0

मुंबई : चुनौतियों का मुकाबला करके अपनी मंज़िल हासिल करनेवाले दक्ष भास्कर को दसवें न्यूजमेकर्स एचीवर अवार्ड्स 2019 से सम्मानित किया गया। मुंबई में आयोजित अवार्ड्स नाईट में दक्ष भास्कर को प्रसिद्व संगीतकार बप्पी लाहिड़ी और पर्यावरणविद एवं व्यवसायी डॉ विठ्ठल वेंकटेश कामत ने अवार्ड, ट्रॉफ़ी और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। मंच पर अवार्ड समारोह के समय दक्ष के पिता राकेश भास्कर और माँ संगीता भास्कर अपने बेटे के हौसलें को बढ़ाने के लिए उपस्थित थे।  
यशवंतराव चौहान सेंटर में आयोजित न्यूजमेकर्स एचीवर अवार्ड्स 2019 में दक्ष भास्कर को ज्यूरी कैटेगरी के अंतर्गत डांसिंग स्टार के पुरस्कार से सम्मानित किया।उपलब्धि की इस शाम में गायिका आशा भोसले , पंडित अजय पोहनकर , अभिनेत्री मौसमी चैटर्जी को लाइफ़टाइम अवार्ड से सम्मानित किया गया। कोरियॉग्राफर गीता कपूर, अभिनेत्री अंकिता लोखंडे , सामाजिक कार्यकर्त्ता एवं राजनेता विनोद तावड़े , कॉमेडियन कीकू शारदा, नाव्या सिंह, राजेश श्रिंगारपुरे प्रमुख हस्तियों को भी विभिन्न वर्ग में पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
आज लोगो के दिलो पर राज करने वाले डांसिंग स्टार दक्ष भास्कर के लिए जीवन इतना आसान नहीं था दक्ष भास्कर एक स्पेशल चाइल्ड़ है। आम लोगों मुकाबले दक्ष की दुुनिया बहुत अलग थी, अपने पैरों तक पर खड़े हो कर चलने के लिए पूरे दो साल लगे। कमजोर मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए रोज नियमित रूप से व्यायाम कराना और ज्यादा से ज्यादा काम खुद से करने के लिए प्रेरित करना, बस यहीं से दक्ष और उनके मात-पिता का संघर्ष शुरू होता है।
इस अवसर पर दक्ष भास्कर ने कहाकि डांसिंग उनका सबसे बड़ा पैशन है साथ में वह ड्राईंग भी पसन्द करते है लेकिन वह  डांसिंग में भविष्य में भी कुछ नया करते रहेंगे। दक्ष की सफ़लता में उनके पिता और माँ की अहम् भूमिका रही है। माँ संगीता भास्कर ने बताया "हमारा सबसे पहले उद्देश्य यह था की दक्ष को यह महसूस नहीं होना चाहिए की वह स्पेशल चाइल्ड़ है। माँ होने के नाते बस मेरा यही फर्ज बनता था कि मैं इस बच्चे को इस काबिल बना दूँ कि दूसरे पर इसकी निर्भरता कम हो सके। दिन प्रतिदिन के हर छोटे बड़े काम जैसे खाना खाना, कपड़े पहनना, सामान को व्यवस्थित करके रखना इत्यादि सभी के लिए उसको प्रेरित करना शुरू किया । हम दक्ष को स्पेशल चॉइल्ड नहीं मानते हम लोगों ख़ुद को स्पेशल पैरेंट्स मानते है ईश्वर ने हमें एक ऐसे बच्चे की परवरिश के लिए चुना है। स्पेशल बच्चो को बहुत प्यार और संयम से उनकी मनोभावनाओं को समझते हुए आगे बढ़ाना होता है। 
