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वेदों का जन-पाठ और वैश्विक शांति और विश्व सद्भाव के लिए आवश्यक/ बहु-विश्वास संगोष्ठी,दो दिवसीय आयोजन की मुख्य विशेषता
श्री सत्य साईं सेवा संगठन जो एक बहु सांस्कृतिक आध्यात्मिक सेवा संगठन है द्वारा प्रशांथि निलयम में प्रथम अंतर्राष्ट्रीय वेद सम्मेलन और बहुधर्मी संगोष्ठी का आयोजन किया जायेगा। यह आयोजन भगवान श्री सत्य साईं बाबा के 92 जन्मदिवस समारोह के अवसर पर होगा जो 20 नवंबर से 21 नवंबर तक चलेगा। 
दो दिवसीय समारोह में भगवान सत्य साईं बाबा के 15 हजार  से अधिक भक्तों द्वारा वेद पाठ किया जायेगा। इस अवसार पर विश्व भर के 42 देशों के 600 प्रतिभागी उपस्थित होगें। श्री सत्य साईं बाबा के समर्थक भारत में इसी तरह का आयोजन करते  रहते हैं और उसे विश्व के कई भागों में सम्प्रेषित करते रहते हैं ताकि विश्व कल्याण की भावना और बलवती होती रहे।
   इस बहुधर्मी एवं वैदिक कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि रूप में आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के गवर्नर ईएसएल नारसिम्हान द्वारा किया जायेगा।  श्री नारसिम्हान के संरक्षण में भारत और विदेशों के अग्रणी वैज्ञानिकों को इस आयोजन में भाग लेना है। इनमें से कुछ वैज्ञानिकों द्वारा वेदों पर व्यापक शोध किया गया है उन्होंने ने भी इस कार्यक्रम में वक्ता के रूप में भाग लेगें और वेद के कई पहलुओं पर आयोजित सत्रों में वेदों की वैज्ञानिक व्याख्या प्रस्तुत जायेगी। साथ ही साथ वेद और आधुनिक समाज इसकी चुनौतियों और समाधान जैसे विषयों पर वेदों का संदर्भ देते हुए विशेष व्याख्यान प्रस्तुत करेगें। जिन विषयों पर वेदों का संदर्भ लिया जायेगा ,उनमें वेदों में इन विषयों की व्याख्या प्रमुख रूप से पाई गई है। इस संगोष्ठी में जिन बिन्दुओं को इसमें शामिल किया जायेगा,उनमें वेद से जुडे़ सभी महत्वपूर्ण अवयव शामिल हैं।  
 इनमें वेदों के प्राचीन ज्ञान को समझ कर पानी की समस्या और इसकी शमन की वैश्विक चुनौती प्रमुख है। इसके साथ-साथ वैश्विक स्थिरता के लिए समग्र विज्ञान और प्रौद्यिगिक अध्ययन के लिए वैदिक पूर्व-इतिहास एक उदाहरण है। साथ ही साथ भारत के भीतर और बाहर आधुनिक समय में वेदों की प्रासंगिकता  के साथ कृषि और पर्यावरण पर वैदिक विज्ञान विशेषकर भोजन की कमी को दूर करने के लिए प्रभावकारी उपाय पर विशेष चर्चा की जायेगा। 
दो दिवसीय संगोष्ठी में सभी धर्मों में एकीकरण तथा सेवा धार्मिक नेताओं द्वारा बहु-विश्वासी  प्रार्थनाओं का प्रस्तुतिकरण किया जायेगा। वैश्विक शांति के विचार संगोष्ठी के सभी प्रमुख धर्मों के वक्ताओं और विचारधाराओं पर अधिकार पूर्वक बोलने वाले कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण होगें।
