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सलाइवा-आधारित ओरल कैंसर टेस्ट को मिला खास दर्जा 

मुंबई। नागपुर की बायोटेक कंपनी ErlySign ने कैंसर की जाँच की परिभाषा ही बदल दी है। कंपनी की सलाइवा-आधारित किट बिना दर्द, बिना चीर-फाड़ और बेहद आसान तरीके से कैंसर की शुरुआती पहचान कर लेती है। इसी नवाचार को देखते हुए यूएस फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने इसे ‘ब्रेकथ्रू डिवाइस’ का खास दर्जा दिया है—जो भारत के लिए सम्मान का क्षण है और वैश्विक मंच पर हमारी वैज्ञानिक क्षमता का प्रमाण भी। यह मान्यता साबित करती है कि ErlySign की तकनीक दुनिया भर में कैंसर को शुरुआती चरण में पकड़कर लाखों लोगों की जान बचाने की ताकत रखती है।

यूएस एफडीए का 'ब्रेकथ्रू डिवाइस' दर्जा उन मेडिकल उपकरणों को दिया जाता है जो जानलेवा या लाइलाज बीमारियों के इलाज या पहचान में गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं। इस मान्यता का सबसे बड़ा फायदा यह है कि वह तकनीक सरकारी मंजूरी की कतार में सबसे आगे रहती है। साथ ही, एफडीए के साथ सीधा तालमेल बढ़ने से यह तकनीक मरीज़ों तक बहुत कम समय में पहुँच पाती है। 

इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए ErlySign के फाउंडर और सीईओ, शुभेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा, “यूएस एफडीए से ‘ब्रेकथ्रू डिवाइस’ का दर्जा मिलना हमारे लिए अत्यंत गर्व का विषय है। यह सम्मान हमारी तकनीक की विश्वसनीयता और प्रभावशीलता को प्रमाणित करता है, साथ ही हमें एफडीए के साथ तेज़ और प्राथमिकता वाले रेग्युलेटरी मार्ग प्रदान करता है। इससे हमारा टेस्ट दुनिया भर के मरीजों तक पहले से भी तेज़ गति से पहुँच सकेगा। हमारा मिशन है कि ओरल कैंसर की जाँच दर्दरहित, किफायती और हर व्यक्ति के लिए आसानी से सुलभ हो।"

ErlySign का यह टेस्ट भारत का पहला ऐसा तरीका है जो बिना किसी दर्द या चीर-फाड़ के, सिर्फ लार (सलाइवा) के जरिए मुँह के कैंसर का पता लगा लेता है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह कैंसर के लक्षण दिखने से पहले ही चेतावनी दे देता है—फिर चाहे वह मुँह, होंठ, जीभ या गले का कैंसर ही क्यों न हो। इसके लिए सिर्फ 2-5 मिलीलीटर लार की जरूरत होती है और मात्र 10 से 15 मिनट में रिपोर्ट मिल जाती है, जिससे कहीं भी आसानी से जाँच की जा सकती है।

इस तकनीक का सफल परीक्षण हेल्थकेयर ग्लोबल लिमिटेड और नागपुर के राष्ट्रसंत तुकडोजी क्षेत्रीय कैंसर अस्पताल (RSTRCH) के सहयोग से किया गया है। नागपुर, बेंगलुरु और रांची के लगभग 1,000 मरीजों पर हुए इस बड़े ट्रायल में यह टेस्ट 98% सेन्सिटिविटी और 100% सटीकता (Specificity) के साथ खरा उतरा है। ये नतीजे साबित करते हैं कि कैंसर की सही पहचान करने में यह टेस्ट बेहद भरोसेमंद और असरदार है।

ErlySign के को-फाउंडर और सीएसओ, डॉ. देवव्रत बेगड़े ने कहा, "वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यूएस एफडीए की यह मान्यता हमारे अनुसंधान और हमारी तकनीक की विश्वसनीयता का स्पष्ट प्रमाण है। कैंसर के लक्षण दिखने से पहले उसकी पहचान करना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है, और हमने इसे लार के साधारण नमूने से संभव कर दिखाया है। यह उपलब्धि इस विश्वास को और मजबूत करती है कि दर्दरहित और उन्नत विज्ञान मिलकर कैंसर जाँच के भविष्य को नया रूप दे सकते हैं।"

भारत में ओरल कैंसर अब भी एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है। हर वर्ष लगभग 1.43 लाख लोग इस बीमारी से प्रभावित होते हैं और 80,000 से अधिक मरीज समय पर पहचान न होने के कारण जान गंवाते हैं। समस्या का मूल कारण है स्क्रीनिंग की कमी और देर से पता चलना। ErlySign का सस्ता, सरल और दर्दरहित सलाइवा टेस्ट इस परिदृश्य को पूरी तरह बदल सकता है। यह टेस्ट इतना आसान है कि इसे नियमित स्वास्थ्य जांच में शामिल किया जा सकता है, जिससे ग्रामीण, वंचित और हाई-रिस्क आबादी की ज़िंदगी समय पर बचाई जा सके।

यूएस एफडीए से मिली इस प्रतिष्ठित मान्यता के बाद, ErlySign अपनी कैंसर शुरुआती पहचान मुहिम को और भी मजबूत कर रहा है। अब हम वैश्विक अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थाओं के साथ साझेदारी की तैयारी में हैं, ताकि इस आसान और दर्दरहित टेस्ट को हर जरूरतमंद तक पहुँचाया जा सके और बड़ी संख्या में लोगों की जान बचाने की प्रक्रिया शुरू हो सके।

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