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ग्राहकों से असली प्रोडक्ट पहचानने की अपील 

मुंबई। क्लियर प्रीमियम वॉटर ने अपना अब तक का सबसे डिसरप्टिव कैंपेन लॉन्च किया है। ‘पानी हो तो क्लियर’ नाम के इस कैंपेन में ब्रांड एम्बेसडर ऋतिक रोशन की लोकप्रियता और उनकी सिनेमाई विरासत को केंद्र में रखते हुए एक मजबूत और स्पष्ट संदेश दिया गया है।

सात अरब अमेरिकी डॉलर से ज्यादा मूल्य वाले और डबल डिजिट ग्रोथ रेट से आगे बढ़ रहे बोतलबंद पानी के बाजार में पिछले कुछ वर्षों में लुकअलाइक ब्रांड्स की संख्या तेजी से बढ़ी है। क्लियर प्रीमियम वॉटर के अनुसार, यह मामला अब केवल मार्केटिंग या ब्रांडिंग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ग्राहकों के स्वास्थ्य और विश्वास से सीधे जुड़ा मुद्दा बन गया है। इसी वजह से कंपनी ने इस विषय पर खुलकर आवाज उठाने का फैसला किया है।

कैंपेन को लेकर ऋतिक रोशन ने कहा कि पिछले तीन वर्षों से मैं क्लियर की गुणवत्ता के प्रति प्रतिबद्धता का गवाह रहा हूं। ग्राहकों तक सुरक्षित पीने का पानी पहुंचाने की उनकी असलियत और जुनून काबिल-ए-तारीफ है। ग्राहक सुरक्षा को केंद्र में रखने वाले इस कैंपेन का हिस्सा बनकर मैं खुश हूं।

इस कैंपेन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें केवल सेलिब्रिटी का इस्तेमाल नहीं किया गया, बल्कि एक प्रभावशाली रूपक पेश किया गया है। ऋतिक रोशन लंबे समय से भारत के सबसे ज्यादा कॉपी किए जाने वाले स्टार्स में गिने जाते हैं। उनके डांस मूव्स, फिल्मी अंदाज और आइकॉनिक किरदार वर्षों से शादी समारोहों, टैलेंट शो और सोशल मीडिया रील्स में लगातार दोहराए जाते रहे हैं। हालांकि हर नकल आखिरकार असली के सामने कमजोर पड़ जाती है। क्योंकि बाहरी रूप भले एक जैसा लगे, लेकिन सहजता, सटीकता और वर्षों की मेहनत जैसी चीजों की सच्ची नकल संभव नहीं होती। क्लियर प्रीमियम वॉटर इसी संदेश को अपनी प्रोडक्ट क्वालिटी के साथ जोड़ता है।

कंपनी का कहना है कि कई लुकअलाइक ब्रांड्स ने क्लियर की बोतल, लेबल डिजाइन और कैप के रंग तक की नकल करने की कोशिश की है, जिससे ग्राहकों के लिए असली और नकली के बीच फर्क करना मुश्किल हो जाता है। लेकिन प्रोडक्ट के भीतर की गुणवत्ता, सख्त मानक, पूरी तरह ऑटोमेटेड प्रक्रिया और मल्टी-स्टेज प्यूरिफिकेशन जैसी चीजों की नकल संभव नहीं है।

क्लियर प्रीमियम वॉटर के फाउंडर और सीईओ नयन शाह ने कहा कि यह कैंपेन प्रतिस्पर्धा में जीत हासिल करने के लिए नहीं, बल्कि ग्राहकों की आवाज उठाने के लिए है। जहां नकल ग्राहकों की समझ को धुंधला बना सकती है, वहां हमारी जिम्मेदारी स्पष्टता वापस लाने की है। पानी के मामले में असलियत कोई विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता है।

‘पानी हो तो क्लियर’ टैगलाइन के साथ लॉन्च किए गए इस कैंपेन को केवल ब्रांड प्रॉमिस के रूप में नहीं, बल्कि ग्राहकों के लिए सीधे संदेश के तौर पर पेश किया गया है। कंपनी का दावा है कि इस अभियान के जरिए भारतीय ग्राहकों को ज्यादा जागरूक बनाने, समझदारी से चुनाव करने के लिए प्रेरित करने और असली प्रोडक्ट के प्रति भरोसा मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।
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