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गाय को मौत के मुंह से बचाते ध्यान फ़ाउंडेशन के स्वयंसेवक 

अब तक 40,000 से अधिक गौवंश को बचाकर पूरे देश में गाय को बचाने के लिए जी जान से कर रहे हैं मेहनत

मुंबई। ये तो हर कोई जानता ही है कि गाय हिंदुस्तान में एक माँ की तरह पूजी जाती है लोग उनके स्पर्श मात्र को बड़ा शुभ मानते हैं। इतना ही नहीं कहा जाता है गौदान अगर किसी ने किया तो उसकी नैया आराम से वैतरणी नदी में पार हो जाती है। और वह मोक्ष को प्राप्त होता है लेकिन ये सब व्यक्ति उस वक्त करता है जब वह मौत की आख़िरी साँस ले रहे होते हैं। यानी गाय एक ऐसी धरोहर है जिसे बचाने की ज़रूरत है ना की नष्ट करने की। लेकिन आज धड़ल्ले से गाय की तस्करी की जाती है और उन्हें काटा जाता है। 

गाय का महत्व तो हर किसी को पता है लेकिन हर कोई अपने अपने सुविधा अनुसार या यूँ कहे तो कुछ पाने के लिए गाय की सेवा करते हैं। उसमें भी हर किसी का स्वार्थ साफ़ दिखाई पड़ता है। लेकिन अगर कोई निस्वार्थ तरीक़े से गाय को बचाए रखे तो इस जीवन का सबसे बड़ा और उत्तम कर्म होगा उस इंसान का। 

यहाँ बताना ज़रूरी हो जाता है कि गाय को अधिकांश लोग एक जानवर समझते हैं लेकिन गाय तो जानवर है ही नहीं ये तो साक्षात माँ गायत्री की स्वरूपा हैं। यानी तीनों आदि शक्ति माँ सरस्वती, माँ महालक्ष्मी और माँ महाकाली निवास करती है। कहने का मतलब यह कि अगर गाय की हर कोई तन मन धन से सेवा करे तो वह इस जीवन का सबसे बड़ा और अच्छा कर्म करने वाला इंसान होगा। सच तो ये भी है की इस बारे में अधिक लोगों को ठीक तरीक़े से ज्ञान भी नहीं है क्योंकि उन्हें गाय के महत्व को ठीक से समझाने वाला ही कोई नहीं है तभी तो गाय को लोग अपने लाभ के अनुसार सेवा करते हैं वह सिर्फ़ ये सोचते हैं कि अगर हमने रोड पर बैठी गाय की सेवा कर ली जैसे सुबह एक रोटी खिला दी, थोड़ा घास खिला दी तो हमारा जीवन अच्छा होगा लेकिन वो कभी ये नहीं सोचते की ये गाय कौन सी हैं देशी गाय है या जर्सी गाय। और जो कसाई दिन रात देशी गाय की स्मग्लिंग कर रहे हैं देशी गाय को काट रहे हैं उनके वंश को ही ख़त्म करने की एक बड़ी साज़िश है इस पर लोगों का ध्यान ठीक से नहीं पड़ रहा है।

 यदि कोई जर्सी गाय का दूध, दही, घी, गोबर या उसकी किसी भी वस्तु का सेवन करता है तो उसका उस व्यक्ति को लाभ मिलने की जगह उसका दुष्परिणाम होने लगेगा। इसलिए देशी गाय के ही हर वस्तु का सेवन करना चाहिए। 

इसीलिए देशी गाय हमारे देश के लिए, इस सृष्टि के लिए कितनी ज़रूरी है इसका ठीक तरीक़े से ज्ञान देने और गाय को बचाने का ज़िम्मा ध्यान फ़ाउंडेशन नामक संस्था ने उठाया है। इस ध्यान फ़ाउंडेशन ने पिछले लगभग तीन सालों में ही गाय को बचाने की एक बड़ी मुहिम की शुरुआत की जो आज पूरे देश भर में गौवंश को बचा रही है। हम इसे क्रांति भी कह सकते हैं। तभी तो आज बांग्लादेश के बॉर्डर से जो गाय धड़ल्ले से बाहर के देशों में भेजी जाती थी वह अब रूक सा गया है। क्योंकि ध्यान फ़ाउंडेशन और बीएसएफ़ की मदद से ये काम संभव हो पा रहा है।

 गाय को बचाने या पालने का काम अनेक संस्थाएं करती हैं लेकिन ध्यान फ़ाउंडेशन ही एक ऐसी संस्था है जो सच में गाय के लिए बिना किसी स्वार्थ के दिन रात काम कर रही है और मौत के मुँह में जा चुकी गायों को छुड़ाकर गौशाला में रखकर उनकी सेवा कर देश की अमूल्य धरोहर को बचा रही है।

इस काम के लिए सबसे बड़ा योगदान योगी अश्विनी का है क्योंकि इन्ही के कारण आज लोग गाय के महत्व को समझ पा रहे हैं और कर्म के मतलब को भी समझ पा रहे हैं की आख़िर कर्म क्या होता है। कई दशकों की जटिल साधना और दृढ़ संकल्प के बाद नवम्बर 2018 में इतिहास की किताब का पन्ना पलटने का बीड़ा उठाया और गौसेवा कैसे की जाती है और कैसे की जानी चाहिए इस बारे में एक बड़ी शुरुआत की। ये दिन और ध्यान फ़ाउंडेशन का काम करने का तरीक़ा आने वाले समय में इतिहास के पन्नो में स्वर्णिम अक्षरों से लिखा जाएगा। 

