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मुंबई। जिस पद्मावती फिल्म को लेकर राजस्थान सहित पूरे देश में घमासान मचा हुआ है, उस फिल्म को देखने का दावा देश के जाने माने पत्रकार डाॅ. वेद प्रताप वैदिक ने किया है। ये वो ही पत्रकार हैं जिन्होंने पाकिस्तान जाकर भारत के दुश्मन नम्बर वन आतंकी हाफिज सईद से मुलाकात की थी। तब भी वैदिक को लेकर हंगामा हुआ और अब फिर वैदिक फिल्म निर्माता संजय लीला भंसाली के समर्थक के तौर पर सामने आए हैं। फिल्म देखने के बाद वैदिक का एक लेख भास्कर के 18 नवम्बर के अंत में छपा है। वैदिक ने जिस प्रकार हाफिज सईद से अपनी मुलाकात को सही ठहराया था, उसी तरह वैदिक ने भास्कर में अपने लेख के माध्यम से पद्मावती फिल्म की वकालत की है। वैदिक का कहना है कि फिल्म को लेकर राजपूत समाज का विरोध बेकार है, क्योंकि फिल्म में ऐसा कोई दृश्य नहीं है, जिसमें अलाउद्दीन खिलजी और रानी पद्मावती के बीच प्रेस प्रसंग हो। बल्कि फिल्म में रानी पद्मावती की वीरता और बलिदान का चित्रण किया गया। साथ ही अलाउद्दीन खिलजी को धूर्त, अहंकारी, कपटी और रक्त पिपासु बताया गया है। वह अपनी चचेरी बहन से जबर्दस्ती शादी करता है, वह समलैंगिक है, वह उस राघव चेतन की भी हत्या कर देता है जो उसे पद्मावती के अलौकिक सौन्दर्य की कथा कह कर चित्तौैड़ पर हमले के लिए प्रेरित करता है। यानि अपने लेख में वैदिक ने संजय लीला भंसाली का पक्ष मजबूती के साथ रखा है। जिस काम को भंसाली नहीं कर सके, उसे वैदिक ने करने की कोशिश की है। हालांकि लेख के अंत में भास्कर ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए साफ लिखा है कि ये लेखक के अपने विचार हैं। यानि भास्कर का प्रबंधन इन विचारों को सही नहीं मानता।
सवाल यह नहीं है कि फिल्म में क्या है और क्या नहीं? अहम सवाल यह है कि अपनी इज्जत बचाने के लिए अग्निकुंड में कूद कर जान देने वाली उस वीर महिला पर सिर्फ मनोरंजन और धन कमाने के लिए फिल्म क्यों बनाई गई? यह माना कि हमारे देश में लोकतंत्र है जिसमें अभिव्यक्ति की आजादी है। लेकिन अभिव्यक्ति की आड़ में आप सम्पूर्ण समाज की भावनाओं को आहत नहीं कर सकते। राजपूत समाज शुरू से ही इस फिल्म का विरोध कर रहा है, लेकिन इतने बड़े समाज की भावनाओं को दर किनार कर भंसाली ने फिल्म को बना ही लिया। इससे प्रतीत होता है कि भंसाली को किसी समाज के लोगों की कोई कद्र नहीं है। राजपूत  करणी सेना के संरक्षण लोकेन्द्र सिंह कालवी पहले ही कह चुके हैं कि इस फिल्म में पाकिस्तान में बैठे दाउद इब्राहिम का पैसा लगा हुआ है। और अब हाफिज सईद जैसे आतंकी से मुलाकात करने वाले पत्रकार वैदिक ने फिल्म को देखने का जो दावा किया है वह मायने रखता है। अपने लेख में वैदिक ने यह नहीं बताया कि फिल्म को किस प्रकार देखा गया। यानि क्या भंसाली ने फिल्म देखने का प्रस्ताव किया या फिर पत्रकारों के किसी दल में शामिल होकर वैदिक इस फिल्म को देखने गए। हालांकि कुछ न्यूज चैनल वालों ने भी फिल्म को देखने का दावा किया है। जिन चैनलों ने फिल्म देखी है, वे अब फिल्म के समर्थन में उतर आए हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि भंसाली ने मीडिया के एक वर्ग नेे फिल्म के समर्थन में अभियान शुरू किया है। वहीं सेंसर बोर्ड ने फिल्म को दिखाए जाने पर नाराजगी जताई है। सेंसर बोर्ड की ओर से कहा गया है कि अनुमति के बिना फिल्म को दिखाया जाना पूरी तरह गैर कानूनी है।
वैदिक को मिला गृहमंत्री का समर्थनः
फिल्म पद्मावती पर पत्रकार वैदिक ने जो विचार प्रकट किए हैं उन्हें राजस्थान के गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया का भी समर्थन मिल गया है। 18 नवम्बर को उदयपुर में मीडिया से संवाद करते हुए कटारिया ने कहा कि पत्रकार वैदिक ने फिल्म को देखने के बाद जो विचार प्रकट किए हैं उसे देखते हुए अब इस फिल्म का कोई विरोध नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वैदिक एक जाने माने पत्रकार हैं और उन्होंने फिल्म में जो देखा उसे ही अपने लेख में लिखा है। उन्होंने कहा कि अब फिल्म का विरोध समाप्त हो जाना चाहिए।

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