Wednesday, 4 March 2026

विश्व श्रवण दिवस पर देवांगी दलाल ने स्कूलों में बच्चों की नियमित श्रवण जांच को दिया बल

मुंबई। होली के पावन अवसर पर जहां देशभर में लोग  एकजुट हो एक दूसरे को रंग लगा रहे थे, वहीं जानी-मानी ऑडियोलॉजिस्ट और स्पीच-लैंग्वेज पैथोलॉजिस्ट देवांगी दलाल ने इस खास अवसर को एक महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश से जोड़ा - बच्चों के लिए समय रहते श्रवण जांच और समावेशी देखभाल की आवश्यकता।

हर वर्ष ३ मार्च को दुनियाभर में (डब्ल्यूएचओ) के नेतृत्व में विश्व श्रवण दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष की थीम रही यानी समुदायों से लेकर कक्षाओं तक, हर बच्चे के लिए सुनने की देखभाल। यह थीम बच्चों में सुनने की समस्या की जल्दी पहचान और समय पर इलाज के महत्व को बताती है।
देवांगी दलाल ने कहा कि अक्सर बच्चों में सुनने की समस्या तब तक सामने नहीं आती, जब तक उनके बोलने में देरी या पढ़ाई में दिक्कतें दिखाई न देने लगें। “जब तक बोलने में देरी साफ दिखती है, तब तक काफी कीमती समय निकल चुका होता है। इसलिए नियमित श्रवण जांच, माता-पिता की जागरूकता और स्कूलों की सतर्कता बहुत ज़रूरी है।” उन्होंने कहा कि कई बार सुनने की समस्या का इलाज संभव होता है, लेकिन जानकारी की कमी के कारण समय पर पहचान नहीं हो पाती। “अगर शुरुआत में ही समस्या पकड़ ली जाए, तो बच्चा साफ बोलना सीख सकता है, पढ़ाई में अच्छा कर सकता है और आत्मविश्वास के साथ समाज में आगे बढ़ सकता है,” उन्होंने समझाया। होली का उदाहरण देते हुए देवांगी दलाल ने कहा कि यह त्योहार सबको जोड़ने का प्रतीक है। “होली हमें सिखाती है कि भेदभाव मिटाकर सबको साथ लेकर चलना चाहिए। उसी तरह हमें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि सुनने में परेशानी वाले बच्चे खुद को अलग महसूस न करें। सही मार्गदर्शन और समय पर सहायता से हर बच्चा कक्षा और समाज में पूरी भागीदारी कर सकता है,” उन्होंने कहा विश्व स्वास्थ्य संगठन की पहल सरकारों, डॉक्टरों, शिक्षकों और परिवारों से अपील करती है कि बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच में श्रवण जांच को भी शामिल किया जाए। साथ ही, जांच सुविधाओं, डिजिटल श्रवण उपकरणों और पुनर्वास सेवाओं को आसान और सुलभ बनाया जाए, ताकि हर बच्चे को बराबर अवसर मिल सके। रंगों के इस उत्सव के बीच विश्व श्रवण दिवस का संदेश भी उतनी ही मजबूती से गूंजा — हर बच्चे का सुनना और समझ आना उसका अधिकार है। जागरूकता और समय पर कदम उठाकर हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि कोई भी बच्चा अनसुना न रह जाए।

 - सोम मिश्रा "शिवम"

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