0

-  अपनी तरह की पहली “वन वाॅटर“ रिपोर्ट, जिसमें बताया गया है कि 2025 तक पुणे की जल संबंधी मांग 853.5 मिलियन लीटर प्रति दिन तक बढ़ जाएगी।

- रिपोर्ट में सुझाए गए पुणे की जल संबंधी समस्या के समाधान के लिए एसटीपी निर्माण, वर्षा जल संरक्षण व्यवस्था और क्षमता संवर्द्धन सहित अनेक उपाय।

पुणे, महिन्द्रा लाइफस्पेस® और दी एनर्जी एंड रिसोर्स इंस्टीट्यूट की संयुक्त अनुसंधान पहल महिन्द्रा-टीईआरआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) ने पूना के नगर निगम क्षेत्र में जल की व्यवस्था और जल की उपलब्धता से जुडी सम्भावित चुनौतियों के बारे में एक रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट एक वर्चुअल कार्यक्रम में जाारी की गई। इसमें एक पैनल डिस्कशन का आयोजन भी किया गया, जिसमें एडवांस सेंटर फाॅर वाटर रिसोर्स डवलपमेंट एंड मैनेजमेंट (एसीडब्लूएडीएएम) के हैड डाॅ. हिमांशु कुलकर्णी, मिशन ग्राउंडवाॅटर से जुडे़ रविन्द्र सिन्हा, महिन्द्रा लाइफस्पेस के चीफ ऑफ डिजाइन एंड सस्टेनेबिलिटी अमर तेंदुलकर, वास्तुविद और बायोफिलिक डिजाइनर्स की फाउंडर और हैड रचना नागन्नावर और ओरेंज काउंटी ग्रुप पुणे के को-फाउंडर संदीप सोनिगरा मौजूद थे।

यह रिपोर्ट एक यूनीक, इंटीग्रेटेड “वन वाॅटर“ मैथडलाॅजी पर आधारित है जिसमें जल व्यवस्था के विभिन्न आयामों को शामिल किया गया है जैसे स्टाॅर्मवाॅटर, वेस्टवाॅटर और जल वितरण नेटवर्क आदि, ताकि सम्पूर्ण शहरी जल प्रबंधन की श्रेष्ठ व्यवस्था सुझाई जा सके। इसमें पुणे शहर और पिम्परी चिंचवाड़ शहर की उन सम्भावित जल सम्बन्धी जोखिमों को भी प्रमुखता से बताया गया है जो जल स्रोतों, प्रशासन, इन्फ्रास्ट्रक्चर और मांग व आपूर्ति से सम्बन्धित हैं।

रिपोर्ट जारी किए जाने के अवसर पर महिन्द्रा हैप्पीनेस्ट® के चीफ प्रोजेक्टर ऑफिसर अमित पाल ने कहा, ‘‘जल सबसे मूल्यवान प्राकृतिक संसाधन है और शहरी मानवीय बस्तियों के लिए पर्यावरण को अच्छा बनाए रखने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। महिन्द्र लाइफस्पेस® पूरे भारत में पर्यावरण के अनुकूल मकानों के निर्माण और विकास के क्षेत्र में अग्रणी है और स्थायी शहरी जीवनशैली व व्यवहाार के प्रति सहयोगात्मक व  अनुसंधान आधारित एप्रोच रखने के लिए प्रतिबद्ध है। हमें उम्मीद है कि पुणे की वर्तमान और भविष्य की जल सम्बन्धी चुनौतियों को सामने रखनी वाली यह एसेसमेंट रिपोर्ट सभी सम्बद्ध पक्षों, समुदायों में जागरूकता बढाएगी और शहर में जल की निरंतर उपलब्धता के लिए किए जाने वाले कामों को मजबूत करेगी।

