0
मुंबई। भारत की अभूतपूर्व आर्थिक प्रगति और बौद्धिक नेतृत्व के शिल्पकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ग्लोबल बिज़नेस समिट 2026 में मुख्य भाषण देंगे। यह शिखर सम्मेलन 13 और 14 फरवरी को नई दिल्ली स्थित होटल ताज पैलेस में आयोजित किया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में बीते 11 वर्षों में भारत ने उल्लेखनीय आर्थिक उपलब्धियाँ हासिल की हैं। भारत छह पायदान की छलांग लगाकर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और पिछले वर्ष जापान को पीछे छोड़ चुका है। अपेक्षाकृत कम समय में यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, और भारत 2030 तक विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेज़ी से अग्रसर है। ऐसे महत्वपूर्ण वैश्विक आर्थिक परिवेश में ग्लोबल बिज़नेस समिट 2026 में प्रधानमंत्री का संबोधन भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और उसे विश्व का नवाचार केंद्र बनाने की दिशा में एक स्पष्ट रोडमैप प्रस्तुत करने की संभावना रखता है, विशेषकर ऐसे समय में जब स्वदेशी विनिर्माण और तकनीकी क्षमताएँ निरंतर सशक्त हो रही हैं।

ग्लोबल बिज़नेस समिट ने स्वयं को दक्षिण एशिया के एक प्रमुख विचार नेतृत्व मंच के रूप में स्थापित किया है। इस वर्ष की थीम एक दशक विघटन का, एक सदी परिवर्तन की’ है, जिसके अंतर्गत बीते दशक में आए अभूतपूर्व बदलावों—भू-राजनीति, जलवायु, पूंजी और प्रौद्योगिकी में हुए व्यापक परिवर्तन—पर गहन और सार्थक चर्चाएँ होने की उम्मीद है। वैश्विक नेताओं, प्रमुख नीति-निर्माताओं और शीर्ष कॉर्पोरेट सीईओ की उपस्थिति में यह शिखर सम्मेलन भारत को ज्ञान-आधारित और नवाचार-प्रेरित अर्थव्यवस्था बनाने के लिए व्यावहारिक और प्रभावी रास्तों की खोज का अवसर प्रदान करेगा।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने समावेशी और सतत विकास की दिशा में एक सशक्त मार्ग अपनाया है। ‘मेक इन इंडिया’ जैसी पहल ने घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहन दिया है और इलेक्ट्रॉनिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा सहित कई क्षेत्रों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को आकर्षित किया है। डिजिटल इंडिया कार्यक्रम ने देश के तकनीकी परिदृश्य में क्रांतिकारी बदलाव लाते हुए एक मजबूत डिजिटल अर्थव्यवस्था की नींव रखी है, जो आज विश्व की सबसे उन्नत डिजिटल प्रणालियों में से एक मानी जाती है। इसके साथ ही, उच्च गति रेल, आधुनिक हवाई अड्डों और स्मार्ट सिटी परियोजनाओं में निवेश के माध्यम से बुनियादी ढांचे का विकास दीर्घकालिक समृद्धि के लिए एक मजबूत आधार तैयार कर रहा है।

भारत की आर्थिक सफलता के केंद्र में उसकी जनसांख्यिकीय शक्ति है—एक युवा, ऊर्जावान और कुशल कार्यबल। इसके साथ ही, भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम, जो दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्रों में शामिल है, ने फिनटेक, ई-कॉमर्स और आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में कई यूनिकॉर्न तैयार किए हैं, जो सिलिकॉन वैली जैसे वैश्विक नवाचार केंद्रों को कड़ी प्रतिस्पर्धा दे रहे हैं। शिक्षा और कौशल विकास से जुड़ी सरकारी पहलों ने इस विकास गति को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में भारत का उदय वैश्विक स्तर पर दूरगामी प्रभाव डालता है। भारत का विशाल उपभोक्ता बाज़ार व्यापार और निवेश के लिए अपार अवसर प्रदान करता है, जबकि नवाचार पर केंद्रित दृष्टिकोण इसे अनुसंधान एवं विकास (R&D) का एक वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में अग्रसर कर रहा है। आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस, बायोटेक्नोलॉजी और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भारतीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के बीच सहयोग वैश्विक प्रगति को नई गति दे रहा है। 5G और ब्लॉकचेन में भारत की अग्रणी भूमिका सहित इसकी डिजिटल अवसंरचना, सीमा-पार साझेदारियों को सशक्त बनाते हुए वैश्विक कनेक्टिविटी को बढ़ावा दे रही है।

भारत की आर्थिक नीतियाँ अनिश्चित वैश्विक परिदृश्य में स्थिरता को भी प्रोत्साहित करती हैं। आपूर्ति श्रृंखलाओं के विविधीकरण और किसी एक बाज़ार पर निर्भरता को कम करने के माध्यम से भारत वैश्विक आर्थिक लचीलापन बढ़ाने में योगदान दे रहा है। बहुपक्षीय व्यापार समझौतों और क्षेत्रीय आर्थिक समूहों में सक्रिय भूमिका निभाकर भारत सहयोग को बढ़ावा देता है और संरक्षणवादी प्रवृत्तियों का संतुलन करता है। विकासशील देशों की एक सशक्त आवाज़ के रूप में, भारत निष्पक्ष व्यापार प्रथाओं और प्रौद्योगिकी तक समान पहुंच की वकालत करते हुए वैश्विक आर्थिक मानदंडों को नए सिरे से परिभाषित कर रहा है।

Post a Comment

 
Top