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मेंथ्रा के “ह्यूमन एडवांटेज” में बोले एक्सपर्ट्स 

मुंबई। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तेजी से लोगों के काम करने, कुछ नया रचने, संवाद करने और फैसले लेने के तरीके बदल रहा है। ऐसे में मेंथ्रा ने “ह्यूमन एडवांटेज” नाम से एक विशेष आयोजन किया। इसमें अलग-अलग क्षेत्रों के लीडर्स और बदलाव लाने वाले लोग एक बुनियादी सवाल पर मंथन करने के लिए एकत्र हुए: "एआई जैसे-जैसे ज्यादा सक्षम होता जा रहा है, इंसान होने की कौन-सी बातें और ज्यादा कीमती होती जा रही हैं?"

कारोबार, टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर, मनोविज्ञान, शिक्षा, उद्यमिता और क्रिएटिव समुदाय से जुड़े लोगों को एक साथ लाकर इस आयोजन में उन इंसानी क्षमताओं पर विस्तार से चर्चा की गई, जो एआई के साथ आगे बढ़ने के लिए बेहद जरूरी होंगी। इनमें भावनात्मक सेहत, लचीलापन, आपसी जुड़ाव, रचनात्मकता और लीडरशिप शामिल हैं।

यह आयोजन मानसिक स्वास्थ्य पर दुनिया भर में चल रही चर्चा के लिहाज से एक अहम मौके पर हुआ। इस साल वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे की थीम “आपबीती सुनी जाए: असली आवाजें, असली बदलाव” है। यह थीम कहती है कि जिन लोगों ने मानसिक स्वास्थ्य की चुनौतियों को खुद जिया है, उन्हें इससे जुड़ी नीतियों, सेवाओं और फैसलों को आकार देने में सार्थक भूमिका मिलनी चाहिए। 'ह्यूमन एडवांटेज' ने इसी विचार को आगे बढ़ाते हुए एक ऐसा मंच तैयार किया, जहां अलग-अलग अनुभव और नजरिए एक साथ आ सके। यहां टेक्नोलॉजी पर चर्चा के साथ-साथ यह भी परखा गया कि इसका इंसानी जुड़ाव, भावनात्मक सेहत, लचीलेपन, रचनात्मकता, लीडरशिप और हमारे जीने और काम करने के तरीके पर क्या असर पड़ रहा है।

यह विशेष कार्यक्रम तीन परस्पर जुड़े प्रमुख चरणों में विभाजित था। इसके पहले चरण में मशीनों के अधिक सक्षम होने के साथ इंसानी संभावनाओं को नए सिरे से समझने पर जोर दिया गया, जिसमें इस बात का विश्लेषण हुआ कि तकनीक के विस्तार के साथ हमारे भीतर की कौन-सी मानवीय बातें अधिक मूल्यवान हो जाती हैं और हम इस परिवर्तन के दौर से कैसे गुजरते हैं। दूसरे चरण में कामकाज में संतुलन, इंसानियत की कसौटी पर प्रगति और मानसिक सेहत पर केंद्रित गहन परिचर्चा आयोजित की गई। वहीं, तीसरे और अंतिम चरण में भविष्य की दिशा और इंसानी प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श हुआ, जिसमें यह परखा गया कि हम आगे चलकर क्या बनना चाहते हैं, क्या निर्माण करने का निर्णय लेते हैं और इन सबका अंतिम उद्देश्य क्या है; और इस प्रकार कार्यक्रम का समापन इंसान के अपने सचेत चुनाव और व्यक्तिगत जिम्मेदारी के संदेश के साथ हुआ।

मेंथ्रा के फाउंडर दिनाकर नागल्ला ने कहा, "एआई हमारे जीने और काम करने का तरीका बदल देगा, लेकिन हमारी सबसे बड़ी ताकत हमेशा इंसान होने की हमारी काबिलियत रहेगी। 'ह्यूमन एडवांटेज' का मकसद यह समझना था कि भविष्य को स्मार्ट टेक्नोलॉजी के साथ-साथ ज्यादा मजबूत, लचीले और एक-दूसरे से जुड़े हुए लोग भी आकार देंगे।"

कार्यक्रम में इल्यूजनिस्ट और मेंटलिस्ट चिराग जेठवानी ने एक खास प्रस्तुति दी। वक्ताओं के नजरिए ने इंसानी क्षमता, मानसिक सेहत, लीडरशिप और एआई के दौर में इंसानियत की बदलती भूमिका पर हुई बातचीत को और गहराई दी।

कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख हस्तियों और विचारकों ने वक्ता के रूप में अपने विचार साझा किए। इनमें बोलैंट इंडस्ट्रीज के चेयरमैन श्रीकांत बोल्ला; अभिनेता, गायक व बीटबॉक्सर मिहिर आहूजा; अल्केम लैबोरेटरीज के प्रेसिडेंट व ग्लोबल एचआर हेड डॉ. राजर्षि गांगुली; आईबीएम के वीपी (एआई) राधाकृष्ण बोल्लिनेनी; फ्लैशूट के फाउंडर वोलेटी कार्तिक; माइक्रोसॉफ्ट एआई की जीएम (हेल्थ, इंडिया) प्रेरणा नायक; और कम्युनिटी के फाउंडर सात्विक मांथिनी शामिल थे।

इसके साथ ही, अवसरम लीडरशिप की फाउंडर गरिमा देवेश्वर-बहल; अमेजन स्टोर्स की वीपी (पीएक्सटी) दीप्ति वर्मा; सरकार्स किचन और मडिकेरी क्राफ्ट कॉफी की फाउंडर सरिता सरकार; तेलंगाना सरकार के तेलंगाना इनोवेशन सेल के प्रभारी सीईओ मेराज फहीम; आईआईटी हैदराबाद के प्रोफेसर व डीन (एकेडमिक्स) प्रो. अशोक कुमार पांडे; इंफोसिस फाउंडेशन की चीफ एग्जीक्यूटिव मनीषा साबू; मल्ला रेड्डी विश्वविद्यालय की वाइस चेयरपर्सन डॉ. सीएच. प्रीति रेड्डी; और shaant.ai के फाउंडर प्रशांत जैन ने भी इस मंच से अपने अनुभव और दृष्टिकोण प्रस्तुत किए।

मेंथ्रा का मानना है कि टेक्नोलॉजी के भविष्य और इंसान की भलाई को अलग-अलग करके नहीं देखा जा सकता। एआई रोजमर्रा की जिंदगी में जैसे-जैसे गहराई से शामिल होता जा रहा है, इंसान की भावनात्मक सेहत को समझने और उसे सहारा देने की क्षमता बेहद अहम हो जाएगी। इसी के सहारे लोग और संगठन बदलावों के साथ तालमेल बिठा पाएंगे, आगे बढ़ पाएंगे और फल-फूल पाएंगे।

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