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मुंबई : पिछले सत्र में यू.एस. द्वारा अतिरिक्त प्रोत्साहन सहायता पर अनिश्चितताओं के बीच यू.एस. डॉलर के मजबूत होने से सोने और बेस मेटल की कीमतों में गिरावट आई थी। चीन में कच्चे तेल की मांग बढ़ने के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गई थी। हालांकि, मांग में कमी की संभावनाओं ने लाभ को कम कर दिया। 

एंजल ब्रोकिंग लिमिटेड के रिसर्च नॉन एग्री कमोडिटी एंड करेंसी एवीपी प्रथमेश माल्या ने बताया के सोने में 1.6% की गिरावट आई और यह 1890.8 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ, क्योंकि यू.एस. डॉलर की कीमतें बढ़ने की वजह से डॉलर नामित सोने की कीमत पर असर पड़ा। कोरोनावायरस राहत बिल पर अनिश्चितता ने यू.एस. डॉलर को मजबूत किया। कोरोनावायरस राहत बिल पर राष्ट्रपति ट्रम्प के नवीनतम प्रस्ताव के बाद डेमोक्रेट चिंतित थे। हालांकि, यू.एस. हाउस की अध्यक्षा नैन्सी पेलोसी ने संभावित सौदे की आशाएं जारी रखीं।

सितंबर 2020 में चीन की औद्योगिक गतिविधियों में मजबूत वृद्धि होने से भी इस पीली धातु की कीमतों पर और दबाव पड़ा। चीन की बेहतर औद्योगिक गतिविधियों की वजह से विदेशी मांग में वृद्धि और संतुलित आर्थिक सुधार की संभावनाएं देखने को मिली। निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता बढ़ने से सुरक्षित निवेश, सोने का आकर्षक धूमिल हुआ। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने इस घातक वायरस के खतरनाक प्रसार के बीच उभरते बाजारों के नज़रिये पर चिंता व्यक्त की, जिससे इस पीली धातु के घाटे को थोड़ी राहत मिली। डॉलर की बढ़ती मांग से आगे भी सोने की कीमतों कम हो सकती हैं।

डब्ल्यूटीआई क्रूड ऑयल 2% बढ़ा और 40.2 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ, क्योंकि चीन की मांग में वृद्धि हुई और यू.एस. तेल उत्पादन गतिविधियों में सुधार पर भारी पड़ी। चीन द्वारा कच्चे तेल का आयात सितंबर 2020 में प्रति दिन 11.8 मिलियन बैरल पर था, जो 1.75% की सालाना वृद्धि को दर्शाता है, क्योंकि कुछ कार्गो ने कस्टम को क्लियर किया।

मेक्सिको की यू.एस. खाड़ी में ऊर्जा उत्पादन को जोखिम में डालने वाला तूफान डेल्टा सप्ताहांत में नरम पड़ गया, जिससे तेल की कीमतों पर सेंध लगा दी।

लीबिया की सबसे बड़ी शरारा ऑयलफील्ड के फिर से शुरू होने से दुनिया भर में तेल की आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, मांग में कमी रहना इसका विपतरी काम कर सकता है। इसके अलावा, दुनिया की महत्वपूर्ण अर्थव्यवस्थाओं में कोविड-19 मामलों के फिर से बढ़ने और फिर से लॉकडाउन लगाने से भी कच्चे तेल की कीमतों पर बुरा असर पड़ा। ओपीईसी के अनुसार तेल की वैश्विक मांग में कमज़ोर रिकवरी की वजह से भी कीमतों पर बुरा असर पड़ सकता है।

यूएस द्वारा नए कोरोनोवायरस राहत कोष पर डेडलॉक के बीच, एलएमई पर बेस मेटल मेंगिरावट देखी गई। इसके अलावा, यूएस डॉलर के मजबूत होने से चीन द्वारा पोस्ट किए गए मजबूत व्यापार डेटा को दुर्बल कर दिया और बेस मेटल की कीमतों पर दबाव डाला। चीन का निर्यात लगातार चौथे महीने बढ़कर सितंबर 2020 में 9.9% हो गया क्योंकि महामारी की वजह से लगे लॉकडाउन के बाद से ज्यादातर अर्थव्यवस्थाएं फिर से पटरी पर आ रही हैं। इस बीच, इसी अवधि में चीन का आयात 13.2% बढ़ा।

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