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  सिनेमा समाज का आईना है जिसे कुछ सार्थक फिल्मकार बखूबी समझते हैं जिसके लिए समाज में घट रही दुराचार को आम जीवन के बीच लाकर सचेत करने की कोशिश करते रहते हैं । फ़िल्म फेस्टिवल में दिखाई जाने वाली सिनेमा मुख्यधारा से बिल्कुल अलग विचारोत्तेजक होती है ।
देवाशीष मखीजा निर्देशित और रंगकर्मी सुषमा देशपांडे की उम्दा अभिनय ने 'आजी ' को अविस्मरणीय फ़िल्म बना दिया है ।
एक दस वर्षीया बच्ची की निर्ममता से दुराचार के बाद  विधायक के कामुक हवसी पुत्र के गुप्तांग को काटकर अज्जि यानी पीड़िता की दादी समाज की एक विकृत मानसिकता का अंत करती है ।
अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म महोत्सव में यूडली फिल्म्स द्वारा निर्मित हिंदी फिल्म ' आजी ' को भरपूर तारीफ मिली है ।
-  संतोष साहू

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