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महाराष्ट्र-कर्नाटक में साइबर शिक्षा का बड़ा असर 

मुंबई। ग्लोबल साइबर सुरक्षा समाधान प्रदाता कंपनी, क्विक हील टेक्नोलॉजीज लिमिटेड की सीएसआर शाखा, क्विक हील फाउंडेशन ने “साइबर शिक्षा फॉर साइबर सुरक्षा: फ्यूचर प्रूफ 2025–26” रिपोर्ट पेश की। यह रिपोर्ट 28 मार्च को पुणे में होने वाले “साइबर शिक्षा फॉर साइबर सुरक्षा अवॉर्ड्स” से ठीक पहले जारी की गई है। इस रिपोर्ट में फाउंडेशन के प्रमुख साइबर जागरूकता कार्यक्रम के पहले बड़े प्रभाव मूल्यांकन के परिणाम बताए गए हैं।

'साइबर शिक्षा फॉर साइबर सुरक्षा' सर्वे में महाराष्ट्र और कर्नाटक के 10.4 लाख छात्रों को शामिल किया गया, जिनसे ट्रेनिंग से पहले और बाद में सवाल पूछे गए थे। इनमें से 2,18,221 छात्रों का एक ठोस सांख्यिकीय नमूना लेकर उनका विस्तृत विश्लेषण किया गया। यह रिपोर्ट इस बात के सबूत पेश करती है कि कैसे सही तरीके से दी गई साइबर ट्रेनिंग अलग-अलग उम्र के छात्रों के ज्ञान, उनके दृष्टिकोण और इंटरनेट उपयोग करने के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव ला रही है।

डिजिटल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत की दृष्टि पर आधारित, साइबर शिक्षा फॉर साइबर सुरक्षा कार्यक्रम युवा विकास पर केंद्रित है। यह युवाओं में साइबर जागरूकता बढ़ाने, डिजिटल कौशल विकसित करने और ऑनलाइन जिम्मेदार व्यवहार को प्रोत्साहित करने पर जोर देता है। यह पहल संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों 4, 5, 8, 9 और 17 के साथ जुड़ी हुई है, जिससे भारत भर के युवाओं में डिजिटल साक्षरता की खाई को कम करने में मदद मिल रही है।

समीक्षा अवधि के दौरान, इस कार्यक्रम ने 36 शैक्षणिक संस्थानों के साथ मिलकर 32 जिलों में 5,169 विशेष जागरूकता सत्र आयोजित किए। क्विक हील फाउंडेशन के व्यापक साइबर सुरक्षा प्रयासों ने पूरे भारत में 80 लाख से अधिक लोगों के जीवन को छुआ है।

'साइबर शिक्षा फॉर साइबर सुरक्षा' सर्वे से पता चलता है कि कार्यक्रम के बाद प्रमुख साइबर सुरक्षा अवधारणाओं पर जागरूकता का स्तर अब 90% के करीब है, जो यह दर्शाता है कि सत्रों में भाग लेने के बाद छात्र सुरक्षित और असुरक्षित डिजिटल प्रथाओं के बीच अंतर करने के लिए काफी बेहतर ढंग से सुसज्जित हैं। जागरूकता का स्तर कक्षा 5-7 के छात्रों में 43% से बढ़कर 89%, कक्षा 8-10 के छात्रों में 49% से बढ़कर 90% और कॉलेज के छात्रों में 43% से बढ़कर 90% हो गया है। 10 में से 8 छात्रों ने सत्रों के बाद सुरक्षित ऑनलाइन व्यवहार अपनाने का स्पष्ट संकल्‍प व्यक्त किया। शुरुआती व्यवहारिक बदलाव भी देखे गए, जहां संबंधित समूहों में सुरक्षित डिजिटल प्रथाएं 39% से बढ़कर 84%, 39% से बढ़कर 82% और 26% से बढ़कर 89% हो गईं। इसके बाद, प्रतिभागियों के बीच डिजिटल दृढ़ता भी बेहतर हुई, जो संबंधित समूहों में क्रमशः 9% से 86%, 68% से 91% और 73% से 91% तक पहुंच गया।

अनुपमा काटकर (चेयरपर्सन, क्विक हील फाउंडेशन और चीफ - ऑपरेशनल एक्सीलेंस, क्विक हील टेक्नोलॉजीज लिमिटेड) ने कहा कि 'साइबर शिक्षा फॉर साइबर सुरक्षा' के माध्यम से, हम पहली बार केवल पहुँच के आंकड़ों से आगे बढ़कर उस बदलाव की गहराई को समझ पाए हैं जो हम समाज में ला रहे हैं। सर्वे के नतीजे मेरा यह विश्वास और पक्का करते हैं कि भविष्य डिजिटल रूप से सशक्त युवाओं का है। 80 लाख से अधिक युवाओं के जीवन को छूना हमारे लिए केवल एक उपलब्धि नहीं है; बल्कि यह इस बात का संकेत है कि भारत के युवा एक 'सुरक्षित डिजिटल भारत' की रक्षा के लिए पहली दीवार बनने को तत्‍पर हैं।

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