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प्रमुख क्षेत्रों में निवेश अवसरों को मिलेगा बढ़ावा 

महाराष्ट्र को वैश्विक निवेश का केंद्र बनाने की दिशा में एक सशक्त कदम 

मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने ग्लोबल बिजनेस समिट 2026 के साथ मुख्य स्‍टेट पार्टनर के रूप में अपनी साझेदारी की घोषणा की है। यह समिट महाराष्ट्र के मजबूत नीतिगत ढांचे, रणनीतिक पहलों और निवेशक-अनुकूल सिस्‍टम को वैश्विक बिजनेस लीडर्स, नीति निर्माताओं और संस्थागत निवेशकों के सामने प्रस्‍तुत करने का मंच प्रदान करेगा।

डॉ. पी. अंबलगन, आईएएस, प्रधान सचिव, उद्योग, निवेश एवं सेवा विभाग, महाराष्ट्र सरकार ने कहा, “महाराष्ट्र में वर्षों से विभिन्न क्षेत्रों में निरंतर निवेश देखने को मिला है। यह राज्य की नीतियों और विकास दृष्टिकोण में भारतीय तथा वैश्विक कंपनियों के विश्वास को दर्शाता है। ग्लोबल बिजनेस समिट 2026 के साथ हमारी साझेदारी हमें दुनियाभर के निवेशकों से जुड़ने, विभिन्न क्षेत्रों में मौजूद अवसरों को प्रस्‍तुत करने और स्‍थायी औद्योगिक एवं तकनीकी विकास में सहायता करने में महाराष्ट्र की भूमिका को मजबूत करेगी।”

ग्लोबल बिजनेस समिट 2026 महाराष्ट्र को ऐसी नीतिगत पहलों को वैश्विक दर्शकों के सामने प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान करता है। मजबूत इंफ्रास्‍ट्क्‍चर, कुशल वर्कफोर्स और सुविकसित औद्योगिक आधार के साथ, राज्य तकनीक, एयरोस्पेस और रक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, लॉजिस्टिक्स, फार्मास्यूटिकल्स एवं केमिकल्स, ऑटोमोटिव, टेक्सटाइल्स आदि जैसे क्षेत्रों में अवसर प्रदान करता है। राज्य ना केवल प्रमुख शहरों बल्कि टियर-2 और टियर-3 क्षेत्रों में भी निवेश को लगातार बढ़ावा दे रहा है।

महाराष्ट्र भारत की सबसे बड़ी राज्य अर्थव्यवस्था है, जो देश के जीडीपी में 13.6% से अधिक का योगदान देता है। 2029-2030 तक ट्रिलियन-डॉलर अर्थव्यवस्था बनने के दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ, राज्य प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने, नौकरियां पैदा करने और संतुलित क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देने पर फोकस कर रहा है। इस नजरिये को और मजबूत करने के लिए, सरकार ने हाल ही में महाराष्ट्र इंडस्ट्रीज, इन्वेस्टमेंट एंड सर्विसेज पॉलिसी 2025 और महाराष्ट्र ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी-GCC) पॉलिसी 2025 को मंजूरी दी है।

महाराष्ट्र इंडस्ट्रीज, इन्वेस्टमेंट एंड सर्विसेज पॉलिसी 2025 राज्य की अगले दशक में औद्योगिक और सेवा-आधारित विकास को मजबूत करने की रणनीति तय करती है। यह घरेलू और विदेशी निवेश आकर्षित करने, विनिर्माण और सेवाओं का समर्थन करने, नवाचार को प्रोत्साहित करने और व्यवसाय करने में आसानी लाने पर केंद्रित है। नीति एमएसएमई विकास, रोजगार सृजन और सतत औद्योगिक विकास पर भी जोर देती है। इसमें यूनिफाइड डिजिटल प्‍लेटफॉर्म, 'इन्वेस्ट महाराष्ट्र' के लॉन्‍च जैसी संस्थागत व्यवस्थाएं शामिल हैं, जो निवेशकों को शुरू से अंत तक सहायता प्रदान करने और विभिन्न सरकारी विभागों के बीच तालमेल बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

महाराष्ट्र ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर पॉलिसी 2025 ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स के लिए एक प्रमुख गंतव्य के रूप में राज्य की स्थिति मजबूत करने पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य 2025 से 2030 के बीच 400 नए जीसीसी की स्थापना में सहयोग देना और लगभग 4 लाख उच्च-कुशल नौकरियां पैदा करना है। इस नीति द्वारा लगभग 50,600 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित करने की संभावना है तथा यह अनुसंधान एवं विकास, डिजिटल सेवाएं और विशेष व्यावसायिक संचालन जैसी गतिविधियों का समर्थन करती है। इसमें निवेश आकर्षण को बढ़ावा देने के लिए कस्‍टमाइज इंसेंटिव और इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर सपोर्ट भी शामिल है।

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