दी एनर्जी एंड रिसोर्स इंस्टीट्यूट के सीनियर डायरेक्टर श्री संजय सेठ ने कहा, ‘‘वाॅटर सस्टेनेबिलिटी ऑफ पुणे- किसी भी शहर के लिए अपनी तरह का पहला अध्ययन है। यह अध्ययन महिन्द्रा लाइफस्पेस और एनर्जी एंड रिसर्च इंस्टीटयूट ने महिन्द्र-टीईआरआई सेंटर आॅफ एक्सीलेंस के अंग के रूप में मिल कर किया है। यह रिपोर्ट शहर में जल प्रबंधन के मैक्रो लेवल विश्लेषण पर फोकस करती है। इसके साथ ही आवासीय टाउनशिप्स में जल के उपयोग का माइक्रो लेवल विश्लेषण भी करती है। अध्ययन के परिणाम के रूप में आवासीय टाउनशिप्स में जल की मांग व उपयोग के बारे में गाइडलाइन भी तैयार की जाएगी जो उपभोक्ताओं के लिए उपयोगी रहेंगी।

रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष

1- 2025 में अनुमानित बिल्टअप एरिया ( मौजूदा शहरी विकास ट्रेंड के अनुसार)

Pune Municipal Corporation Pimpri Chinchwad

205.49 KM2(more than thrice of what it was in the early 1990’s) 187.94 KM2(more than twice of what was in 2011)

2- पुणे शहर तालुका को जल के वैकल्पिक स्रोत ढूंढने होंगे और मांग आधारित जल प्रबंधन पर काम करना होगा।

Estimated population of Pune City Taluka in 2025 Estimated water demand in Pune City Taluka in 2025

4.2 million 853.5 MLD (millions of litres per day)

3- पिम्परी चिंचवाड़ में जल शोधन प्लांट्स की मौजूदा क्षमता ( 2019 में 428 एमएलडी) 2025 में शहर की जनसंख्या के लिए अपर्याप्त रहेगी। 2025 में शहर की जल की मांग 577 एमएलडी तक पहुंचने का अनुमान है।

4- पुणे में जल के प्राकृतिक स्रोतों में प्रदूषण की जोखिम बहुत बढ़ गई है।

Current STP installed capacity Projected wastewater generation in 2025

Pune City Taluka 567 MLD 682.8 MLD


Pimpri Chinchwad 317 MLD 461.6 MLD

पुणे नगरीय क्षेत्र में जल की निरंतर उपलब्धता व प्रबंधन के लिए रिपोर्ट में दिए गए प्रमुाख सुझाव-

1- पुणे शहर के लिए भूजल की उपलब्धता और निकासी के आंकड़ों में जो कमी है उसे चिन्हित कर दूर किया जाए।

2- पूरे शहर में सीवरेज नेटवर्क हो ताकि सीवरेज का पूरा संग्रहण सुनिश्चित हो सके।

3- पूरे शहर में सभी जल कनेक्शन मीटर वाले हों ताकि पूरा राजस्व संग्रहण हो और जल के उपयोग को नियंत्रित किया जा सके।

4- शहर को जल पहुंचाने वाले प्राकृतिक स्रोतों में दूषित पानी को जाने से पूरी तरह रोका जाए।

5- सम्भावित जल स्रोतों को चिन्हित कर उनका आकलन किया जाए। यहां कई वैकल्पिक जल स्रोत हंै, जिनका सही ढंग से इस्तेमाल किया जाए तो जल की कमी का मुकाबला किया जा सकता है।

6- एसटीपी से निकलने वाला परिशोधित जल प्राकृतिक जल स्रोतों से ताजा जल निकालने का बेहतर विकल्प बन सकता है और अघरेलू कार्यों में इसका फिर से उपयोग किया जा सकता है।

7- वर्षा जल संरक्षण व्यवस्था के उपयोग व संरक्षण को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। यह काम नए भवनों में स्थानीय वर्षा जल संरक्षण व्यवस्था स्थापित कर किया जा सकता है। यह जल घरेलू उपयोग में लिया जा सकता है और इससे जल उपयोग का बिल भी कम होगा।

महिन्द्रा-टीईआरआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भारत में पर्यावरण अनुकूल भवन बनाने के लिए अत्याधुनिक अनुसंधान तकनीकों, उपकरणों और प्रदर्शन को मापने के उपायों के जरिए काम करता है। यह संयुक्त अनुसंधान उपक्रम भारत के रीयल एस्टेट सेक्टर के लिए विज्ञान आधारित ओपन सोर्स साॅल्युशंस विकसित करने का काम कर रहा है।

Post a Comment

 
Top