मुंबई। 3 करोड़ से अधिक सूक्ष्म इकाइयों को यूपीआई लेनदेन पर कोई एमडीआर शुल्क नहीं देना होगा, क्योंकि उनका मासिक टर्नओवर 1 लाख रुपये से कम है। इसके अलावा, व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) लेनदेन भी एमडीआर शुल्क से पूरी तरह मुक्त रहेंगे।
एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल के. मिंडा ने बड़े मूल्य के व्यापारी लेनदेन के लिए नए यूपीआई ढांचे की सराहना की है। उनके अनुसार, यह यूपीआई की स्थिरता को मजबूत करेगा, नवाचार को समर्थन देगा, धोखाधड़ी को रोकेगा और इसकी व्यापक स्वीकार्यता को बढ़ाएगा। यह ढांचा भुगतान बुनियादी ढांचे और स्वीकृति नेटवर्क को सशक्त बनाएगा, जिससे यूपीआई का दायरा और बढ़ेगा तथा यह देश भर के उपभोक्ताओं व व्यवसायों को बेहतर सेवाएं दे सकेगा।
एसोचैम ने सरकार के इस संतुलित दृष्टिकोण की प्रशंसा की है, जिसके तहत व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) के सभी यूपीआई लेनदेन को, चाहे राशि कितनी भी हो, पूरी तरह से मुफ्त रखा गया है। रुपये2,000 तक के व्यापारी (मर्चेंट) भुगतान भी एमडीआर से मुक्त रहेंगे।
यह ढांचा पात्र छोटे व्यापारियों को निरंतर शून्य-एमडीआर का समर्थन प्रदान करता है। इसमें P2PM श्रेणी के तहत यूपीआई QR कोड के माध्यम से प्रति माह रुपये 1 लाख तक प्राप्त करने वाले स्ट्रीट वेंडर्स और स्थानीय दुकानें शामिल हैं। इससे सूक्ष्म और छोटे व्यवसायों को अतिरिक्त भुगतान लागत से बचाने में मदद मिलेगी।
भारत में 3 करोड़ से अधिक सूक्ष्म इकाइयां हैं, जिन पर यूपीआई लेनदेन के लिए कोई एमडीआर शुल्क नहीं लगेगा, क्योंकि उनका मासिक टर्नओवर रुपये 1 लाख से कम है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि लगभग 96% मर्चेंट लेनदेन पूरी तरह अप्रभावित रहेंगे और एमडीआर केवल लगभग 4% P2M (पर्सन-टू-मर्चेंट) लेनदेन पर ही लागू होगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि दैनिक मर्चेंट भुगतानों का विशाल बहुमत बिना किसी एमडीआर प्रभाव के जारी रहे।
रुपये 2,000 से अधिक के निर्दिष्ट मर्चेंट लेनदेन पर 0.4% का एमडीआर लागू होगा, जिसे रुपये 75,000 और उससे अधिक के लेनदेन के लिए अधिकतम रुपये 300 पर सीमित (कैप) किया गया है। रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे आवश्यक और कम मार्जिन वाले क्षेत्रों में रुपये 2,000 से अधिक के लेनदेन पर रुपये 5 का फ्लैट एमडीआर लगेगा।
म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज, स्टॉकब्रोकर्स और डीलर्स सहित कैपिटल मार्केट लेनदेन के लिए एमडीआर 0.02% होगा, जो प्रति लेनदेन अधिकतम रुपये 300 तक सीमित रहेगा। यह औपचारिक वित्तीय बाजारों में डिजिटल अपनाने को बढ़ावा देगा।
इस नए ढांचे में कुल एमडीआर संग्रह के 5% हिस्से के साथ एक समर्पित फंड का भी प्रावधान है, जिसका उपयोग छोटे व्यापारियों के बीच यूपीआई को बढ़ावा देने और विशेष रूप से ग्रामीण तथा अर्ध-शहरी क्षेत्रों में इसकी व्यापक स्वीकार्यता का समर्थन करने के लिए किया जाएगा।
निर्मल के. मिंडा ने कहा कि उपभोक्ताओं और छोटे व्यापारियों को संरक्षण देते हुए एक टिकाऊ राजस्व तंत्र बनाकर, यह ढांचा नवाचार, बुनियादी ढांचे और भुगतान स्वीकृति में अधिक निवेश का समर्थन कर सकता है। इससे भारत के डिजिटल परिवर्तन को गति देने में यूपीआई की भूमिका और मजबूत होगी।
यह ढांचा अपनी पहुंच, नवाचार और बुनियादी ढांचे को मजबूत करते हुए यूपीआई की निरंतर वृद्धि को गति देगा, जिससे एक अधिक टिकाऊ और समावेशी डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) के निर्माण में मदद मिलेगी।
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