Thursday, 22 January 2026

डिफाइनेज सिक्योरिटीज ने एल्गो ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म ‘एल्गोस्ट्रा’ किया लॉन्च


मुंबई। नवोन्मेषी ट्रेडिंग टूल्स और निवेशकों की शिक्षा की मजबूत इकोसिस्टम के लिए पहचानी जाने वाली और पुणे मे स्थित फिनटेक तथा स्टॉक ब्रोकिंग कंपनी डिफाइनेज सिक्योरिटीज ब्रोकिंग प्रा. लि. ने आज अपना अब तक का सबसे महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म ‘एल्गोस्ट्रा’ प्रस्तुत किया। यह प्लेटफॉर्म शून्य प्लेटफॉर्म शुल्क वाला और भारत का पहला पूरी तरह से कस्टमाइज़ किया जा सकने वाला रिटेल ट्रेडिंग ऑटोमेशन प्लेटफॉर्म है। सेबी द्वारा अक्टूबर २०२५ में रिटेल निवेशकों के लिए एल्गोरिदमिक ट्रेडिंग को आधिकारिक रूप से अनुमति दिए जाने के मात्र तीन महीनों के भीतर ‘एल्गोस्ट्रा’ प्लेटफॉर्म का लॉन्च होना, भारतीय रिटेल ट्रेडिंग के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक क्षण माना जा रहा है।

रिटेल ट्रेडिंग ऑटोमेशन प्लेटफॉर्म को पेश करने के लिए यह समय अत्यंत उपयुक्त है। ‘सेबी’ के अपने अध्ययन के अनुसार, वित्त वर्ष २०२४ में एफ एंड ओ सेगमेंट में एल्गोरिदमिक ट्रेडिंग पर संस्थागत निवेशकों और प्रोप्रायटरी ट्रेडर्स का ही वर्चस्व रहा। एफपीआई के मुनाफे का ९७ प्रतिशत और प्रोप्रायटरी ट्रेडर्स के मुनाफे का ९६ प्रतिशत हिस्सा इन्हीं के खाते में गया। इस अनुशासित और प्रणालीबद्ध ट्रेडिंग के लाभों से रिटेल निवेशक अब तक और हाल तक भी बड़े पैमाने पर वंचित ही रहे हैं।

व्यक्तिगत निवेशकों की शेयर बाजार में सहभागिता लगातार बढ़ रही है। ‘एनएसई’ में सूचीबद्ध कंपनियों में उनका निवेश मार्च २०२० से पाँच गुना बढ़कर ८४ लाख करोड़ रुपये तक पहुँच गया है (एनएसई पल्स रिपोर्ट, सितंबर २०२५)। सूत्रों के अनुसार, २०३० तक भारत में एल्गोरिदमिक ट्रेडिंग मार्केट १४.३ प्रतिशत सीएजीआर की दर से बढ़ने का अनुमान है। देश में २४ करोड़ से अधिक रिटेल निवेशक अनुशासित और प्रक्रिया-आधारित निवेश पद्धति की तलाश में हैं। ऐसे में नवोन्मेषी और प्रोसेस-ड्रिवन रिटेल ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म की तत्काल और व्यापक आवश्यकता स्पष्ट रूप से सामने आई है।

डिफाइनेज सिक्योरिटीज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और सह-संस्थापक प्रशांत शाह ने कहा, “काफी लंबे समय से रिटेल ट्रेडर्स यह देखते आ रहे हैं कि कई संस्थान एल्गो ट्रेडिंग के जरिए मुनाफा कमा रहे हैं। लेकिन उन्हें यह बताया जाता रहा कि यह प्रणाली ‘बहुत जटिल’ है या ‘बहुत महंगी’ है। वास्तव में, अधिकांश ट्रेडर्स अपनी रणनीतियों में कमी के कारण नहीं, बल्कि भावनात्मक फैसलों और थकान के कारण रणनीति के क्रियान्वयन में होने वाली गलतियों से असफल होते हैं। ‘एल्गोस्ट्रा’ के माध्यम से ट्रेडिंग एक मशीन की तरह अत्यंत अनुशासित और सटीक तरीके से होती है। निश्चित रूप से, हमारा उद्देश्य ट्रेडर्स की सोच-समझ की जगह लेना नहीं है, बल्कि भावनाओं के प्रभाव को कम करके निर्णयों को अधिक सुरक्षित और सही बनाना है।”

