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प्लाजमा थेरेपी में एंटीबॉडी टेस्ट सहायक - डॉक्टर ज्योति सिंह

नालासोपारा। मुम्बई के समीप पालघर जिले के वसई विरार मनपा क्षेत्र में जहाँ कोरोना पर तेजी से नियंत्रण पाया जा रहा है वहीं एक अच्छी खबर ये है कि यहां के अधिकांश आबादी में कोरोना वायरस के एंटीबॉडी मौजूद हैं। यहां अधिकांश लोग ऐसे हैं, जिनके शरीर में कोरोना के वायरस आकर जा चुके हैं। और जिन्हें कोरोना हुआ उन्हें पता तक नहीं चला और वे पूरी तरह स्वस्थ्य हैं। ये दावा किया है  लाइफकेयर चैरिटेबल हॉस्पिटल और स्टार हॉस्पिटल के मुखिया डॉक्टर महाबली सिंह और डॉक्टर ज्योति सिंह ने अपने यहां  आये कई लोगों के सैंपल की जांच करवाने के आधार पर। प्लाजमा थेरेपी में एंटीबॉडी टेस्ट को खासा मददगार माना गया है। डॉक्टर महाबली सिंह के मुताबिक कोरोना से ठीक होने वाले जिस शख्स में अच्छी तादाद में एंटीबॉडी होते हैं, वो प्लाजमा दान करके कोरोना से गंभीर रूप से प्रभावित मरीज की जान बचा सकता है।
अगर कोई शख्स कोरोना ग्रस्त होता है, तो उसका शरीर वायरस से लड़ने के लिये एंटीबॉडी तैयार कर लेता है। कुछ लोगों में कोरोना के कोई लक्षण नहीं दिखते, कुछ में मामूली लक्षण दिखते हैं, तो कुछ की जान चली जाती है। एंटीबॉडी टेस्ट करने से पता चल जाता है कि इंसान को कोरोना हो चुका है या नहीं।
डॉक्टर महाबली सिंह के मुताबिक वसई विरार मनपा क्षेत्र की आबादी के एक बड़े हिस्से ने तेजी से कोरोना से प्रतिरक्षा की क्षमता विकसित कर ली है। डॉक्टर सिंह के मुताबिक पिछले दिनों उनके हॉस्पिटल में एक मरीज आये जिनकी एक महीने में दो बार कोविड की जांच कराई गई। जो निगेटिव आई थी। बाद में हमने उनका एंटीबॉडी टेस्ट कराया तो पता चला कि उनके शरीर ने कोरोना से प्रतिरक्षा की क्षमता विकसित कर ली है। यानी उनको कोविड हो चुका था और वे स्वस्थ्य भी चुके हैं और उन्हें पता भी नहीं चला।
डॉक्टर महाबली सिंह के अनुसार जिन शहरों में कोरोना के ज्यादा मामले आए हैं, वहां से एंटीबॉडी पॉजिटिव के भी ज्यादा मामले मिले हैं।
यहां नालासोपारा पूर्व में रहने वाले और एक निजी कंपनी में काम करने वाले 48 साल के शशिकांत सिंह ने भी अपना पिछले दिनों एंटी बॉडी टेस्ट कराया तो पता चला कि उनके शरीर ने कोरोना से प्रतिरक्षा की क्षमता विकसित कर ली है। वे कहते हैं मेरे घर में मेरी माँ और पत्नी कोविड पॉजिटिव पायी गयीं थीं और लाइफ केयर चैरिटेबल हॉस्पिटल तथा स्टार हॉस्पिटल से उपचार के बाद दोनों स्वस्थ्य होकर कुछ दिनों में घर आ गयी। जिसके बाद शशिकांत सिंह ने अपनी भी कोविड की जांच कराई जिसके बाद उनकी रिपोर्ट निगेटिव आयी।एक महीने में दो दो बार उन्होंने अपनी जांच कराई और दोनों बार उनकी रिपोर्ट निगेटिव आयी। जिसके बाद डॉक्टर महाबली सिंह के निर्देशन पर उन्होंने अपना एंटी बॉडी टेस्ट कराया तो पता चला कि उनके शरीर ने
कोरोना से प्रतिरक्षा की क्षमता विकसित कर ली है। यानी उन्हें कोरोना हुआ और उन्हें पता भी नहीं चला तथा वे अब पूरी तरह स्वस्थ्य हैं।
आपको बता दें कि इन दिनों कई कॉरपोरेट संस्थान जो लॉकडाउन के बाद अपना कामकाज शुरू कर रहे हैं, वो अपने कर्मचारियों का एंटीबॉडी टेस्ट करवा रहे हैं। ये टेस्ट स्वैब टेस्ट के मुकाबले काफी सस्ता है और इसके नतीजे भी चंद घंटो में मिल जाते हैं।
हालांकि इसे स्वैब टेस्ट का विकल्प नहीं माना जा सकता। इस टेस्ट में स्वैब के बदले खून का सैंपल लिया जाता है। प्लाजमा थेरेपी में एंटीबॉडी टेस्ट को खासा मददगार माना गया है। कोरोना से ठीक होने वाले जिस शख्स में अच्छी तादाद में एंटीबॉडी होते हैं, वो प्लाजमा दान करके कोरोना से गंभीर रूप से प्रभावित मरीज की जान बचा सकता है।

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