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गोवा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (India-EU FTA) के बाद यूरोपीय तकनीकी कंपनियों ने भारतीय बाजार में अपनी रणनीतिक रुचि दिखानी शुरू कर दी है। गोवा में आयोजित 'इंडिया एनर्जी वीक' के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत को एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र (Manufacturing Hub) के रूप में स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम है।
हालांकि, यह FTA मुख्य रूप से ऑटोमोबाइल और वाइन पर आयात शुल्क में कटौती के लिए चर्चा में रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यूरोपीय क्लीन-टेक (Clean-tech) कंपनियां अब भारत को केवल एक बड़े बाजार के रूप में नहीं, बल्कि उत्पादन के एक सक्रिय केंद्र के रूप में देख रही हैं।

स्वीडिश कंपनी 'कॉन्व्हेगॅस' 
(KonveGas) का भारत में पदार्पण
इस सकारात्मक माहौल के बीच, गैस स्टोरेज तकनीक की विशेषज्ञ स्वीडिश कंपनी कॉन्व्हेगॅस ने भारतीय बाजार में प्रवेश की आधिकारिक घोषणा की है। यह नया व्यापार नीति का ही प्रभाव है कि यूरोपीय लघु और मध्यम उद्योग (SME) अब भारतीय उद्योगों के साथ सीधे जुड़ रहे हैं।

उच्च तकनीक और भारतीय बाजार की जरूरतें

मुक्त व्यापार समझौते से तकनीकी हस्तांतरण और संयुक्त उद्यमों (Joint Ventures) को नई गति मिलने की उम्मीद है। कॉन्व्हेगॅस मुख्य रूप से 'टाइप 4' कंपोजिट सिलेंडर विकसित करती है, जो वजन में हल्के और पूरी तरह से रिसाइकिल योग्य (Recyclable) होते हैं। भारत के तेजी से बढ़ते हरित ऊर्जा क्षेत्र में इस तकनीक की भारी मांग देखी जा रही है।
इंडिया एनर्जी वीक के दौरान कॉन्व्हेगॅस के संस्थापक अलेक्जेंडर एन्युलेस्कु ने कहा, "भारत की ऊर्जा जरूरतों को समझते हुए, हम 70 प्रतिशत कम कार्बन उत्सर्जन वाले और हल्के वजन के स्टोरेज समाधान उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"

दिल्ली, पुणे और गुजरात पर विशेष ध्यान

कंपनी ने अपने परिचालन के प्रारंभिक चरण के लिए दिल्ली, पुणे और गुजरात को चुना है। ये क्षेत्र भारत के प्रमुख ऑटोमोटिव और औद्योगिक केंद्र (Industrial Hubs) हैं। FTA के बाद इन क्षेत्रों में व्यापारिक अवसर और बढ़ने की संभावना है। कंपनी का लक्ष्य अगले छह महीनों के भीतर अपना प्रत्यक्ष कामकाज शुरू करना है।

'मेक इन इंडिया' और स्थानीय उत्पादन पर जोर

भारत की 'मेक इन इंडिया' नीति का सम्मान करते हुए, कॉन्व्हेगॅस केवल आयात पर निर्भर रहने के बजाय स्थानीय स्तर पर कच्चा माल प्राप्त करने की संभावनाएं तलाश रही है। कंपनी वर्तमान में भारतीय निवेशकों और कॉर्पोरेट भागीदारों के साथ संयुक्त उद्यम (JV) या तकनीकी समझौतों के लिए बातचीत कर रही है।
कॉन्व्हेगॅस का यह कदम इस बात का प्रमाण है कि FTA के चलते यूरोपीय तकनीक का प्रवाह भारत की ओर बढ़ रहा है। विशेष रूप से ग्रीन हाइड्रोजन और वैकल्पिक ईंधन के क्षेत्र में ऐसी अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां भारत की भंडारण क्षमता और ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत करेंगी।

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