नृत्य का शौक शायद भगवान का ही वरदान है जिसका अनुमान मात्र छः माह की आयु से हो गया था । पहले संगीत की धुन पर हिलना और फिर यह कब नृत्य में परिवर्तित हो गया पता ही नहीं चला। पहले घर फिर स्कूल धीरे धीरे यह सिलसिला बढ़ता गया। नृत्य प्रतिभा को देखते हुए स्कूल के रंगारग कार्यक्रमों में शामिल किया जाने लगा, जिससे सबके मध्य अपनी प्रतिभा को प्रदर्शित करने का साहस दिनों दिन बढ़ता गया, जितने लोग, उतनी तालियों की गड़गड़ाहट दक्ष के होसलौ को और बुलंद करती गयी । मुझे आज भी याद है जब बालडबिन गर्ल स्कूल में फिल्म "मोहब्बतें " के गाने " आँखे खुली हो या हो बंद दीदार उनका होता है ....." पर डान्स करने के बाद किस तरह से लड़कियों ने उसको घेर कर अपने हाथ बढ़ाये थे आटोग्राफ लेने के लिए । उनके मध्य मुझे भी एक पल को लगा कि किसी हीरो की माॅ हूँ । उस पल खुद को बहुत गर्वित महसूस किया। मैंने मन ही मन में ईश्वर को धन्यवाद दिया कि हमारी मेहनत सफल हो रही है। फिर इसकी इस प्रतिभा को समझते हुए हर संभव प्रयास किया। आज दक्ष का अपना db vlog नाम से यू ट्यूब चैनल भी है।
अब लाखों के दिलों में राज करने वाले दक्ष को विभिन्न कार्यक्रमों में आमंत्रित किया जाता है, हाल ही में दिल्ली में मिस्टर एवम् मिस इडिया डेलिवुड प्रतियोगिता में आमंत्रित किया गया था ।नृत्य करना इतना आसान नहीं होता उसके लिए शारीरिक एवम् मानसिक संतुलन को बनाना होता है। कहते हैं कि इसांन का पहला स्कूल उसका घर होता है यहीं से उसके उज्जवल भविष्य की नींव पड़ती है, अगर नींव मजबूत तो इमारत मजबूत। हमारी व्यायाम करने की लगन को देखता हुआ ही वह बड़ा हुआ है और धीरे धीरे यह उसकी आदत बन गई। आज जब उसकी विशेष स्कूली शिक्षा समाप्त हो चुकी है तब दक्ष प्रतिदिन 2 घंटा अपना समय जिम में व्यतीत करता है। बहुत ही नियमित दिनचर्या होती है हमारी, हम दोनो सभी काम चाहे व्यायाम हो, शापिंग या अन्य कहीं भी जाना हो साथ साथ करते हैं। मैंने कभी इसकी उपेक्षा नहीं की और एक मित्र की तरह हर समय एक दूसरे का साथ दिया । मेरी उपस्थिति दक्ष में बहुत आत्मविश्वास जगाती है। मेरे खुश होने से वह खुश और दुखी होने दुखी हो जाता है। मुझे पार्टनर कहता है क्योंकि पल पल हम एक दूसरे के साथ रहते हैं।
आज ऐसा लगता है कि हम अपने उत्तरदायित्व में सफल हुए हैं। उसकी अनेक अच्छी आदतें जैसे स्वच्छता पसंद, नियम से अपने सारे कार्यों को करना, अपने कमरे के अलावा पूरे घर को व्यवस्थित करना और सभी सहयोगियों का समय पर आना इत्यादि बहुत सी बातों का ध्यान रखना है। अपनी व्यवहार कुशलता से सबके दिलों पर राज करता है। अब हाल यह है कि हम दक्ष के माता पिता के नाम से जाने जाते हैं।
दक्ष के विकास में बहुत बड़ा श्रेय बढ़ती टेक्नोलाॅजी और टीवी को भी जाता है, जिससे उसने बॉलीवुड की दुनिया को करीब से जाना और अपने पसंदीदा हीरो के गानों पर थिरकने और उनकी जैसी बाॅडी बनाने की कोशिश की। आज के दिन दक्ष स्वयं ही इतना सक्षम है कि किसी भी तरह के इलेक्ट्रानिक उपकरणों, चाहे टीवी, मोबाइल या कम्पयुटर का प्रयोग हो, स्वयं करके अपना पसंदीदा काम कर लेता है । इसके अतिरिक्त सोशल मीडिया जैसे फ़ेसबुक,इन्सटाग्राम और व्हाट्सऐप में भी काफ़ी सक्रिय है। परिवार में होने वाले जन्मदिन और शादी की वर्षगाँठ पर सबको स्वयं बधाई देने में सक्षम है।

Post a comment

 
Top