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संतोष साहू / मुंबई 
सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस , सांप्रदायिकता और भेदभाव से लड़ने के लिए समर्पित एक मानवाधिकार और कानूनी संसाधन मंच है, जो सभी के अधिकारों के लिए लड़ता है,अब अयोध्या में शांति के लिए, विभिन्न प्रमुख भारतीयों की एक बड़ी संख्या, समाज के अलग अलग पहलुओं से और देश के कोने कोने से  राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले में हस्तक्षेप करने आये हैं। 
सीजेपी की दलील है कि सुप्रीम कोर्ट अपने क्षेत्राधिकार का इस्तेमाल करे, लेकिन मामले को संकीर्ण संपत्ति विवाद की तरह न माने, बल्कि धर्म द्वारा जमीन के एक टुकड़े का भाग्य निर्धारित करने पर होने वाले आगामी असर को पहचाने।
सीजेपी अदालत को ‘अयोध्या’ शब्द के अर्थ को संज्ञान में लेने की अपील करता है, जो ‘अ’ जिसका अर्थ है 'बिना' और 'युद्ध' से जुड़कर बना संयुक्त शब्द है। अयोध्या, जो बिना किसी टकराव के, सभी के लिए रहने की जगह होनी चाहिए, समुदायों के बीच एक शातिर और गर्वित संघर्ष का प्रतीक बन चुका है।
शांतिप्रिय और जागृत नागरिकों की आवाज़ ने, जो इस संघर्ष के बीच दब कर रह गयी थी, सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि विवाद को सिर्फ वादियों के बीच के एक संपत्ति विवाद के रूप में न देखें, बल्कि इसे संविधान, जिस पर देश खड़ा है, के मूल तत्वों पर असर पड़ता है।
मध्यस्थता कर रहे लोगों में श्याम बेनेगल, अपर्णा सेन, ओम थानवी, आरबी श्रीकुमार, आनंद पटवर्धन (राम के नाम), गणेश देवी, मेधा पाटकर, अरुणा रॉय, अनिल धारकर, गणेश देव्य, तीस्ता सेतलवाड़, जॉय सेनगुप्ता, साइरस ग़ज़दर, राम रहमान, सोहेल हाशमी, एमके रैना, डॉ० बीटी ललिता नाइक और जॉन दयाल जैसे जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों से निकलकर आये देशभर के करीब तीन दर्जन भारतीय हैं। अन्य लोग जो शामिल हैं: सुमन मुखोपाध्याय, किरण नागरकर, कुमार केतकर, कल्पना कानाबीरन, के एल अशोक, के पी श्रीपला, ए के सुब्बिया, सुरेश भट्ट बकरबाल, प्रोफेसर जी हरगोपाल, एन बाबायाह, तानाज़ दारा मोदी, मुनीज़ा खान, तनवीर जाफ़री और डॉल्फी डिसूजा।

सीजेपी की सह-संस्थापक और सचिव, तीस्ता सेतलवाड़ का कहना है, "इस विवाद, जो कि अनुचित और हिंसक है, के परिणाम में उन सिद्धांतों को प्रभावित करने की क्षमता है जिन पर भारतीय लोकतंत्र खड़ा है।" वह आगे जोड़ती हैं, समय आ गया है कि इस संघर्ष के कारण हुए घावों को भरा जाए और सभी समुदायों के शांतिप्रिय नागरिक, युवा और बुजुर्ग एक समावेशी और भविष्यदर्शी समाधान के लिए बोलना शुरू करें। यह मामला भारत की आत्मा से जुड़ा हुआ है। "
सीजेपी  1 दिसंबर को नागरिक मुकदमे के लिए अपना हस्तक्षेपपूर्ण आवेदन दायर किया है और सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के 5 दिसंबर को शुरू होने पर वह अपना पक्ष रखेगी। इस बीच, अयोध्या में शांति कायम करने के समर्थन में उन्होंने वेबसाइट पर अपनी ऑनलाइन याचिका शुरू कर दी है जिसके लिए आम भारतीयों से हस्ताक्षर जुटाकर उनसे समर्थन देने की अपील की जा रही है। 
सभी नागरिक cjp.org.in/peace-in-ayodhyaपर याचिका को पढ़ सकते हैं और हस्ताक्षर कर सकते हैं।

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