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मुंबई : हर साल चिल्ड्रंस डे के अवसर पर देशभर के स्कूलों में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। पर इस बार कोरोना महामारी की वजह से रिमोट लर्निंग की स्थिति में यह स्पेशल डे स्कूल में सेलिब्रेट न करने का मलाल स्टूडेंट्स में दिखाई दिया। छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के लिए दुनिया के सबसे बड़े ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफार्म , ब्रेनली, ने बाल दिवस के अवसर पर अपने भारतीय यूजर बेस के बीच सर्वेक्षण किया। सर्वेक्षण में यह पता लगाने की कोशिश की गई कि छात्र लंबे समय से महामारी की वजह से रिमोट लर्निंग की स्थिति में है तो क्या उन्हें स्कूल की की याद आती है, विशेष रूप से बाल दिवस को लेकर क्योंकि यह दिन स्कूलों में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है।    

1,631 ब्रेनली यूजर्स ने इस सर्वे में भाग लिया। उन्होंने कहा कि यह अवसर छात्रों के लिए बहुत खास है और उनमें से 80% को पता था कि भारत में बाल दिवस क्यों मनाता है। इसके अलावा जब पूछा गया कि क्या उनके स्कूल या शिक्षकों ने इस दिन को मनाने के लिए किसी वर्चुअल इवेंट की योजना बनाई है, तो 55.3% छात्रों ने एक पॉजिटिव फीडबैक दिया, जबकि 44.7% ने कहा कि ऐसी कोई व्यवस्था नहीं हुई है। देशभर के स्कूल आमतौर पर बाल दिवस पर पॉटलक्स, पिकनिक और रोल रिवर्सल करते हैं। यह कोई आश्चर्य की बात नहीं कि अधिकांश छात्रों (77.4%) ने स्कूल में होने वाले जश्न को याद किया, जबकि केवल 22.6% छात्रों ने ऐसा महसूस नहीं किया।

ब्रेनली के सीपीओ राजेश बिसानी ने सर्वेक्षण रिपोर्ट पर कहा, “बाल दिवस समारोह हमेशा छात्रों के लिए खास होता है क्योंकि वे एक साथ होते हैं और इस दिन उन्हें खास ध्यान रहता है। इस वर्ष जश्न अलग तरह का था। स्कूल बंद होने के कारण छात्र मज़ेदार गतिविधियों में भाग लेने में सक्षम नहीं थे, जिसमें वे हर बार व्यस्त रहते थे। फिर भी ध्यान देने योग्य ट्रेंड जो सर्वे में सामने आया है, वह यह है कि गेट-टूगेदर न होने के बावजूद, बहुत सारे छात्र स्कूल में नहीं जाकर भी खुश हैं। अपने शैक्षणिक गतिविधियों को फिर से ऑनलाइन शुरू करने और साथियों के साथ डिजिटल बातचीत करने में सहज हैं।"

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