बता दें कि साल 2018 में ध्यान फ़ाउंडेशन के पास बीएसएफ़ के कोलकाता सेक्टर की गोलपारा बीओपी से फ़ोन आया। उन्होंने भारत बांग्लादेश सीमा पर तस्करों से 50-60 गौवंश बचाए थे और उन गौवंश के पालन पोषण के लिए ध्यान फ़ाउंडेशन की सहायता माँग रहे थे। उस समय पश्चिम बंगाल क्षेत्र या उसके आस पास भी ध्यान फ़ाउंडेशन पास अधिक संसाधन नहीं थे लेकिन उसी दिन संकल्प लिया की इन बेज़ुबान गौवंश को बचाना है। और बचाकर ही दम लिया। बिना किसी विलम्ब के ध्यान फ़ाउंडेशन के स्वयमसेवी कलकत्ता पहुँचे, किसी तरह चारे के ट्रक और पशु चिकित्सक का प्रबंध किया और बॉर्डर आउट्पोस्ट के लिए निकल पड़े । वो दिन था और आज का दिन है, भारत में दशकों से चली आ रही गौ तस्करी का स्वरूप बदलने लगा। ध्यान फ़ाउंडेशन ने पूर्वी भारत में असम से लेकर त्रिपुरा और बेंगॉल तक, 25-30 स्थायी और अस्थायी गौशालाओं का निर्माण किया, 10-15 ट्रकों और 20 ड्राइवरों को गौवंश को बॉर्डर से गौशाला तक लाने तथा बॉर्डर पर चारा सुविधा देने के लिए नियुक्त किया, गौपालन के लिए 500 से अधिक लेबर को लगाया, चारे के अभाव में पंजाब से साइलिज के ट्रक बुलवाए, गौरक्शन के 500 से अधिक मुक़दमे कोर्ट में डालने तथा लड़ने  लिए 10 वकीलों की टीम खड़ी की और 50 से अधिक स्वयमसेवीयों और साधकों को गौसेवा के लिए बॉर्डर पर नियुक्त किया।

 वो दिन था और आज का दिन है भारत में दशकों से चली आ रही गौतस्करी का स्वरूप ध्यान फ़ाउंडेशन ने बदलकर रख दिया है। तब से ध्यान फ़ाउंडेशन द्वारा एक प्रण ले लिया गया कि अब से देश के किसी भी कोने में गाय की तस्करी और उनकी हत्या नहीं होने देंगे। और आज की तस्वीर ये है कि क़रीबन तीन वर्ष के अंतराल में ध्यान फ़ाउंडेशन ने बॉर्डर पर पकड़ी गयी लगभग 40,000 से अधिक गौवंशों को पुनर्वासित किया है। साथ ही इस कार्य के प्रभाव से उससे कई गुना अधिक गौवंश की तस्करी पर अल्पविराम भी लगा है। आज कितने ही पशु तस्कर अपने जीवन- यापन का तरीक़ा बदलकर खेती करने पर मजबूर हो गए है। ध्यान फ़ाउंडेशन का कहना है की गाय तस्करी पर तो अल्पविराम लग चुका है लेकिन इस पर पूर्णविराम लगाना है ताकि हमेशा हमेशा के लिए गौ तस्करी बंद हो और इस मुहिम के काफ़ी तेज़ी से ध्यान फ़ाउंडेशन दिन - रात मेहनत कर रहा है। 

ध्यान फ़ाउंडेशन के लिए ये कार्य आसान नहीं था। जहाँ एक ओर आर्थिक समस्या, चारे की कमी, प्रतिकूल मौसम, आँधी तूफ़ान व बारिश अवरोधक बने हुए थे तो  दूसरी ओर पशु माफ़िया कदम - कदम पर रोकने में लगे हुए थे। जानकारी के मुताबिक़ गौ ज्ञान फ़ाउंडेशन नामक सहायक संस्थाओं के कार्यकर्ताओं को रोकने, डराने यहाँ तक की जान से मारने का प्रयास किया गया था।

 और यही एक बड़ा कारण था कि ध्यान फ़ाउंडेशन के अलावा आज तक कोई संस्था इस कार्य को करने के लिए आगे नहीं आयी थी। बीएसएफ़ के अनुसार ध्यान फ़ाउंडेशन ही एक मात्र संस्था है जिसने सीमा पर तस्करों के चंगुल से बचाई गयी गौवंश की देखभाल का बीड़ा उठाया है। 

इसीलिए ध्यान फ़ाउंडेशन लोगों से अपील भी कर रहा है की इस जटिल और कलयुग के सबसे महत्वपूर्ण कार्य को सम्पन्न करने के लिए सभी देशवासी मदद के लिए आगे आयें। ताकि इस ऐतिहासिक कार्यक्रम का हिस्सा बनकर और गौसेवा कर अपने इस जीवन को सफल बनाए। ध्यान फ़ाउंडेशन से जुड़ने के लिए हेल्प लाइन नम्बर के ज़रिए 9999567895 और वेबसाइट www.dhyanfoundation.com के ज़रिए सम्पर्क किया जा सकता है।

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