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मुंबई। नागरिकों की सुरक्षा व स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था को दोबारा पटरी पर लाने के बीच संतुलन कायम करना अब भी विश्वभर की सरकारों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। कोरोना वायरस की दूसरी लहर की चिंता के कारण बाजारों में लगातार दबाव बना हुआ है।
एंजल ब्रोकिंग लिमिटेड के नॉन-एग्री कमोडिटीज एंड करेंसीज के चीफ एनालिस्ट प्रथमेश माल्या ने बताया कि चीन और अमेरिका जैसे देशों में कोरोना के मामले बढ़ने के कारण पिछले सप्ताह स्पॉट गोल्ड की कीमत में 1.59 फीसदी बढ़त देखने को मिली। यूएस फेडरल रिजर्व ने आगाह किया है कि निकट भविष्य में बेरोजगारी बढ़ने की आशंका है। अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता और कोरोना के बढ़ते मामलों के कारण सोने की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिली है। हालांकि, अमेरिकी डॉलर के प्रोत्साहन ने भी सोने की कीमतों को अन्य करेंसी होल्डर के लिए महंगा बनाया है और बाजार के सेंटीमेंट को प्रभावित किया है।
पिछले सप्ताह स्पॉट सिल्वर की कीमतें भी 0.85 फीसदी बढ़कर 17.8 डॉलर प्रति आउंस पर बंद हुई। एमसीएक्स में यह 0.56 फीसदी नीचे गिरकर 48,365 रुपए प्रति किलोग्राम के भाव पर बंद हुआ।
अमेरिका में हवाई और सड़क यातायात पर लगे प्रतिबंधों के कारण अमेरिका में कच्चे तेल के भंडार में इजाफा हुआ, जिसके कारण पिछले सप्ताह डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमतें 4.5 फीसदी गिरीं। एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (ईआईए) की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका का कच्चे तेल का भंडार पिछले सप्ताह 19 जून 2020 को 14 लाख बैरल बढ़ा।
ऑर्गेनाइजेशन ऑफ पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंस्ट्रीज (ओपेक) में वैश्विक मांग को देखते हुए कच्चे तेल के उत्पादन में लगातार कटौती करने पर आम सहमति बनी है। हालांकि, यूरोप, एशिया और अमेरिका में कई बिज़नेस के दोबारा खुलने के कारण कच्चे तेल की कीमतों में हल्का सुधार देखने को मिला है।

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