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  ( व्यंग्यात्मक सच )

       वैसे तो इतनी सुबह सुबह  चिड़िया नज़र नहीं आती मगर चिड़िया छोटी सी होती है कहीं भी पहुँच सकती है आज
ये विरार की पहली लोकल के (first-class) यानि  प्रथम दर्जे में है।
     सुबह के 3:50 बजे हैं  ...
    
और हाँ ऽऽऽ  इस तरह का दृश्य करीब करीब रोज देखने को मिलता है।
      अचानक , अकस्मात् बहुत सारी घटनाएँ घटित होती हैं
जैसे कोई भी पागल या भिखारी बेधड़क व धड़ल्ले से डिब्बे में घुस जाता है ।
         पांव फैलाकर पूरी सीट पर सो जाता है खांसते हुए कफ थूकना चाहता है मगर उठने की कोशिश भी नहीं करता वहीं से
निशाना साधता है दरवाज़े का
... मगर अफ़सोस निशाना चूक जाता है और फिर चेहरा घुमाकर ऐसे सो जाता है जैसे ये सब उसने नहीं किया।
       भले ही कोई उस गंदे थूक से फ़िसल जाय गिर जाय उसे क्या ...
          बात इससे भी आगे बढ़ती है तब.... जब चलती ट्रेन में इन्हें जोर से पेशाब लगता है पुरुष है तो खड़े खड़े, स्त्री है तो दरवाज़े के किनारे बैठ कर...
         उस समय ये बहरे हो जाते हैं डिब्बे में कोई भी चिल्ला कर इन्हें रोकने की कोशिश करे , पिछले डिब्बे से चिल्लाये या अगले डिब्बे से इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता
        ऐसे अनसुना करते हैं जैसे कुछ हुआ ही नहीं...
     चिड़िया सोच में पड़ जाती है आख़िर इन सबका समाधान क्या है ?
         झपटमारों के तो क्या कहने जैसे ही ट्रेन चलने लगती है आव देखा न ताव बिजली की तेज़ी से किसी के भी हाथ से फोन छीन कर प्लेटफार्म पर कूद जाते हैं
    ...तब तक ट्रेन इतनी तेज़ हो हो जाती है कि अपने क़ीमती फोन को किसी और के हाथों में जाते देखने के अलावा कुछ नहीं कर सकते
      अब आप ही बताएं रेलवे ने भाड़ा बढ़ाया कहा सुविधायें बढ़ायेंगे एक जाँच अधिकारी तक नहीं है जो ये देख सके की रेल व रेल के यात्री भी सुरक्षित हैं के नहीं ।
         बिना टिकट व द्वितीय दर्जे की टिकट वाले व रेलवे के लाइन मैन भाले,हथोड़े,जनरेटर, व सलियों के साथ 10 - 12 की संख्या में घुस जाते हैं
      क्या सरकार तभी जागती है जब कोई बड़ा हादसा हो जाये
        साधारण नागरिक के पास इतना समय नहीं की वो शिकायत भी कर सके ऐसा नहीं हो सकता कि सरकार के पास कोई रास्ता नहीं ,
     शायद चिड़िया के इस खुलासे से किसी अधिकारी का मन जाग जाये और सुध लेले वैसे सब यही कहते हैं
" सुबह सुबह पहली ट्रेन की सुध कोई नहीं लेता "  शायद लेले ...
- विशुराज शर्मा

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