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पटना : यूँ तो महराणा प्रताप जयंती बहुत ही धूम - धाम से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मनाया था लेकिन जब बात टिकट के बटवारे को लेकर हुई तो फिर से राजपूत समुदाय के पीठ में छुरा भोका गया और बांका, जमुई, मुंगेर और पहले चरण में हुए किसी भी जगह एक भी राजपूत उमीदवार को टिकट नहीं दिया गया। उक्त बातें क्षत्रिय महासंघ के बिहार प्रदेश अध्यक्ष कुमार प्रभंजन ने कहीं। उन्होंने कहा कि राजपूत समुदाय ने हमेशा से नीतीश सरकार का साथ दिया है और नीतीश जी ने भी हमेशा से भरोसा भी दिया था कि राजपूत समुदाय को उचित भागीदारी मिलेगी। ऐसा ज्ञात है कि आनंद मोहन जी ने भी नीतीश जी के इसी निति का विरोध करते हुए पिछले 10 सालों से दुरी बनाये रखी है। माननीय नीतीश जी ने महराणा प्रताप जयंती पर बार - बार भरोसा दिलाया था और राजपूत समुदाय ने भी नगारे बजा कर इसका स्वागत किया था।  

पहले चरण के चुनावों की लिस्ट जारी होते ही जमुई और उसके आस - पास के विधान सभा में राजपूत समुदाय को काफी आश्चर्य हुई जब उन्होंने राजपूत समुदाय के लोकप्रिय नेता विजय सिंह जी एवं अन्य सामाजिक नेताओं का नाम नदारद पाया। सनद है कि विजय सिंह जमुई और आस - पास के क्षेत्र में काफी लोकप्रिय हैं और वर्तमान में विजय सिंह " बिहार स्टेट हाउसिंग कोऑपरेशन बैंक " के अध्यक्ष भी हैं। राजपूत समुदाय नीतीश जी के इस निर्णय से काफी मर्माहत है। 

ज्ञात हो कि राजपूतों की आबादी बिहार में करीब 6 से 8 फीसदी है। बिहार के करीब 30 से 35 विधानसभा क्षेत्र में राजपूत जाति निर्णायक भूमिका निभाती रही है। दरअसल करीब 8 महीने पहले 20 जनवरी 2020 को राजधानी पटना के मिलर स्कूल में महाराणा प्रताप की पुण्यतिथि पर स्मृति समारोह का आयोजन था जिसमें बड़ी संख्या में राजपूत समाज के लोग मौजूद थे। इसी समारोह में सीएम नीतीश कुमार के भाषण के दौरान राजपूत के नेता माने जाने वाले और कोसी क्षेत्र में दबदबा रखने वाले जेल में बंद बाहुबली नेता आनंद मोहन की रिहाई की मांग उठी तो सीएम नीतीश कुमार को आनंद मोहन की रिहाई का भरोसा देना पड़ा था लेकिन अभी तक आनंद मोहन की जेल से रिहाई नहीं हो पाई और आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद और बेटे चेतन आनंद ने आरजेडी का दामन थाम लिया। उसी मंच पर नीतीश ने भरोसा दिलाया था कि बिहार की राजनीति में राजपूत समुदाय को उनका हक़ मिलेगा।

कुमार प्रभंजन ने बताया कि राजपूत समाज को अपने पाले में लाने की कोशिश में सभी सियासी दल जुटे हैं मगर जदयू उनको अनदेखा कर रही है।

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