जानलेवा रक्तस्त्राव विकार ग्रस्त महिला की सफल रोबोटिक हिस्टेरेक्टॉमी सर्जरी
नवी मुंबई। 37 वर्षीय नीलम के लिए बीते कई सालों में साल हर महीने आने वाला मासिक धर्म एक मेडिकल इमरजेंसी बन जाता था। हर महीने खून की कमी की वजह से अस्पताल की दौड़ लगानी पड़ती थी। एक जानलेवा ब्लीडिंग डिसऑर्डर ने उन्हें इस कदर मजबूर कर दिया था कि मासिक धर्म के भारी रक्तस्राव से बचने के लिए हर महीने खून चढ़ाने की ज़रूरत पड़ती थी। अपोलो हॉस्पिटल्स नवी मुंबई के डॉक्टरों ने मरीज़ की सफल रोबोटिक हिस्टेरेक्टॉमी कर एक नई मिसाल पेश की है। इस अत्यंत सटीक और मिनिमली इन्वेसिव सर्जरी ने उन्हें हर महीने होने वाले जानलेवा रक्तस्राव और बार-बार खून चढ़ाने के दर्दनाक सिलसिले से हमेशा के लिए आज़ाद कर दिया है।
मरीज़ 'ग्लांजमान्स थ्रोम्बास्थेनिया' से पीड़ित थी यह एक अत्यंत दुर्लभ जन्मजात बीमारी है। इसमें प्लेटलेट्स की संख्या तो सामान्य दिखती है, लेकिन वे अपना काम ठीक से नहीं कर पाते। नतीजा यह होता है कि खून के थक्के (clots) नहीं जमते, जिससे मामूली चोट लगने पर भी जानलेवा और अनियंत्रित रक्तस्राव का खतरा बना रहता है। नीलम के लिए यह बीमारी एक ऐसा चक्र बन गई थी जिसमें हर महीने अस्पताल और ब्लड ट्रांसफ्यूजन तय था। हाल ही में जब उन्हें अपोलो हॉस्पिटल्स में भर्ती किया गया, तो उनका हीमोग्लोबिन गिरकर मात्र 4 g/dL रह गया था जो जान के लिए बेहद खतरनाक था। उन्हें तुरंत स्थिर करने के लिए कई बार खून चढ़ाना पड़ा। इसी कठिन समय में उन्होंने इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए हिस्टेरेक्टॉमी (गर्भाशय निकालने का ऑपरेशन) कराने का कड़ा फैसला लिया।
'ग्लांजमान्स थ्रोम्बास्थेनिया' से पीड़ित मरीजों की सर्जरी करना अत्यंत जोखिम भरा होता है, क्योंकि इसमें रक्तस्राव रुकना लगभग नामुमकिन होता है। इस खतरे को कम करने के लिए, मेडिकल टीम ने रोबोटिक हिस्टेरेक्टॉमी का निर्णय लिया। यह एक आधुनिक तकनीक है जो अपनी सटीकता और सर्जरी के दौरान बेहद कम खून बहने के फायदों के लिए जानी जाती है। रोबोटिक हिस्टेरेक्टॉमी को लगभग शून्य रक्तस्राव के साथ सफलतापूर्वक पूरा किया गया और पूरे ऑपरेशन के दौरान खून चढ़ाने की ज़रूरत तक नहीं पड़ी। इतने उच्च-जोखिम वाले मामले में यह एक असाधारण उपलब्धि है। यह भारत में हाई-रिस्क सर्जिकल मामलों के प्रबंधन में एक ऐतिहासिक पड़ाव साबित होगा।
डॉ. तृप्ति दुबे, सीनियर कंसल्टेंट- प्रसूति, स्त्री रोग और रोबोटिक सर्जरी ने संभाली। इस ऐतिहासिक सफलता में उन्हें डॉ. पुनीत जैन कंसल्टेंट - हीमेटोलॉजी और हीमेटो-ऑन्कोलॉजी एवं प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर, बोन मैरो ट्रांसप्लांट और CAR T-सेल थेरेपी का विशेष सहयोग प्राप्त हुआ। सर्जरी पूरी तरह सफल रही और ऑपरेशन के दौरान खून चढ़ाने की कोई आवश्यकता नहीं पड़ी। मरीज़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए यह परिणाम वाकई में असाधारण है। ऑपरेशन के बाद, रिकवरी में सहायता के लिए एहतियातन ब्लड ट्रांसफ्यूजन दिया गया और मरीज़ की स्थिति में बिना किसी जटिलता के तेज़ी से सुधार हुआ।
डॉ. तृप्ति दुबे, सीनियर कंसल्टेंट- प्रसूति, स्त्री रोग और रोबोटिक सर्जरी, अपोलो हॉस्पिटल्स नवी मुंबई ने कहा,“ग्लांजमान्स थ्रोम्बास्थेनिया से पीड़ित मरीज़ों की सर्जरी करना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि सर्जरी का एक छोटा सा कदम भी अनियंत्रित रक्तस्राव शुरू कर सकता है। सर्जरी की तकनीक से लेकर ब्लड प्रोडक्ट्स देने के समय तक, हर पहलू की सूक्ष्म योजना बनानी पड़ी। रोबोटिक सर्जरी ने हमें असाधारण सटीकता के साथ ऑपरेशन करने और खून के नुकसान को कम से कम रखने में मदद की। मरीज़ को छह दिनों तक निगरानी में रखा गया और आश्चर्यजनक रूप से, अस्पताल में रहते हुए ही उन्होंने अपना ऑफिस का काम फिर से शुरू कर दिया। यह मामला दर्शाता है कि कैसे रोबोटिक सर्जरी सबसे जटिल स्थितियों में भी परिणामों को बदल सकती है और मरीज़ों को उम्मीद से कहीं ज्यादा जल्दी सामान्य जीवन में लौटने में सक्षम बनाती है।”
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