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 युवा साहित्यकार व पत्रकार पवन तिवारी को उनके हिन्दी भाषा में योगदान को देखते हुए १३ दिसम्बर २०१९ को पावन क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित श्री मौनीतीर्थ उज्जैन में एक भव्य समारोह में चौबीसवें अधिवेशन के अवसर पर विद्यापीठ के कुलपति सुमन के हाथों विद्यावाचस्पति की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया.
ज्ञात हो कि पवन तिवारी को उनके पहले ही उपन्यास ‘अठन्नी वाले बाबूजी’ के लिए महाराष्ट्र राज्य साहित्य अकादमी का वर्ष २०१६-२०१७ का जैनेन्द्र पुरस्कार प्राप्त हो चुका है. ’चवन्नी का मेला’ उनकी सबसे चर्चित पुस्तक है. १२ वर्ष की उम्र से लेखन करने वाले पवन तिवारी आधा दर्जन से अधिक समाचार पत्रों के सम्पादक रहे. २२ वर्ष की आयु में भारत दररोज के सम्पादक बने. २३ साल की उम्र में पहली किताब ‘चवन्नी का मेला’ प्रकाशित हुई. टेलीविजन से लेकर आकाशवाणी तक अनेकों रचनायें प्रसारित एवं प्रकाशित हुई. १५०० से अधिक लेख एवं रचनाएँ देश भर की पत्र- पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं. साहित्य भूषण, विवेकानन्द शिखर सम्मान, सम्वाद पत्रकारिता शिखर सहित दर्जनों सम्मान से सम्मानित हो चुके पवन तिवारी मूल रूप से उत्तर प्रदेश, अम्बेडकर नगर जनपद के जहांगीर गंज स्थित अलाउद्दीन पुर गाँव के एक साधारण किसान परिवार में पैदा हुए. १५ वर्ष की उम्र में माँ की बीमारी एवं परिवार की दयनीय स्थित के कारण १९९८ में मुंबई आये और संघर्ष कर एक मुकाम बनाया. जो आम जन के लिए प्रेरणादायक है.
पवन तिवारी ने साहित्य की लगभग सभी प्रचलित विधाओं में लिखा है. फिर चाहे चौपाई हो या दोहा, ग़ज़ल हो या नज़्म, मुक्तक हो या गीत, अतुकांत या नवगीत, लेख हो या ललित निबन्ध, कहानी से लेकर उपन्यास तक कलम चलायी है. इसके साथ ही एक अच्छे वक्ता होने के साथ-साथ कवि सम्मेलनों में उनके संचालन की विधा बेहद प्रेरक और अद्भुत है. जिसके लिए उन्हें देश भर में जहां भी गये सराहना और सम्मान प्राप्त हुआ है.
विद्यावाचस्पति सम्मान मिलने पर उन्हें देश भर से शुभकामनाएँ एवं बधाई मिली है. जिनमें भोपाल से वरिष्ठ साहित्यकार डॉ हरि जोशी, उन्नाव से वरिष्ठ साहित्यकार डॉ गणेश नारायण शुक्ल, डॉ तरुण कुमार त्रिपाठी, डॉ बाबूलाल सिंह, कवि अजय बनारसी, समाजसेविका एवं कवि अलका पाण्डेय, शोध शक्ति के प्रधान सम्पादक श्यामधर पाण्डेय, कवरेज इंडिया समाचार पोर्टल के निदेशक मंगला प्रसाद तिवारी, कानपुर से वरिष्ठ साहित्यकार श्रीहरि वाणी, लघुकथाकार चन्द्रिका व्यास, युवा कवि अरविन्द पाण्डेय, आनन्द मिश्र, अभियंता राम कुमार त्रिपाठी, इंटीग्रल विश्वविद्यालय लखनऊ के विज्ञान एवं तकनीक विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ आनन्द वर्धन शुक्ल, आनन्द मिश्र, राजेश राज, बाहुबली सिंह संगम, विनीत शंकर, अभिनेता राघवेन्द्र त्रिपाठी, वरिष्ठ नवगीतकार पं.किरण मिश्र, वरिष्ठ गीतकार हरिश्चन्द्र दास, कोटा से वरिष्ठ कवि सुरेशचन्द्र ‘सर्वहारा’ जी, वरिष्ठ पत्रकार रवीन्द्र मिश्र, पूर्व आयकर आयुक्त शिवकुमार शर्मा, वरिष्ठ व्यंग्य कवि हरीश शर्मा ‘यमदूत’, शिक्षाविद भारती श्रीवास्तव जी, लखनऊ से प्रतिलिपि की प्रतिनिधि एवं लेखिका वीणा वत्सल सिंह, टेलीविजन हास्य कलाकार एवं कवि सुनील सांवरा, पंचगनी से कवि एवं समीक्षक जीतेंद्र पाण्डेय, बालाघाट से कवि हलचल बालाघाटी, समाज सेवी निर्भय तिवारी, वीर रस के प्रसिद्ध कवि कमलेश पाण्डेय तरुण, हास्य कवि सत्यदेव ‘विजय’ वरिष्ठ कवि गीतेश गीत सहित देश भर से तमाम साहित्यकारों, पत्रकारों, बुद्धिजीवियों एवं शुभचिंतकों ने बधाई दी है.

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