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फोटो - राजेश कुमार कोरिल

निर्देशक अग्निदेव चटर्जी की फ़िल्म 'बबलू बैचलर' बीस मार्च को प्रदर्शित होने जा रही है। फ़िल्म के मुख्य कलाकार शरमन जोशी, पूजा चोपड़ा और तेजश्री प्रधान हैं। फ़िल्म के कलाकारों से हुई बातचीत में शरमन जोशी ने बताया कि यह एक साधारण सी फ़िल्म है, जो हँसी के ठहाकों के साथ दर्शकों का मनोरंजन भी करेगी। इस फ़िल्म की कहानी एक ऐसे युवक की है जो अपने लिये योग्य और अपने पैमाने में खरी उतरने वाली जीवन संगिनी की तलाश में है। उसे कई लड़कियां मिलती हैं लेकिन उसके पैमाने पर खरी नहीं उतर पाती। कोई पसंद आ भी जाती तो वह स्वयं लड़कियों द्वारा नकार दिया जाता है। कोई न कोई परिस्थिति ऎसी उत्पन्न होती है कि वह शादी कर नहीं पता और इधर शादी की उम्र भी निकलती जाती है। लगभग आधुनिक समय में कई युवाओं की यही कहानी है कि योग्य जीवनसाथी की उत्तम आकांक्षा के चक्कर में योग्य साथी और उम्र दोनों हाथ से निकल जाता है। यह हल्की फ़ुल्की हास्य से भरी बॉलीवुड ड्रामा फ़िल्म है।
 शरमन जोशी ने 'स्टाइल' फ़िल्म से मायानगरी के रूपहले पर्दे पर अपने कैरियर की शुरुआत की थी। आज भी यह फ़िल्म युवाओं को बहुत पसंद आती है। 'थ्री इडियट्स', 'फरारी की सवारी' और 'गोलमाल' फ़िल्म से शरमन का कद और ऊंचा होता गया। ये थिएटर के जाने माने कलाकार हैं और इनके अभिनय प्रतिभा के सभी कायल हैं। रंगमंच के साथ फिल्मी पर्दे पर इनकी कई फिल्में प्रदर्शित हो चुकी है।
 रंगमंच पर ही शरमन की मुलाकात तेजश्री प्रधान से हुई थी जो इस फ़िल्म की नायिका है। तेजश्री ने कई नाटक और मराठी फिल्मों में काम किया है। ये बारह वर्ष की उम्र से मराठी फिल्मों में काम कर रही है। इनकी मुख्य फिल्में सत्या काय करते, जजमेंट, सरियत, लग्न भावे करूं आदि है।  ज़ी मराठी पर प्रसारित धारावाहिक 'अगबाई सासूबाई' ने तेजश्री को काफी प्रसिद्धी दिलाई है।
 फ़िल्म 'बबलू बैचलर' में 'कमांडो' और 'अय्यारी' की अभिनेत्री पूजा चोपड़ा भी मुख्य भूमिका में है। पूजा फेमिना मिस इंडिया 2009 का खिताब जीत चुकी है। फ़िल्म में पूजा का किरदार एक मेहनती और महत्वाकांक्षी लड़की की है। जो अपने जीवन में अपना लक्ष्य बनाकर काम करती है। पूजा अपने निजी जिंदगी में भी अपने उसूलों के साथ काम करना पसंद करती है। उसे ऐसी फिल्में करना पसंद है जिसे बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक परिवार के साथ बैठकर देख सकें। फ़िल्म बबलू बैचलर भी हास्य से भरी पारिवारिक फ़िल्म है जिसे थिएटर पर देखना बेहद रोमांचक होगा।

गायत्री साहू

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