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ओ एस एस ओ इंटरनेशनल एंटरटेनमेंट एलएलपी और धर्मेश पंडित द्वारा निर्मित साथ ही उमेश मिश्रा फ़्रेंड्स मूविंग पिक्चर्स द्वारा निर्मित फ़िल्म 'यारों...वी आर द बेस्ट' में आज के समय के शिक्षा व्यवस्था की सच्चाई नज़र आती है।
फ़िल्म के लेखक और निर्देशक सुनील प्रेम व्यास ने आज के समय के गंभीर विषय पर फ़िल्म बनाई है। यह फ़िल्म हर परिवार के लिए महत्वपूर्ण विषय है।
हर माता पिता की इच्छा होती है कि उनके बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त करें उनकी पढ़ाई अच्छे स्कूल में हो, उनके बच्चे पढ़ाई में सबसे आगे रहें। यही सोच बच्चों के दिमाग में बोझ पैदा कर देती है। आज के समय में जहाँ शिक्षा व्यापार बन गया है वहीं जी डी इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ने वाले दो बच्चे जिसमें एक गरीब परिवार का है तो दूसरा अमीर घर का, उन दोनों बच्चों की दोस्ती की मिसाल की यह कहानी है फ़िल्म 'यारों...वी आर द बेस्ट। दोनों बच्चों के पैरेंट्स की अपने बच्चों की फर्स्ट आने की महत्वाकांक्षा बच्चों के बीच कॉम्पिटिशन पैदा कर देती है, जीत के लिए अजय चाल चलता है और रेस जीत जाता है, पर दिल से उसे ग्लानि होती है कि उसने चीटिंग की है वह रघु से माफी मांगता है और रघु और अजय अच्छे दोस्त बन जाते हैं। वे हर घड़ी एक दूसरे की सहायता करते हैं। रघु दिल से कमजोर होता है वह लंबी रेस नहीं जीत सकता अपने दोस्त को जीत दिलाने के लिए इन्टर स्कूल कॉम्पिटिशन में अजय अपनी पीठ पर उठाकर सारे बच्चों को साथ लेकर फिनिशिंग लाइन पार कर देता है। यह मार्मिक दृश्य दर्शकों के हृदय को द्रविद कर देता है। इस फ़िल्म में निर्देशक ने बाल्यावस्था के मनोभावों का बेहतरीन चित्रण किया है।
फ़िल्म का संगीत भी अच्छा है। फ़िल्म के मुख्य पात्र राज जुत्सी, दीपन्निता शर्मा अटवाल, अनंग देसाई, जॉय सेनगुप्ता, सुलभा आर्या, सुप्रिया कार्णिक, वीरेन्द्र सक्सेना, प्रसाद रेड्डी, यश घनेकर, स्मेरा जाधव, ज्योति गौबा, विजय कश्यप, बृजेन्द्र काले और विक्रम गोखले हैं।

संतोष साहू

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