 संस्थागत एकाधिकार में सेंध

ट्रेड कॉल्स या टिप्स देने के बजाय, डिफाइनेज का एल्गोस्ट्रा प्लेटफॉर्म ट्रेडर्स को अपनी स्वयं की ट्रेडिंग स्ट्रैटेजीज़ को पूरी तरह ऑटोमेटेड सिस्टम में बदलने की क्षमता देता है, वह भी पूर्ण पारदर्शिता के साथ। यह प्लेटफॉर्म न तो बाजार का अनुमान लगाता है और न ही मुनाफे की कोई गारंटी देता है। इसके बजाय, इसका मुख्य फोकस इस बात पर है कि तैयार की गई स्ट्रैटेजी के अनुसार ट्रेड्स का निष्पादन सटीक, निरंतर और अनुशासित तरीके से कैसे किया जाए।

शून्य प्लेटफॉर्म शुल्क. शून्य कोडिंग

‘एल्गोस्ट्रा’ का वैल्यू प्रपोज़िशन तीन मूलभूत स्तंभों पर आधारित है, जो इस उद्योग की स्थापित परंपराओं को सीधे तौर पर चुनौती देते हैं :

1) शून्य प्लेटफॉर्म शुल्क : डिफाइनेज के डीमैट खाता धारकों के लिए विशेष रूप से उपलब्ध एल्गोस्ट्रा प्लेटफॉर्म पर किसी भी प्रकार का प्लेटफॉर्म शुल्क नहीं लिया जाता।

2) शून्य-कोड ऑटोमेशन : ट्रेडर्स को एक भी पंक्ति का कोड लिखे बिना उन्नत और परिष्कृत एल्गोरिदम बनाने की सुविधा मिलती है। इससे वह तकनीकी बाधा समाप्त हो जाती है, जिसने अब तक कई लोगों को सिस्टेमैटिक ट्रेडिंग से दूर रखा था।

3) पारदर्शिता : एल्गोस्ट्रा प्लेटफॉर्म का उपयोग करने वाले ट्रेडर्स अपनी सिस्टम में मौजूद हर नियम को स्पष्ट रूप से समझ सकते हैं। वे उन नियमों पर पूरा नियंत्रण रखते हैं और पूरी सिस्टम पूरी तरह से उनकी अपनी होती है।

व्यक्तिगत ट्रेडर्स के लिए संस्थागत स्तर की क्षमताएँ

सिस्टेमैटिक सोच रखने वाले ट्रेडर्स के लिए विशेष रूप से बनाए गए ‘एल्गोस्ट्रा’ के साथ आप

• एक समय में अधिकतम १० स्ट्रैटेजीज़ चला सकते हैं और प्रत्येक स्ट्रैटेजी के लिए ५०० तक इंस्ट्रूमेंट्स पर काम कर सकते हैं,

• कैंडल स्टिक, हेइकिन आशी, पॉइंट एंड फिगर, रेंको, लाइन ब्रेक और कागी – इन छह प्रकार की चार्टिंग विधियों के माध्यम से ऑटोमेशन कर सकते हैं,

• स्टॉक्स, फ्यूचर्स और ऑप्शंस के लिए एक ही एकीकृत फ्रेमवर्क में स्ट्रैटेजीज़ डिजाइन कर सकते हैं,

• स्ट्रैटेजी बनाते समय मुनाफे और नुकसान की सीमाएँ तय कर सकते हैं, ट्रेंड पहचानने के लिए फ़िल्टर्स लगा सकते हैं, तथा अलग-अलग तरीकों से लाभ-हानि का आकलन करने हेतु स्वतंत्र ‘प्रॉफिट एंड लॉस ट्रैकिंग’ के साथ उन्नत स्तर के रिस्क कंट्रोल्स का उपयोग कर सकते हैं।

“हम केवल ‘एक और’ ट्रेडिंग टूल पेश नहीं कर रहे हैं, बल्कि भारतीय रिटेल ट्रेडर्स के बाजार से जुड़ने के तरीके में संरचनात्मक और बुनियादी बदलाव ला रहे हैं,” ऐसा कहते हुए शाह ने आगे कहा, “एल्गोस्ट्रा के जरिए रिटेल ट्रेडर्स समग्र प्रक्रिया, नियंत्रण और जवाबदेही के मामले में संस्थागत स्तर के और अधिक करीब पहुँचेंगे, और साथ ही ईमानदार ट्रेडर्स के लिए आवश्यक पारदर्शिता और स्वामित्व भी पूरी तरह बना रहेगा।”

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