जन्मदिन समारोहों तथा संगोष्ठी पर बोलते हुए अखिल भारतीय अध्यक्ष श्री निमीष पांड्या  (श्री सत्य साईं सेवा संगठन) ने कहा कि श्री सत्य साईं सेवा संगठन (एसएसएसएसओ इंडिया) ऐसे समय में यह महत्वपूर्ण सम्मेलन और संगोष्ठी आयोजित कर रहा है,जब एकता का संदेश और सेवाभाव पहले से भी कहीं अधिक मानवता के लिए प्रासंगिक हो रही है। उन्होंने कहा कि हम श्री सत्य साईं बाबा के 15 हजार  से  अधिक विभूतियों के प्रशांथि  निलयम में सम्मिलित होना अपने आप में विलक्षण है। इतना ही नहीं वेदों और अन्य पवित्र छंदों का पाठ उत्साह,ज्ञान, प्रसन्नता तथा विशिष्ट अनुभूति का प्रतीक है,जो हम सबके उत्साह का श्रेष्ठ कारण है। अध्यक्ष निमीष पांड्या ने कहा कि वेदों में वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना समग्र रूप से भरी है,जो हमें पूरे विश्व से जोड़ती ही है हममें एकात्मकता का भाव भारती है कि हम सब एक हैं। 
  श्री पांड्या ने कहा कि विश्व भर के कई श्रेष्ठ प्रमुख धार्मिक नेताओं का इस धार्मिंक संगोष्ठी में भाग लेना,एकता और सेवा के संदेश को फैलाने का महत्वपूर्ण कारक बनेगा। भगवान श्री सत्य साईं बाबा के सभी उपदेशों में इसी बात की प्रमुखता है।
इस आयोजन में जिन विशिष्ट विभूतियों ने सहभागिता लेना हैं उनमें हैं -
आचार्य डॉ लोकेश मुनी, संस्थापक अध्यक्ष, अहिंसा विश्व भारती,प्रो.मोहम्मद हनीफ खान शास्त्री, संस्कृत के प्रोफेसर, राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, स्वामी शांतमानंद, सचिव, रामकृष्ण मिशन, सिंह साहब ग्यानी गुरभचन सिंह, अगर श्री अकाल तख्त साहिब, अमृतसर ,अमृतसर में हरमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर) में ग्यानी गुरबचन सिंह-जड़ेदार, अकाल तख्त, श्री दिनेश राव, कर्नाटक राज्य बहल परिषद के सचिव के साथ-साथ तमाम विभूतियां उपस्थित थीं। इन विशिष्ट जनों में मौलाना मोहम्मद शफीक कसार्नी - अध्यक्ष, अखिल भारतीय इमाम 10 एसोसिएशन (डब्ल्यूबी) और चीफ इमाम, नाकोड़ा मस्जिद, कोलकाता, प्रोफेसर अली मोहम्मद नकवी - अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में शिया धर्मशास्त्र विभाग में प्रोफेसर,मौलाना अब्दुर रहमान माल्टा - महासचिव, अखिल भारतीय इमाम एसोसिएशन (पश्चिम बंगाल) स्वामी कृष्णानंद पुरी, वैदिक वैज्ञानिक, निदेशक, वैदिक ज्ञान, जयपुर, राजस्थान के आवेदन पर अनुसंधान संस्थान, डा. नोरियो मत्सुमी (मैट्सरी साइंस के मैट्सूमी लैबोरेटरी स्कूल, जापान एडवांस्ड इंस्टीट्यूट अॉफ साइंस एंड टैक्नोलॉजी, नोमी, इशिकावा (12 वीं शताब्दी के दौरान वैदिक प्रक्षेपवक्र ने वैदिक मूल्यों पर आधारित एक वैज्ञानिक राष्ट्र के रूप में जापान का निर्माण किया के साथ-साथ प्रो. डा. अन्ना सरस्वती कोन्जर - अंग्रेजी और फ्रांसीसी भाषाओं के प्रोफेसर, जुबजाना विश्वविद्यालय, स्लोवेनिया (शरीर के विभिन्न संकायों पर वेदों का जप और इसका प्रभावी प्रभाव), श्री जॉर्ज बेबेडेलिस - ग्रीस, ग्रीस के राष्ट्रीय परिषद के अध्यक्ष, और आईएसएसई, दक्षिण यूरोप के निदेशक तथा प्रोफेसर जॉन जे। किइनमैन- पारिस्थितिकी और प्रोफेसर के प्रोफेसर कोलोराडो विश्वविद्यालय, बोल्डर, यूएसए के नाम शामिल हैं। 

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