर्थिक व्यवस्थाओं पर काफी हद तक रोक लगाने में मदद मिली है।

71 लाख से अधिक महिलाएं अभियान से जुड़ीं: 

सीओओ निखिल कुमार ओसवाल ने बताया कि वर्ष 2011 में केंद्र सरकार द्वारा शुरू किए गए इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाना था। वर्ष 2018 से इस अभियान का विस्तार पूरे महाराष्ट्र में किया गया। गांव-गांव में महिला स्वयं सहायता समूहों का गठन किया गया, जिसमें प्रत्येक गांव की कम से कम दस महिलाओं को जोड़कर समूह बनाए गए।
उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र में अब तक 6 लाख 7 हजार महिला स्वयं सहायता समूहों का गठन किया जा चुका है, जिनसे 71 लाख से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं। इस अभियान के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 55 प्रतिशत आर्थिक सशक्तिकरण सुनिश्चित किया गया है। इसके साथ ही एकल महिलाओं, ट्रांसजेंडर समुदाय, दिव्यांगजन और सामाजिक रूप से वंचित वर्गों को भी विशेष प्राथमिकता दी गई है।

“उमेद मार्ट” से वैश्विक बाजार तक पहुंच:

उमेद अभियान के अंतर्गत शुरू किए गए “उमेद मार्ट” ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से महिला स्वयं सहायता समूहों के उत्पाद अब वैश्विक बाजार तक पहुंच रहे हैं। पिछले दो वर्षों में इस प्लेटफॉर्म पर 4200 से अधिक उत्पाद पंजीकृत किए गए हैं, जबकि इस वर्ष 1000 नए उत्पाद जोड़े गए हैं।

महिलाओं को डिजिटल मार्केटिंग और ऑनलाइन बिक्री का विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। अभियान के तहत एक लाख “लखपति दीदी” तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है और इस संख्या को आगामी समय में 50 प्रतिशत तक बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। महिलाओं को व्यवसाय, विपणन और आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए व्यापक अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

535 उत्पाद स्टॉल और 80 फूड स्टॉल आकर्षण का केंद्र:

इस वर्ष महालक्ष्मी सरस 2026 में 535 उत्पाद स्टॉल और 80 फूड स्टॉल लगाए गए हैं। उत्पादों की गुणवत्ता, पैकेजिंग और नवाचार को ध्यान में रखते हुए प्रतिभागियों का चयन किया गया है। साथ ही नई महिला उद्यमियों को भी व्यापक अवसर प्रदान किए गए हैं।
नागरिकों की सुविधा के लिए नि:शुल्क बस सेवा, होम डिलीवरी सेवा तथा दिव्यांगजनों के लिए विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

40 करोड़ रुपये के कारोबार की उम्मीद:

इससे पहले नागपुर में आयोजित प्रदर्शनी में 16 करोड़ रुपये तथा वाशी में आयोजित प्रदर्शनी में 22 करोड़ रुपये का कारोबार दर्ज किया गया था। वहीं मुंबई में आयोजित महालक्ष्मी सरस 2026 में मात्र सात दिनों में 15 करोड़ रुपये का कारोबार हो चुका है। आयोजकों ने इस वर्ष कुल कारोबार 40 करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना जताई है।
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